Friday, March 13, 2026
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छात्रों के मुद्दे पर नीतीश-भाजपा चुप क्यों?

Samvad 49

बिहार में जिस प्रकार से एक बार फिर पिछले करीब एक हफ्ते से छात्रों पर लाठियां भांजी जा रही हैं और जिस प्रकार से कड़कड़ाती सर्दी में उन पर ठीक वैसे ही ठंडे पानी की चोट करने वाली वाटर कैनन से बौछार की जा रही है, जिस प्रकार से किसानों पर उनके द्वारा किए जा रहे आंदोलन के दौरान बार-बार की गई थी। मुझे समझ नहीं आ रहा है कि एक तो सरकारें छात्रों को और उन्हें जिनकी पढ़ाई पूरी हो चुकी है, उन्हें नौकरियां देने में नाकाम हैं, ऊपर से पेपर लीक और तमाम तरह की परीक्षा पारदर्शिता को लेकर अव्यवस्थाएं इतनी हैं कि छात्रों को तमाम तरह की परेशानियां आती हैं। ऊपर से अगर कोई भर्ती होती भी है, तो उसमें उन्ही बच्चों का सिलेक्शन हो पाता है, जो मोटी रिश्वत दे पाने में समर्थ होते हैं। और इस प्रकार से कर्ज लेकर या जैसे-तैसे खुद मेहनत मजदूरी करके जो छात्र पढ़ाई करते हैं, उनके साथ तो न्याय होता ही नहीं है, उनके साथ भी न्याय नहीं हो पाता, जो कड़ी मेहनत करके सरकारी नौकरियों के लिए दिन-रात तैयारी करते हैं। बिहार में इस बार जिस प्रकार से बीपीएससी यानि बिहार लोक सेवा आयोग की परीक्षा में पेपर लीक और उसके बाद इसके खिलाफ जांच और दोबारा परीक्षा आयोजित कराने की मांग को लेकर शांति से धरने पर बैठे, तो नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली बिहार की एनडीए सरकार ने छात्रों की मांगें मानने की जगह उन पर लाठियां भंजवा दीं। लेकिन इसके बाद हालात बेकाबू हो गए।

बहरहाल, बीपीएससी की 70वीं प्रारंभिक परीक्षा 13 दिसंबर 2024 को आयोजित हुई थी। इस परीक्षा में गड़बड़ी और लापरवाही को स्वीकार भी सरकार की तरफ से किया गया है और छात्रों को शांत करने के लिए बिहार सरकार ने बीपीएससी की इस 70वीं संयुक्त (प्रारंभिक) प्रतियोगिता पुनर्परीक्षा का आयोजन 4 जनवरी को पटना के 22 केंद्रों पर दोपहर 12 बजे से करा तो दिया, लेकिन पूरे बिहार में तमाम छात्र आंदोलन जारी रखे हुए हैं और ऐसा कहा जा रहा है कि परीक्षा के बाद छात्र फिर से आंदोलन पर बैठ सकते हैं। बिहार सरकार की तरफ से मिली जानकारी के मुताबिक, 4 जनवरी को बीपीएससी परीक्षा में करीब 12 हजार छात्र परीक्षा दी। परीक्षा से वाले दिन बिहार सरकार के आदेश पर सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक परीक्षा केंद्रों के चारों तरफ 100 मीटर के दायरे में धारा-144 लागू रही, जिससे परीक्षा केंद्रों के पास कोई खड़ा नहीं हो सका। यहां तक कि परीक्षा केंद्रों के 100 मीटर दूर तक सभी फोटो स्टेट की दुकानें और साइबर कैफे बंद रहे। बहरहाल, सवाल ये है कि क्या परीक्षा दोबारा कराने से छात्र आंदोलन खत्म होगा? हो सकता है कि बिहार सरकार जल्द ही इस परीक्षा के रिजल्ट घोषित कर दे, लेकिन क्या इससे छात्र शांत हो सकेंगे? छात्रों का आरोप है कि उनके साथ न सिर्फ धोखा हुआ है, बल्कि उन पर बिना कारण के अत्याचार भी हो रहा है, जिसका जवाब विधानसभा चुनाव में दिया जाएगा। छात्रों के आंदोलन में कई विपक्षी नेता भी कूद पड़े हैं। इन नेताओं में लोकसभा चुनाव में हार चुके चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर, पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव, कांग्रेस और आरजेडी के कई नेता बढ़-चढ़कर भाग ले रहे हैं। छात्रों के साथ आंदोलन करने को लेकर बिहार में करीब 10 विपक्षी विधायकों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज हो चुकी है। सभी विधायकों के खिलाफ छात्रों को भड़काने, तोड़फोड़ कराने, चक्का जाम का आह्वान करने और सरकार के खिलाफ काम करते हुए विधि व्यवस्था में व्यवधान डालने के आरोप लगे हैं।
लेकिन सरकार ने अपनी गलतियों को अभी नहीं माना है। नीतीश कुमार कुछ बोल नहीं रहे हैं और न ही भाजपा के दो-दो उप मुख्यमंत्री कुछ बोल रहे हैं। चारों तरफ नीतीश सरकार की जब निंदा होने लगी और जब बिहार सरकार को लगा कि उसे आने वाले इस साल 2025 के विधानसभा चुनाव में इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा, तो उसने तुरत-फुरत बीपीएससी की परीक्षा दोबारा आयोजित करा दी, लेकिन न तो छात्रों से माफी मांगी है और न ही उनके खिलाफ कार्रवाई करने वाली पुलिस और उसके अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाही नहीं की गई। रोजगार अधिकार अभियान की संचालन समिति की तरफ से जारी किए गए एक वक्तव्य में राजेश सचान ने कहा है कि पटना में जिस प्रकार से बीपीएससी परीक्षार्थियों और उनका साथ देने आए छात्रों पर बर्बर तरीके से लाठीचार्ज किया गया और भयंकर सर्दी के मौसम में वाटर कैनन से पानी फेंका गया है, वो गलत है। छात्रों के दमन पर तत्काल रोक लगनी चाहिए।

सवाल ये भी है कि जहां भी भाजपा या एनडीए की सरकार होती है, वहां पेपर लीक की घटनाएं क्यों होती हैं? हालांकि ये कोई पहली बार नहीं है, जब बिहार में पेपर लीक की घटना हो रही है और न ही पहली बार है कि छात्रों पर लाठीचार्ज हो रहा है। बिहार तो नकल करने के लिए भी बदनाम रहा है। लेकिन कभी भी बिहार में किसी सरकार ने छात्रों के हित में कोई ऐसा काम नहीं किया, जिससे उनका पलायन रुक सके और वो अपने राज्य यानि बिहार में रोजगार पा सकें। और जब-जब छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाई है, तब-तब उन पर लाठियां बरसाई गई हैं। इस बार भी पेपर लीक और दूसरी परेशानियों को लेकर जब हजारों की तादाद में छात्र गांधी मैदान में जुटे, तो सरकार ने उनकी आवाज नहीं सुनी, उल्टा पुलिस भेजकर उन पर लाठियां बरसवा दीं। छात्रों ने फिर भी बिहार सरकार को पूरे विवाद को सुलझाने के लिए 48 घंटे का समय दिया था, जिसके बाद ही वो आमरण-अनशन पर बैठे थे। लेकिन सरकार ने इस मामले को बिना ये सोचे ही बढ़ा दिया कि छात्रों के आंदोलन से सरकारें गिर भी जाती हैं।

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