जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: हस्तिनापुर में चर्चित पीएनबी के ब्रांच मैनेजर के घर से 26 लाख के जेवरात लूट के विरोध पर उनकी पत्नी तथा बेटे की हत्या में न्यायालय स्पेशल जज ईसी एक्ट चंद्रशेखर मिश्र ने फैसला सुना दिया है। न्यायालय ने ब्रांच मैनेजर के जीजा हत्याभियुक्त लुटेरे हरीश जाटव को आजीवन कारावास की सजा के साथ-साथ 36 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।
ये था मां-बेटे की हत्या का मामला
कस्बा हस्तिनापुर के रामलीला मैदान में वर्ष 2022 में संदीप कुमार पुत्र राजेंद्र के अलावा उनकी पत्नी शिखा तथा बेटा रुकांश रहते थे। संदीप कुमार जनपद बिजनौर स्थित पीएनबी में ब्रांच मैनेजर थे। 30 अगस्त, 2022 को उनके आवास पर उनकी पत्नी शिखा व बेटे रुकांश के शव अलग-अलग बेड पर मिले थे। घर से लगभग 80 हजार रुपये की नकदी एवं 26 लाख रुपये के जेवरात व स्कूटी गायब थी। इससे क्षेत्र में सनसनी फैल गई थी। थाने पर संदीप कुमार ने अज्ञात में हत्या तथा लूट का मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस विवेचना में संदीप कुमार के जीजा हरीश जाटव पुत्र जसवंत निवासी सेक्टर-49 नोएडा, कमिश्नरेट गौतमबुद्धनगर तथा उसके एक साथी का नाम प्रकाश में आया था। हस्तिनापुर थाना पुलिस ने हरीश जाटव को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। इसके बाद एक नवंबर 2022 को न्यायालय में अभियुक्त के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। न्यायालय में हस्तिनापुर पुलिस के अलावा जिला शासकीय अधिवक्ता ने प्रभावी पैरवी की। न्यायालय स्पेशल जज ईसी एक्ट ने मामले में मंगलवार को पत्रावलियों पर मौजूद साक्ष्यों के आधार पर हत्याभियुक्त हरीश जाटव को दोष सिद्ध होने के उपरांत आजीवन कारावास की सजा एवं 25 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया।
सीसीटीवी कैमरों ने खोला था ‘राज’
वारदात को अंजाम देने के बाद जब हरीश जाटव स्कूटी से अपने किसी अज्ञात साथी के साथ चेहरे पर कपड़ा लपेटकर जा रहे थे तो सबसे पहले वे कस्बा हस्तिनापुर में बंगाली बाजार के समीप काली माता मंदिर पर लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हुए। यहां स्कूटी का नंबर स्पष्ट नजर आया। इसके बाद भारत गैस गोदाम तथा फिर माखननगर मार्ग हत्यारोपी हरीश जाटव सीसीटीवी में कैद हुआ। इसके बाद वह साकेत स्थित चौराहे पर लगे सीसीटीवी कैमरे में स्पष्ट नजर आया। हरीश जाटव द्वारा दोहरे हत्याकांड व लूट की वारदात को अंजाम देने के बाद की गतिविधियां गाजियाबाद बाद तक सीसीटीवी कैमरों में कैद हुर्इंं। इसके बाद पुलिस को जब हत्यारे का गाजियाबाद या गौतमबुद्धनगर का निवासी होने का शक हुआ तो उसने ब्रांच मैनेजर संदीप कुमार से इस बारे में पूछताछ की। जिस पर संदीप कुमार ने बताया कि उनका जीजा हरीश जाटव गौतमबुद्धनगर में रहता है। इसके बाद पुलिस ने हरीश जाटव को गिरफ्तर किया था।
लूट के विरोध पर गला घोंटकर की थी हत्या
ब्रांच मैनेजर संदीप कुमार के घर पर उसका जीजा हरीश जाटव रिश्तेदार होने के नाते आरोप से उस समय चला गया था, जब संदीप कुमार ड्यूटी पर गए थे। घर पर उसकी पत्नी शिखा व बेटा रुकांश ही मौजूद थे। हरीश जाटव ने अलग-अलग कमरे में गला दबाकर शिखा व रुकांश की हत्याएं की थी। उसके बाद वह घर में रखी नकदी व 26 लाख रुपये मूल्य के जेवरात लेकर शिखा की स्कूटी लेकर फरार हो गया था। देर शाम करीब सात बजे ब्रांच मैनेजर संदीप कुमार बिजनौर से अपने घर हस्तिनापुर पहुंचे थे, तब जाकर उनको पत्नी और बेटे की हत्या का पता चला था। प्रारंभ में पुलिस लूट और हत्या मानने के लिए तैयार ही नहीं थी।
मुरादनगर में फेंक दी थी स्कूटी
हस्तिनापुर पुलिस हरीश जाटव ने पूछताछ में भाभी शिखा व भतीजे रुकांश की हत्या करना तथा लूटपाट करना स्वीकार कर लिया था। साथ ही, उसने पुलिस को बताया था कि उसने शिखा की स्कूटी मुरादनगर गंगनहर में फेंक दी थी। पुलिस ने हत्यारोपी की निशानदेही पर संदीप कुमार के घर से लूटे गए जेवरात भी बरामद कर लिए थे।
मां-बेटा हत्याकांड में 14 गवाह किए पेश
न्यायालय अपर जिला जज विशेष न्यायाधीश ईसी एक्ट के समक्ष शिखा तथा रुकांश की हत्या में 14 गवाह पेश किए गए। इनमें विवेचक के अलावा पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर तथा अन्य लोग शामिल रहे। अधिवक्ता ओमकार भाटी द्वारा आरोपी के खिलाफ मुकदमे को आरोप साबित करते हुए 14 गवाह पेश कराये। न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुनकर व पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को सजा सुनाई।
एक हत्यारोपी ने कर ली थी खुदकुशी
आठ माह की गर्भवती शिखा तथा उसके पांच साल के बेटे रुकांश की हत्या में हरीश जाटव के साथ शामिल रहे कस्बा पिलखुवा, जनपद हापुड़ निवासी रवि कुमार ने हत्याकांड के कुछ दिन बाद गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। घटनास्थल से पुलिस को रवि का सुसाइड नोट भी मिला था। सुसाइड नोट में रवि ने आत्महत्या का कारण शिखा व रूकांश की हत्या को बताया था। दोहरे हत्याकांड के बाद से वह आत्मग्लानि में था। इसलिए उसने आत्महत्या की थी। रवि कुमार, हरीश के जीजा शेरसिंह का चचेरा भाई था।
संदीप-शिखा की हुई थी लव मैरिज
शिखा जनपद उन्नाव के गांव कंजोरा की निवासी थी। उसके पिता श्रीपाल खाद्य विभाग, मेरठ में सुपरिटेंडेंट के पद पर तैनात थे। श्रीपाल शास्त्री नगर में रह रहे थे जबकि शिखा और संदीप मेरठ मेें साथ-साथ पढ़े थे। फिर, उसकी पीएनबी में क्लर्क के पद पर नौकरी लग गई थी। ग्रेजुएट करने बाद वह प्रोन्न्नति पाकर प्रबंधक बन गया था। पढ़ाई के दौरान प्रेम संबंध होने के चलते संपदीप व शिखा ने बाद में प्रेम विवाह कर लिया था। हरीश ने भी डोली से लव मैरिज की थी। संदीप कुमार ने अपनी बहन डोली के लव मैरिज का विरोध किया था।
चोरी के आरोप से व्यथित था हरीश जाटव
बैंक मैनेजर संदीप कुमार के ससुर श्रीपाल ने हत्याकांड के समय पुलिस को बताया था कि संदीप कुमार के छोटे भाई दीपक कुमार की शादी में 50 हजार रुपये चोरी हो गए थे। संदीप ने चोरी का आरोप हरीश पर लगाया था। तभी से हरीश संदीप से काफी नाराज और अपने आपको अपमानित महसूस करता चला आ रहा था। इसके चलते उसने संदीप कुमार की पत्नी शिखा व बेटे रूकांश की हत्या की वारदात को अंजाम दिया। ढाई लाख की नगदी तथा जेवरात इसलिए लूटे गए ताकि पुलिस वारदात को लूट समझती रहे।

