Saturday, March 14, 2026
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प्यार के उत्सव का नया बाजार

Samvad 48

पिछले कुछ समय से ग्लोबलाइज्ड समाज में प्यार भी ग्लोबल ट्रेंड का हो गया है। आज जहां इजहार और इकरार करने के तौर तरीके बदल गए हैं, वहीं इंटरनेट के मौजूदा दौर में प्यार भी बाजारू हो चला है। पहली बार शहरी चकाचौंध से इतर प्यार का यह उत्सव एक बड़ा बाजार को अपनी गिरफ्त में ले चुका है। हर जगह वैलेंटाइन की संस्कृति पसरती जा रही है। आज युवा भी इसकी गिरफ्त में पूरी तरह से नजर आते है तभी तो शहरों से लेकर कस्बों तक वैलेंटाइन का जलवा देखते ही बनता है। आलम यह है ये बड़ा उत्सव बन चुका है जो भारतीयों में तेजी से अपनी पकड़ बना रहा है। वैलेंटाइन के चकाचौंध पर अगर दृष्टि डालें तो इस संबन्ध में कई किस्से प्रचलित हैं। रोमन कैथोलिक चर्च की माने तो यह ‘वैलेंटाइन’अथवा ‘वलेंतिनस’ नाम के तीन लोगों को मान्यता देता है जिसमें से दो के संबन्ध वैलेंटाइन डे से जोड़े जाते हैं, लेकिन बताया जाता है इन दो में से भी संत ‘वैलेंटाइन’ खास चर्चा में रहे।

कहा जाता है संत वैलेंटाइन प्राचीन रोम में एक धर्म गुरू थे। उन दिनों वहां पर क्लाउडियस दो का शासन था। उसका मानना था अविवाहित युवक बेहतर सैनिक हो सकते हैं, क्योंकि युद्ध के मैदान में उन्हें अपनी पत्नी या बच्चों की चिंता नहीं सताती। अपनी इस मान्यता के कारण उसने तत्कालीन रोम में युवकों के विवाह पर प्रतिबंध लगा दिया। किन्दवंतियो की मानें तो संत वैलेंटाइन के क्लाउडियस के इस फैसले का विरोध करने का फैसला किया। बताया जाता है कि वैलेंटाइन ने इस दौरान कई युवक युवतियों का प्रेम विवाह करा दिया। यह बात जब राजा को पता चली तो उसने संत वैलेंटाइन को 14 फरवरी को फांसी की सजा दे दी। कहा जाता है संत के इस त्याग के कारण हर साल 14 फरवरी को उनकी याद में युवा वैलेंटाइन डे मनाते हैं। इसके अलावा कई और कथाएं प्रचलित हैं। आज युवाओं में वैलेंटाइन की खुमारी सर चढ़कर बोल रही है। इस दिन के लिए सभी पलके बिछाये बैठे रहते हैं। भईया प्रेम का इजहार जो करना है? वैलेन्टाइन प्रेमी इसको प्यार का इजहार करने का दिन बताते है। यूं तो प्यार करना कोई गुनाह नहीं है लेकिन जब प्यार किया ही है तो इजहार करने मे देर नहीं होनी चाहिए, लेकिन अभी का समय ऐसा है जहां युवक युवतियां प्यार की सही परिभाषा नहीं जान पाए हैं। वह इस बात को नहीं समझ पा रहे कि प्यार को आप एक दिन के लिए नहीं बांध सकते। वह तो प्यार को हंसी-मजाक का खेल समझ रहे हैं।

यूं तो हमारी संस्कृति में प्रेम को परमात्मा का दूसरा रूप बताया गया है, अत: प्रेम करना गुनाह और प्रेम का विरोधी होना सही नहीं होगा, लेकिन वैलेंटाइन के नाम पर जिस तरह का पश्चिमीपरस्त विस्तार हो रहा है, वह सही नहीं है। वैसे भी यह प्रेम की स्टाइल भारतीय जीवन मूल्यों से किसी तरह मेल नहीं खाती। आज का वैलेंटाइन डे भारतीय काव्य शास्र में बताऐ गए मदनोत्सव का पश्चिमी संस्करण प्रतीत होता है, लेकिन बड़ा सवाल जेहन में हमारे यह आ रहा है क्या आप प्रेम जैसी चीज को एक दिन के लिए बांध सकते हैं? शायद नहीं। एक समय ऐसा था जब राधा कृष्ण, मीरा वाला प्रेम हुआ करता था जो आज के वैलेंटाइन प्रेमियों का जैसा नहीं होता था। आज लोग प्यार के चक्कर में बर्बाद हो रहे हैं। हीर-रांझा, लैला- मजनू रोमियो-जूलियट के प्रसंगों का हवाला देने वाले हमारे आज के प्रेमी यह भूल जाते हैं, मीरा वाला प्रेम सच्ची आत्मा से संबन्ध रखता था। आज तो प्यार बाहरी आकर्षण की चीज बनती जा रहा है। प्यार को गिफ्ट और पॉकेट में तोला जाने लगा है। वैलेंटाइन के प्रेम में फंसने वाले कुछ युवा सफल तो कुछ असफल साबित होते हैं। जो असफल हो गए तो समझ लो बरबाद हो गए, क्योंकि यह प्रेम रूपी बग बड़ा खतरनाक है। एक बार अगर इसकी जकड़ में आप आ गए तो यह फिर भविष्य में भी पीछा नहीं छोड़ेगा। असफल लोगों के तबाह होने के कारण यह वैलेंटाइन डे घातक बन जाता है। वैलेंटाइन के नाम पर आज हमारे समाज में जिस तरह की उद्दंडता हो रही है, वह चिंतनीय ही है। संपन्न तबके साथ आज का मध्यम वर्ग और अब निम्न तबका भी इसके मकड़जाल में फंसकर अपना पैसा और समय दोनों खराब करते जा रहे हैं। आज वैलेंटाइन की स्टाइल बदल गई है। गुलाब गिफ्ट दिए, पार्टी में थिरके बिना काम नही चलता। यह मनाने के लिए आपकी जेब गर्म होनी चाहिए। यह भी कोई बात हुई क्या जहां प्यार को अभिव्यक्त करने के लिए जेब की बोली लगानी पड़ती हो?

आज के समय में वैलेंटाइन प्रेमियों की तादाद बढ़ रही है। साल दर साल। इस बार भी प्रेम का सेंसेक्स पहले से ही कुलाचें मार रहा है। वैलेंटाइन ने एक बड़े उत्सव का रूप ले लिया है। मॉल, गिफ्ट, आर्चीस, डिस्को का आज इससे चोली दामन का साथ बन गया है। अगर आप में यह सब कर सकने की सामर्थ्य नहीं है तो आपका प्रेमी नाराज। बस बेटा फिर प्रेम का द एंड समझें। प्यार का स्टाइल समय बदलने के साथ बदल रहा है। वैलेंटाइन प्रेमी भी हर साल बदलते ही जा रहे हैं। आज प्यार की परिभाषा बदल गई है। वैलेंटाइन का चस्का हमारे युवाओं में तो सर चढ़कर बोल रहा है, लेकिन उनका प्रेम आज आत्मिक न होकर क्षणिक बन गया है। उनका प्यार पैसों में तोला जाने लगा है। आज की युवा पीढ़ी को न तो प्रेम की गहराई का अहसास है, न ही वह सच्चे प्रेम को परिभाषित कर सकती है। उनके लिए प्यार मौज मस्ती और सैर सपाटे का खेल बन गया है जहां बाजार में प्यार नीलाम हो गया है और पूरे विश्व में इस दिन प्यार के नाम पर मुनाफे का बड़ा कारोबार किया जा रहा है ।

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