Friday, April 17, 2026
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Hariyali Teej: हरियाली तीज पर वर्जित हैं ये काम, जानिए धार्मिक नियम और कारण

नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत और अभिनंदन है। हरियाली तीज का त्योहार विशेष रूप से महिलाओं के लिए अत्यंत श्रद्धा और आस्था का प्रतीक है। यह केवल एक व्रत नहीं, बल्कि मां पार्वती और भगवान शिव के पवित्र मिलन की स्मृति में मनाया जाने वाला एक विशेष दिन है, जो विवाह, प्रेम और समृद्धि का शुभ संदेश देता है। इस दिन विवाहित महिलाएं निर्जल व्रत रखकर अपने पति की दीर्घायु, सुखमय जीवन और पारिवारिक समृद्धि की कामना करती हैं। वहीं कुंवारी कन्याएं अच्छे वर की प्राप्ति हेतु मां पार्वती से प्रार्थना करती हैं। यह पर्व नारी जीवन के सौंदर्य, सोलह श्रृंगार, मेंहदी, लोक गीतों और झूलों के साथ उत्साह और उल्लास से भरा होता है। इस दिन की पवित्रता को बनाए रखने के लिए विशेष धार्मिक नियमों और सावधानियों का पालन आवश्यक माना गया है।

वैदिक पंचांग के अनुसार, सावन शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि की शुरुआत 26 जुलाई 2025 को रात 10 बजकर 41 मिनट पर हो रही है, और यह 27 जुलाई की रात 10 बजकर 41 मिनट तक रहेगी। पंचांग और धार्मिक परंपराओं के अनुसार, व्रत 27 जुलाई को ही रखा जाएगा।

हरियाली तीज के दिन कुछ ऐसी चीजें हैं, जिन्हें भूलकर भी नहीं करना चाहिए, वरना व्रत अधूरा रह सकता है और मां पार्वती की कृपा कम हो सकती है। इसलिए, इस शुभ पर्व पर सही तरीके से व्रत रखने के साथ-साथ उन नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है ताकि आपकी मनोकामनाएं पूरी हों और परिवार में सुख-शांति बनी रहे। ऐसे में आइए जानते हैं हरियाली तीज के दिन किन-किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए और किन चीजों से बचना चाहिए।

अगर आप पहली बार हरियाली तीज का व्रत रख रहे हैं तो सबसे महत्वपूर्ण बात है कि यह व्रत निर्जला और निराहार होता है। यानी इस दिन न तो कोई भोजन करें और न ही पानी पीएं। यह नियम व्रत को पूर्ण और सफल बनाने के लिए बहुत जरूरी है। खाने-पीने से व्रत अधूरा माना जाता है और मां पार्वती की कृपा कम हो सकती है।

हरियाली तीज के दिन अगर आप व्रत का सामान खरीदने जाएं तो ध्यान रखें कि मंगलवार के दिन ऐसा न करें। शास्त्रों में माना गया है कि मंगलवार को इस व्रत का सामान खरीदना अशुभ होता है और इससे व्रत के शुभ प्रभावों में बाधा आ सकती है। इसलिए खरीदारी के लिए अन्य दिन चुनना ही बेहतर रहेगा।

इस दिन अशुद्ध वस्तुओं से पूरी तरह बचना चाहिए। चमड़े से बनी चीजें, अंडा, शराब, मांस-मछली आदि को न तो छूना चाहिए और न ही इनके आस-पास रहना चाहिए। ऐसा करने से व्रत की पवित्रता भंग हो जाती है और व्रत का फल नहीं मिलता।

पूजा सामग्री के संदर्भ में खास बात यह है कि सुहागिन महिलाएं अपने मायके से मिली सामग्री का ही उपयोग करें। ऐसा करने से उनके दांपत्य जीवन में खुशहाली आती है और अखंड सौभाग्य का वरदान मिलता है। घर में उपलब्ध सामग्री से पूजा करना व्रत के प्रभाव को बढ़ाता है।

इस दिन काले रंग की चूड़ियां पहनना मना है क्योंकि काला रंग इस अवसर पर अशुभ माना जाता है। हरे रंग की चूड़ियां पहनें, जो हरियाली, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक हैं। इससे आपके जीवन में खुशहाली बनी रहती है।

घर में इस दिन कोई भी वाद-विवाद न करें। किसी भी सुहागिन महिला का अपमान करना या उनके साथ अनुचित व्यवहार करना व्रत के प्रभाव को कम कर देता है। मां पार्वती को शांति और प्रेम पसंद है, इसलिए इस दिन क्रोध और गुस्से से दूर रहना चाहिए।

व्रत का पारण केवल शुभ मुहूर्त में करें। पारण समय से पहले करने पर व्रत अधूरा माना जाता है और उसका फल नहीं मिलता। इसलिए पारण का समय देखकर ही व्रत खोलें ।

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