जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: कांवड़ यात्रा शुरू होने वाली है, लिहाजा कुछ दिनों के लिए आपको शहर की मुख्य सड़कों की दशा और व्यवस्था ठीक मिल सकती है, लेकिन कांवड़ यात्रा खत्म होते ही आपको फिर से दुश्वारियों का दंश झेलना पड़ सकता है, क्योंकि सुविधा देने के नाम पर आपसे टैक्स वसूलने वाले जिम्मेदार आंखे मूंदकर सो जाएंगे या फिर यूं कहे वह आपको अपके हाल पर छोड़ देंगे। अगर शहर के अंदर सुविधाओं के नाम पर परेशानियों का दंश झेल रह बाशिंदों की समस्याओं पर गौर किया जाए तो आज भी शहर की कोई गली ऐसी नहीं होगी, जिसकी सड़कों में गड्ढे न हो या फिर गंदा पानी सड़कों पर बहता हुआ नजर न आए। इतना ही नहीं खंभों से आपको स्ट्रीट लाइटें भी नजारत मिलेंगी।
यूं तो मेरठ नगर निगम कहलाता है और देश की राजधानी दिल्ली से जोड़ने के लिए शहर को रैपिड ट्रेन भी मिलने जा रही है। शहर को स्वच्छ व हरा भरा बनाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। भारी भरकम बजट भी सरकार से मिल रहा है, जो शहर की जनता से विभिन्न टैक्स के रूप में वसूला जाता है, लेकिन हकीकत ये है कि आज भी हर माह करोड़ों रुपये का टैक्स विभिन्न मदों में जनता से वसूलने वाले विभागों के अधिकारी शहर के बाशिंदों की समस्याओं से गुरजे करते हैं। इसलिए उन्हें उनके हाल पर छोड़ देते हैं, चाहे गड्ढे में गिरने से किसी की मौत हो या फिर खुले नाले में गिरने से या फिर खुले में रखे बिजली के ट्रांसफार्मर की चपटे में आने से अकाल मौत। टेढ़े खंभे, कूड़ों के ढेर, सड़कों पर झूलते बिजली के तार या फिर बेगमपुल से लेकर हापुड़ अड्डे तक सड़क पर पड़ी आढ़ी तिरछी टूटी लोहे की रेलिंग, देखा जाए तो सीधे तौर पर कोई भी विभाग इनकी वजह से हो रहे हादसों की जिम्मेदारी लेने से सीधे तौर पर बचता है। अधिकारियों की नींद तब टूटती है, जब विवश होकर लोग सड़कों पर उतर कर आंदोलन और हंगामा करते हैं, लेकिन तब तक काफी देर हो जाती है और जाने वाला चला जाता है। या फिर यूं कहे कि हम महानगर के बाशिंदे है, दुश्वारियां झेलना हमारी आदत है और टैक्स देना हमारी जिम्मेदारी है।
अब जरा इस पर गौर करें
खराब सिग्नल कोई जिम्मेदार नहीं।
सड़क पर गड्ढ़े कोई जिम्मेदार नहीं।
फुटपाथ व सड़कों पर अतिक्रमण कोई जिम्मेदार नहीं।
सड़क पर रोशनी नहीं कोई जिम्मेदार नहीं।
सड़क पर बहता कचरा मिले तो कोई जिम्मेदार नहीं।
खंभों से गायब स्ट्रीट लाइट का कोई जिम्मेदार नहीं।
खुदी सड़कों की मरम्मत का कोई जिम्मेदार नहीं।
गड्ढों में गिर कर आप घायल हो, जिम्मेदार कोई नहीं।
आवारा पशुओं से टकरा जाए या कुत्ता काट ले कोई जिम्मेदार नहीं।
बिना हेलमेट एक हजार का जुर्माना।
नो पार्किंग में पार्किंग करने पर तीन हजार का जुर्माना।
इंशोरेंस नहीं होेने पर एक हजार का जुर्माना।
शराब पीकर वाहन चलाने पर 10 हजार का जुर्माना।
नो एंट्री में वाहन चलाने पर पांच हजार का जुर्माना।
प्रदूषण सर्टिफिकेट नहीं होने पर 1100 रुपये का जुर्माना।
ट्रिपल सीट ड्राइविंग पर दो हजार का जुर्माना।
परिवार के सदस्यों की संख्या के हिसाब से हाउस टैक्स।
सीवर टैक्स, पानी का टैक्स, रोड टैक्स आदि जनता से वसूला जाता है।
डीजीपी और मुख्य सचिव आज करेंगे कांवड़ यात्रा की समीक्षा
मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह व प्रदेश के पुलिस मुखिया राजीव कृष्ण आज चार मंडलों के पुलिस अधिकारियों के साथ कांवड़ यात्रा की समीक्षा करेंगे, जिसकी तैयारी पुलिस अधिकारियों ने कर ली है। 11 जुलाई से शुरू हो रही कांवड़ यात्रा को सकुशल संपन्न कराने के लिए पुलिस अधिकारियों ने पूरी तैयारी कर ली है। दिल्ली-देहरादून हाईवे पर कांवड़ियों को कोई परेशानी न होने इसके लिए पुलिस अधिकारियों ने रूट प्लान भी तैयार कर लिया है। सुरक्षा व्यवस्था में कही चूक न रहे जाए, इसकी समीक्षा मंगलवार को डीजीपी व मुख्य सचिव करेंगे। समीक्षा बैठक मेंं मेरठ, सहारनपुर, मुरादाबाद व अलीगढ़ मंडल के आलाधिकारी शामिल होंगे। समीक्षा बैठक के बाद ही कांवड़ यात्रा की सुरक्षा व्यवस्था को अमली जामा पहनाया जाएगा। इसके बाद ही रूट प्लान लागू किया जाएगा। बताया गया है कि समीक्षा बैठक मेंं आने वाले अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था का ब्लू प्रिंट तैयार कर लिया है।

