- भूड़बराल के प्लांट में हुआ ट्रायल सफल, 10 दिन चलेगा ट्रायल
- बिजेन्द्र एनर्जी एडं रिसर्च कंपनी के प्लांट को मिली सफलता
- ट्रायल सफल होने से गद्गद है नगर निगम के अफसर
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: कचरे से बिजली बनाने की दिशा में क्रांतिधरा को बड़ी उपलब्धि मिल गई है। कचरे से बिजली बनाकर ग्रिड को देने के लिए गुरुवार को ट्रायल सफल रहा। बिजली उत्पादन के लिए प्लांट को ग्रिड से जोड़ दिया गया है। यह पूरी प्रक्रिया पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम के अधिकारियों की मौजूदगी में किया गया। यह ट्रायल पूरी तरह से सफल रहा।
हालांकि यह ट्रायल अगले 10 दिन तक चलेगा। यह ट्रायल भूड़ बराल स्थित ब्रिजेन्द्रा एनर्जी एंड रिसर्च कम्पनी के प्लांट को ग्रिड से जोड़ने का किया गया। इस दौरान भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी और कम्पनी के निदेशक ब्रिजेन्द्र सिंह ने बटन दबाकर प्लांट के ट्रायल का शुभारंभ किया। ट्रायल जैसे ही सफल रहा, तभी यहां मौजूद लोगों की बांछे खिल गई।
यह अपने आप में अनूठा प्रयोग है, जो देश भर में किया जाना चाहिए। कचरे से बिजली बनाने के दावे ही किये जा रहे थे, लेकिन अब धरातल पर बिजली बनते हुए देख भी लिया है। इस प्रयोग की सफलता के बाद नगर निगम व इससे जुड़े अधिकारी गद्गद है। शहर से जो कूड़ा निकल रहा है, उसका अब सदपुयोग होगा। कूडे से नगर निगम की आर्थिक स्थिति में सुधार संभव हो सकेगा। क्योंकि बिजली बिकेगी तो अर्थ व्यवस्था बेहतर होगी। फिर कूड़े को लेकर जो बवाल शहर में बना रहता है, उससे राहत मिलेगी।
ये रहे मौजूद
इस दौरान सहायक नगर आयुक्त प्रथम बृजपाल सिंह, सहायक नगर आयुक्त द्वितीय इन्द्र विजय यादव, पीवीवीएनएल से अधिशासी अभियंता प्रिंस कुमार गौतम, अधिशासी अभियंता टेस्टिंग रामबाबू और एसडीओ कुलदीप तोमर मौजूद रहे। कम्पनी के निदेशक ने बताया कि लगभग 10 दिन प्लांट का ट्रायल होगा। जो भी कमियां दिखेंगी उन्हें दूर कर सुव्यवस्थित प्लांट चलने लगेगा।
सीएम करेंगे वर्चुअल उद्घाटन
कूडे से बिजली बनाने वाले प्लांट का उद्घाटन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगे। यह उद्घाटन वर्चुअल होगा। प्लांट का वर्चुअल उद्घाटन के लिए तिथि मांगी जाएगी। प्लांट का ट्रायल चालू होने के बाद बिजली जनरेट होने पर 24 घंटे का समय लगेगा।
इसके बाद प्लांट से ग्रिड पर बिजली भेजी जाएगी। इस मौके पर भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने कहा कि मेरठ क्रांतिधरा है। 1857 में आजादी की क्रांति हुई थी। अब कचरे की आजादी क्रांति की शुरूआत कूड़े से बिजली उत्पादन के साथ शुरू होगी।

