Wednesday, January 28, 2026
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गाय पर निबंध भैंस का अपमान!

जब हमसे कोई रूठ जाता है तो हम किसी न किसी तरह से यानी येन-केन-प्रकारेण मना ही लेते हैं। वह भी ज्यादा समय तक हम से रूठा हुआ नही रह सकता है, पंरतु गिरधारीलाल भैंस वाले के साथ कुछ अलग ही हुआ। पूरे गांव क्या दूर-दूर तक भैंस वाले के नाम से प्रसिद्ध गिरधारीलाल की भैंस न कुछ खाने को तैयार न दुध देने को तैयार। उसे ऐसा प्रतीत हो रहा था, मानो वह नेताओं की तरह धरने पर बैठ गई हो। अपनी रूठी हुई भैंस को मनाने में गिरधारीलाल विपक्ष की तरह हार गया। उसने साम दाम दंड भेद हर तरह से प्रयास किया, पर वह टस से मस नहीं हुई। थक हार कर गिरधारीलाल ने अपने आंसुओं को पोंछते हुए बताया कि इतना मनाने के बाद तो उसकी रूठी हुई घरवाली भी मान जाती है, परंतु यह भैंस न कुछ खाने को तैयार है न कुछ बताने को। धरने पर बैठने वालो के धरने पर बैठने की वजह तो हमें पता रहती है, परंतु गिरधारीलाल अपनी भैंस के धरने से पूरी तरह से अंजान था। भैंस के इस तरह से धरने पर बैठने से मैं भी अचंभित था।

मैंने उसे पंचायत के पास जाने की सलाह दी। गिरधारीलाल बुलेट ट्रेन की रफ्तार से पंचायत के पास पहुंचा। गिरधारीलाल ने पंचों के समाने सारी बात रखी। पंचायत ने गिरधारीलाल के मन की बात को और उसकी परेशानी को गंभीरतापूर्वक समझते हुए, तत्काल वहां जाने का निर्णय लिया, जहां भैंस धरने पर बैठी थी। भैंस से पूरी पंचायत ने उसके रूठने का कारण जानना चाहा। बहुत पचाने के बाद भैंस अपने रूठने की वजह बताने को मानी। उसने कहा एक नहीं, अनेक वजह हैं। सुनो- जब किसी को कोई बात समझ में नही आती है, तो यह क्यों कहा जाता है, इसके लिए ‘काला अक्षर भैंस बराबर’ है। किसी से कोई गलती हो जाती है या कोई नुकसान हो जाता है तो यह क्यों कहा जाता है, ‘गई भैंस पानी में’।

कोई आपकी बात नहीं मानता है तो यह कहा जाता, ‘भैंस के आगे बीन बजाने से कोई फायदा नहीं’। स्कूलों में निबंध भी गाय पर ही लिखने को कहा जाता है, भैंस पर क्यों नहीं? गाय को माता मानते हो और भैंस को कुछ नहीं। मोटी महिलाओं को भैंस कहा जाता है। महिला एक ही जगह बहुत देर तक पसर कर बैठ जाएं तो कहा जाता है, देखो भैंस जैसी बैठी है। हम भैंसों का इस कदर रोज अपमान किया जाता है। आखिर कब तक हम अपना अपमान सहन करते रहेंगे। हमने अभी तक न कोई धरना-प्रदर्शन किया, न चक्काजाम किया, न आंदोलन किया। अब जब पानी सर से ऊपर निकल गया है तो मजबूरन यह रुख अख्तियार करना पड़ा। कहते भी हैं, जब सीधी उंगली से घी नहीं निकले तो उंगली को जरा टेढ़ा करना पड़ता है। भैंस मोर्चा का अध्यक्ष होने के नाते में धरने पर बैठी हूं। अभी तो मैं अकेले ही धरने पर बैठी हूं, आगे दिल्ली में जंतर-मंतर पर पूरे भारत की सभी भैंसें मिलकर विराट धरना-प्रदर्शन करेंगी।

भैंस के मन की बात, पीड़ा सुनकर पूरी पंचायत की आंखों में आंसू आ गए। सभी ने उसे इस बारे में उचित कार्रवाई करने व सरकार तक इस मुद्दे को पहुंचाने आश्वासन दिया।

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