क्या आपने कभी सोचा है कि बच्चे खेल-खेल में पढ़ाई करना भी सीख सकते हैं। दरअसल ऐसे विचार बहुत कम लोगों के मन आते होंगे कि बच्चे खेल-खेल में भी पढ़ाई नहीं कर सकते लेकिन अगर ऐसा हुआ तो क्या आप जानते हैं उन्हें परीक्षा के समय तनाव का सामना भी नहीं करना पड़ेगा?
आप ऐसे बहुत सारे तरीके अपना सकते हैं और अपने बच्चों के साथ उपयोग में भी ला सकते हैं इसके कारण आपके बच्चे खेल खेल में ही पढ़ाई में भी आनंदित महसूस करेंगे और उन्हें कभी यह एहसास भी नहीं हो पाएगा कि आपके बच्चे किस प्रकार खेलते खेलते पढ़ाई को अपने जीवन का अहम हिस्सा बना चुके हैं या बना रहे हैं। यदि आपके बच्चे भी पढ़ाई में मन नहीं लगाते तो आप इन पांच उपायों को अपनाकर अपने बच्चों को खेल-खेल में पढ़ाई करने के लिए मजबूर कर देंगे तो आइए जानते हैं आखिर ये 5 तरीके कौन से हैं।
बच्चों की आदत बना देना
यदि आप अपने बच्चों की पढ़ाई करने के लिए रोजाना कुछ आदतें बनाते हैं तो उनकी आदते उनके लिए पढ़ाई को काफी आसान बना सकती हैं। क्योंकि आदत होती है ऐसी चीज है जिनकी लोगों को लत लग जाती है। कई बार आदतों की वजह से ही इंसान किसी अन्य जरूरी कार्य पर भी ध्यान नहीं देता वह उसी काम को पूरा करता है जिसकी उसे आदत हो। इसलिए पढ़ाई की यह आदत बचपन से ही माता-पिता लगाएं तो बच्चे के लिए उसे अपनाना बेहद आसान हो जाएगा। हालांकि आप रोजाना तीन 4 घंटे पढ़ाई के लिए कहने की बजाय महज आधे घंटे से इसकी शुरूआत कर सकते हैं।
रोमांचक तरीके से पढ़ाना
रोमांच तरीके से पढ़ाने का मतलब यह है कि हमें अपने बच्चों को पढ़ाते वक्त कभी भी डराना नहीं चाहिए भले ही वह पढ़ने में कितनी ही गलती क्यों ना कर दे, हमें फिर भी हंसते-हंसते अपने बच्चों को उस सही चीज को सिखाने की प्रत्येक कोशिश करनी चाहिए। ताकि उनके मन में थोड़ा भी भय ना रहें और वे बड़ी ही आसानी से अपने जीवन में उन चीजों को सीख पाए जिनकी जरूरत उन्हें अपने जीवन में पढ़ाई को आसान करने के लिए हो सके। जब भी बच्चे रोमांच तरीके से किसी चीज को देखते हैं या उसका उपयोग करते हैं तो अवश्य ही उस चीज को अपनी गहराइयों से समझ पाते हैं और उनका उपयोग अपने जीवन में आसानी से कर सकते हैं।
पढ़ाई के बाद बच्चों को उनकी पसंद की चीज दिलाना
यदि हम अपने बच्चों को इस बात के लिए उतावला करें कि हम उन्हें पढ़ने के पश्चात उनकी पसंद की चीज दिलाएंगे या फिर कुछ खिलाएंगे तो बच्चे खुद ही इस कदर अपनी पढ़ाई करने लगते हैं जैसे कि वे कभी करने के लिए उतावले होते ही नहीं। इसीलिए हमें अपने बच्चों को इस बात का लालच दिलाना चाहिए कि हम उन्हें उनकी पढ़ाई पूरी होने के पश्चात या कुछ नया सीखने के बाद उनकी पसंद की चीज उनके लिए लाएंगे। इस प्रकार हमारे बच्चे हमेशा पढ़ाई को खेल-खेल में पढ़ाई करते है और उन्हें हमेशा पढ़ाई करते वक्त या उससे पहले इस बात का ध्यान आता है कि उन्हें पढ़ाई मन लगा कर करनी है तभी वे लोग अपनी पसंद की चीज को प्राप्त कर पाएंगे।
बच्चों के लिए अच्छे लक्ष्य बनाना
यदि हम अपने बच्चों को कुछ अच्छे लक्ष्यों के बारे में सोचने के लिए मजबूर करते हैं तो वे लोग जरूरी अपनी पढ़ाई के लिए इतने रोमांचित हो जाते हैं कि उन्हें पढ़ाई कभी बोझ लगती ही नहीं। जैसे हमें अपने बच्चों को अच्छे लक्ष्यों के साथ अच्छे मोटिवेशनल कहानियां सुनानी चाहिए कि सफल व्यक्तियों ने अपने जीवन में सारी सफलताएं प्राप्त की उन्हें कभी भी किसी बात का दुख नहीं हुआ और उन्होंने अपने सारे शौक पूरे किए। तो इस प्रकार हमारे बच्चे अपने शौको को पूरे करने के लिए भी मन लगाकर पढ़ाई करते हैं और उस पढ़ाई को वह हमेशा खेल-खेल में ही करते-करते अपने लक्ष्य तक पहुंच जाते हैं। वहीं अगर बच्चे काफी छोटे हैं तो आप उन्हें कह सकते हैं कि यदि आप अच्छे से पढ़ाई करेंगे और अच्छे मार्क्स आएंगे तो आपको एक नई साइकिल या कोई गिफ्ट मिलेगा। जिससे बच्चे उस वस्तु को अपना लक्ष्य समझ कर भी पढ़ाई करना शुरू कर देंगे।
पढ़ाई करते वक्त बच्चों को उदाहरण देना
यदि हम अपने बच्चों को पढ़ाई करते वक्त बीच में कुछ रेस्ट के साथ नए-नए उदाहरण देते रहे हैं तो उन लोगों को अपनी पढ़ाई में बहुत ही रोमांच व आनंद आने लगता है। क्योंकि अक्सर किताबों में लिखी गई कई चीजें बच्चों को सीधा समझ में नहीं आती लेकिन अगर उसी चीज को उदाहरण के साथ सहज भाषा में समझाया जाए तो बच्चों के लिए चीजें समझना आसान हो जाता है और वह बात दिमाग में लंबे समय तक बैठ जाती है। इस प्रकार उन्हें अपनी पढ़ाई कतई भी बोझ नहीं लगती, वे लोग खेल-खेल में ही पढ़ने के लिए तैयार रहते हैं इसीलिए हमें अपने बच्चों को पढ़ाई करते वक्त कुछ अच्छे उदाहरण भी देने जरूरी है ताकि वे मन लगाकर अपनी पढ़ाई कर सकें।

