जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: पुलिस लाइन में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के जर्जर मकान की छत का लिंटर गिरने और परिवार के आठ लोगों के घायल होने के बाद पुलिस विभाग की तंद्रा टूट गई है। एडीजी मेरठ भानु भास्कर के आदेश पर एसएसपी डा. विपिन ताड़ा ने जर्जर आवासों को चिह्नित करने के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है। इसके अलावा पीडब्ल्यूडी के इंजीनियर भी जर्जर भवनों का निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट देंगे। रिपोर्ट के आधार पर परिवारों को शिफ्ट किया जाएगा।
रविवार की रात में पुलिस लाइन के पी पॉकेट स्थित चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ओमकार सिंह के जर्जर सरकारी आवास की लिंटर की छत गिर गई थी। इससे परिवार के आठ सदस्य घायल हो गए थे। एडीजी मेरठ जोन भानु भास्कर, डीआईजी रेंज कलानिधि नैथानी और एसएसपी डॉ. विपिन ताड़ा ने घटनास्थल का निरीक्षण किया था। एडीजी भानु भास्कर ने हादसे को गंभीरता से लेते हुए मामले में एसएसपी को जांच के आदेश दिए थे। सोमवार को एडीजी भानु भास्कर के आदेश पर एसएसपी डॉ. विपिन ताड़ा ने तीन सदस्यीय समिति का गठन करते हुए हादसे की जांच के आदेश दिए हैं। जांच समिति एसपी ट्रैफिक/एसपी लाइन राघवेंद्र मिश्र, सीओ कोतवाली/ सीओ लाइन अंतरिक्ष जैन तथा प्रतिसार निरीक्षक हरपाल सिंह को शामिल किया गया है।
इसके अलावा एसएसपी ने पीडब्ल्यूडी के इंजीनियरों की एक तकनीकी जांच समिति का गठन किया है। तकनीकी समिति जर्जर भवनों की वर्तमान दशा का अवलोकन करते हुए भवन के परिवार के रहने योग्य, मरम्मत योग्य या निस्प्रयोज्य के आधार पर अपनी रिपोर्ट देगी। तकनीकी समिति की जांच रिपोर्ट के आधार पर ही परिवारों को शिफ्ट किया जाएगा। एसपी ट्रैफिक राघवेंद्र कुमार मिश्र ने बताया कि जांच कमेटी ने पुलिस लाइन स्थित जर्जर भवनों का मौका-मुआयना करते हुए उनको चिह्नित करने का कार्य प्रारंभ कर दिया है। एसपी ट्रैफिक ने बताया कि जल्द ही एसएसपी को रिपोर्ट प्रेषित कर दी जाएगी।
पुलिस लाइन हादसा: जिम्मेदारों की लापरवाही या चतुर्थ कर्मचारियों से भेदभाव
रविवार की रात पुलिस लाइन गेट नंबर-5 पर बड़ा हादसा टल गया, लेकिन सवालों का पहाड़ खड़ा कर गया। पुलिस विभाग के टेलर ओमकार के सरकारी क्वार्टर की छत अचानक भरभराकर गिर गई। मलबे में दबकर परिवार के आठ लोग घायल हो गए। गनीमत ये रही कि जानें बच गर्इं, वरना हादसा बेहद भयावह हो सकता था। इस घटना के बाद पुलिस लाइन में रह रहे पुलिसकर्मियों के परिवारों में दहशत है। जिस क्वार्टर की छत गिरी, उसके आसपास के क्वार्टर खाली करवा दिए हैं।
छत गिरने की जगह पर ही विभाग ने पुलिस कर्मचारियों की ड्यूटी लगा दी है, ताकि रुक-रुककर हो रही बारिश में अगर फिर कोई हादसा हो तो तुरंत उच्चाधिकारियों तक खबर पहुंचाई जा सके। सवाल यह है कि क्या प्रशासन सिर्फ हादसों की सूचना लेने के लिए बैठा है? जिम्मेदार पहले से क्यों नहीं जागे? पुलिस लाइन में 150 से ज्यादा सरकारी क्वार्टर और बिल्डिंग जर्जर हालत में हैं, जिनमें पुलिस कर्मियों के परिवार रहते हैं। कहीं छतें टपकती हैं, तो कहीं दीवारें दरक चुकी हैं। इनकी हालत देखकर साफ झलकता है कि वर्षों से न तो मरम्मत हुई और न ही जिम्मेदारों ने ध्यान दिया। मजबूरी में कई कर्मचारियों ने अपनी जेब से मरम्मत कराई, लेकिन हालात जस के तस हैं।
क्यों भुला दिए पुलिस लाइन के निचले कर्मचारी?
परिवारों का आरोप है कि पुलिस लाइन में अफसरों के लिए तो नई बिल्डिंग बनवा दी गईं, लेकिन चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के क्वार्टर आज भी जर्जर बने खड़े हैं। बरसात में छतें टपकती हैं, पानी गलियारों और सड़कों पर भर जाता है। पार्क और सड़कें भी बदहाली की कहानी कह रही हैं। सवाल उठना लाजिमी है कि क्या सिर्फ इसलिए इन्हें अनदेखा किया जा रहा है, क्योंकि यहां निचले स्तर के कर्मचारी रहते हैं?
रिपोर्ट दबी फाइलों में परिवार दबा मलबे में
यदि पुलिस प्रशासन समय रहते सचेत हो जाता तो यह हादसा टल सकता था। पुलिस विभाग के टेलर ओमकार का सरकारी क्वार्टर काफी समय से जर्जर हालत में था। ओमकार ने कई बार अधिकारियों से मरम्मत और नए क्वार्टर की मांग की, यहां तक कि 15 दिन पहले पुलिस लाइन के आरआई से भी शिकायत की थी, लेकिन अधिकारियों ने इसे नजरअंदाज कर दिया। लगातार बारिश के बीच रविवार को ओमकार के क्वार्टर की छत अचानक भरभरा कर गिर गई। हादसे में परिवार के आठ सदस्य मलबे में दबकर घायल हो गए। चर्चा है कि जर्जर भवनों की रिपोर्ट तैयार करने और टीम को सौंपने का काम ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था। पुलिस प्रशासन की इसी लापरवाही ने बड़ा हादसा खड़ा कर दिया। अब सवाल उठ रहा है कि आखिर कब तक पुलिस कर्मियों और उनके परिवारों की सुरक्षा को
ऐसे खतरे में डाला जाता रहेगा।
हादसे के बाद एसएसपी ने किया क्वार्टरों का निरीक्षण
पुलिस लाइन गेट नंबर-5 के पी पॉकेट में हुए हादसे के बाद सोमवार की शाम एसएसपी डॉ. विपिन ताड़ा एसपी ट्रैफिक राघवेंद्र कुमार मिश्रा समेत अन्य अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचे। एसएसपी ने सबसे पहले घटनास्थल का मुआयना किया और फिर पुलिस लाइन में बने सभी क्वार्टरों का निरीक्षण कर वहां की व्यवस्था देखी। इस दौरान उन्होंने क्वार्टरों में रह रहे पुलिस परिवारों से बातचीत की और उनकी समस्याएं भी सुनीं। करीब रात 10:30 बजे तक एसएसपी क्वार्टरों का निरीक्षण करते रहे। उन्होंने पुलिस लाइन आरआई हरपाल सिंह को निर्देश दिए कि सभी क्वार्टरों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर तुरंत उपलब्ध कराई जाए, ताकि आगे की कार्रवाई तय की जा सके। हादसे से डरे परिवारों को आश्वस्त करते हुए एसएसपी ने कहा कि सुरक्षा से समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और जल्द ही आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
आखिकार बजट कहां जाता है?
परिवारों का कहना है कि हर साल क्वार्टरों की मरम्मत के नाम पर बजट आता है, लेकिन कहां जाता है इसका किसी को जवाब नहीं मिलता। विभागीय अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं। अगर समय-समय पर मरम्मत होती तो रविवार की रात यह हादसा शायद टल जाता। पुलिस लाइन में रहने वाले कर्मचारियों ने कई बार अधिकारियों को लिखित और मौखिक शिकायतें दीं, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिला। नतीजा, आठ लोग घायल होने के बाद भी जिम्मेदार अपनी कुर्सी पर चैन से बैठे हैं।
जांच के बाद भी नहीं टूटी तंद्रा
पुलिस लाइन में जर्जर आवास के लिंटर की छत गिरने के बाद पुलिस के आला अफसरों की तंद्रा टूट गई है। अगर जून माह में ही समय रहते उचित निर्णय ले लिया गया होता तो फिर रविवार को हुआ हादसा न होता। बताया जा रहा है कि जून माह में जर्जर आवासों का निरीक्षण किया गया था। निरीक्षण के बाद जर्जर आवासों में रह रहे परिवारों को उम्मीद थी कि उनको दूसरा बेहतर स्थिति का आवास मिल जाएगा, लेकिन जून माह की जांच रिपोर्ट किनारे कर दिया गया। साथ ही, जर्जर आवासों में रह रहे परिवारों को उनके हाल पर ही छोड़ दिया गया

