Tuesday, March 10, 2026
- Advertisement -

Supreme Court के आदेश पर Rahul Gandhi की प्रतिक्रिया, “आवारा कुत्तों का ब्लैंकेट रीमूवल क्रूर और अदूरदर्शी”

जनवाणी ब्यूरो |

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिल्ली और एनसीआर से सभी आवारा कुत्तों को हटाने के निर्देश पर देश की राजनीति में हलचल मच गई है। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस आदेश की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने इसे दशकों से चली आ रही मानवीय और वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर आधारित नीति से “एक कदम पीछे हटना” बताया है।

राहुल गांधी ने ‘एक्स’ पर क्या लिखा?

राहुल गांधी ने ‘एक्स’ पर लिखा, “दिल्ली-एनसीआर से सभी आवारा कुत्तों को हटाने का सुप्रीम कोर्ट का निर्देश दशकों से चली आ रही मानवीय और विज्ञान-समर्थित नीति से एक कदम पीछे हटने जैसा है। ये बेजुबान जीव कोई समस्या नहीं हैं, जिन्हें मिटाया जा सके। आश्रय, नसबंदी, टीकाकरण और सामुदायिक देखभाल सड़कों को बिना किसी क्रूरता के सुरक्षित रख सकते हैं। ब्लैंकेट रीमूवल क्रूर, अदूरदर्शी है। यह हमारी करुणा को खत्म करता है। हम यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि जन सुरक्षा और पशु कल्याण साथ-साथ चलें।”

सुप्रीम कोर्ट का आदेश?

राहुल गांधी की यह टिप्पणी उस आदेश के एक दिन बाद आई है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली और एनसीआर के अधिकारियों को सभी आवारा कुत्तों को स्थायी रूप से सड़कों से हटाकर आश्रयों में भेजने का निर्देश दिया था। अदालत ने यह फैसला आवारा कुत्तों के काटने से फैल रहे रेबीज और उसके कारण बढ़ती जन स्वास्थ्य समस्या को देखते हुए दिया।

शीर्ष अदालत ने कहा कि स्थिति विशेष रूप से छोटे बच्चों के लिए अत्यंत गंभीर है और इसका तत्काल समाधान आवश्यक है। कोर्ट ने यह भी कहा कि नगर निकायों को 6 से 8 सप्ताह के भीतर करीब 5,000 कुत्तों के लिए आश्रय स्थलों का निर्माण करना होगा।

पशु प्रेमियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं में चिंता

सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद कई पशु अधिकार संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी चिंता जाहिर की है। उनका कहना है कि कुत्तों को “पूरी तरह हटाने” से न केवल क्रूरता को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि इससे सड़कों पर संतुलन भी बिगड़ सकता है।

समाधान की जरूरत, न कि सख्त कार्रवाई

राहुल गांधी और अन्य पशु अधिकार समर्थकों का मानना है कि आवारा कुत्तों की समस्या का समाधान नसबंदी, टीकाकरण और समुदाय-आधारित देखभाल के जरिए किया जा सकता है। “वन हेल्थ” और “सस्टेनेबल डेवलपमेंट” के लक्ष्यों की दिशा में भी यह अधिक व्यावहारिक और मानवीय रास्ता है।

spot_imgspot_img

Subscribe

Related articles

कनाडा में भारतीयों के पढ़ाई के अवसर

अगर आप भी विदेश जाकर पढ़ाई करने का सपना...

तेजी से बढ़ती डिजिटल मार्केटिंग इंडस्ट्री

आज के समय में करियर बनाने के लिए डिजिटल...

वाट्सऐप ग्रुप के सुप्रभात वीर

आज के डिजिटल युग में 'आतंकवाद' केवल सीमाओं पर...

बालेंद्र शाह भाारत से कैसे रखेंगे संबंध

हिमालय की उपत्यका में बसा देश नेपाल के आम...

संभावित ऊर्जा संकट और भारत

इस्राइल और अमेरिका द्वारा संयुक्त तौर पर 28 फरवरी...
spot_imgspot_img