Monday, April 20, 2026
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Nithari Case: निठारी कांड के दोषी सुरेंद्र कोली को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, 18 साल बाद जेल से रिहाई का रास्ता साफ

जनवाणी ब्यूरो |

नई दिल्ली: देश को झकझोर देने वाले निठारी हत्याकांड के दोषी सुरेंद्र कोली को मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सर्वोच्च न्यायालय ने कोली की क्यूरेटिव याचिका स्वीकार करते हुए उसकी सजा रद्द कर दी। कोर्ट ने कहा कि अगर वह किसी अन्य मामले में वांछित नहीं हैं, तो उन्हें तुरंत रिहा किया जाए।

यह आदेश मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई, न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की पीठ ने दिया। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष कोली के खिलाफ ठोस और विश्वसनीय सबूत पेश करने में नाकाम रहा, और जांच के दौरान कई गंभीर प्रक्रियागत त्रुटियां हुईं।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा — “परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर मौत की सजा नहीं दी जा सकती”

पीठ ने अपने आदेश में कहा, “किसी व्यक्ति को केवल परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर उम्रकैद या मृत्युदंड नहीं दिया जा सकता, जब तक कि अपराध बिना किसी संदेह के साबित न हो। न्याय का उद्देश्य सजा देना नहीं, बल्कि सत्य की खोज करना है।” अदालत ने माना कि निचली अदालत और अभियोजन पक्ष से न्यायिक त्रुटि हुई थी, जिसके चलते अब कोली को राहत दी जा रही है।

कौन है सुरेंद्र कोली?

सुरेंद्र कोली, 2006 के निठारी हत्याकांड का मुख्य आरोपी था। वह उस वक्त मोनिंदर सिंह पंधेर का घरेलू नौकर था। नोएडा के निठारी गांव में बच्चों के रहस्यमय तरीके से गायब होने और बाद में उनके अवशेष मिलने से देशभर में सनसनी फैल गई थी। जांच में सामने आया कि कोली ने बच्चों के साथ क्रूरतापूर्ण अपराध किए थे। उसे कई मामलों में मृत्युदंड (फांसी) की सजा सुनाई गई थी, जिसे बाद में उम्रकैद में बदल दिया गया।

18 साल बाद मिली राहत

कोली पिछले 18 वर्षों से जेल में बंद था। उसने सभी फैसलों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव याचिका दायर की थी। अब शीर्ष अदालत ने उसे बरी करते हुए कहा कि जांच एजेंसियों द्वारा प्रस्तुत सबूत अपर्याप्त थे, और न्याय प्रक्रिया में गंभीर खामियां थीं।

क्या था निठारी कांड?

निठारी गांव (नोएडा, उत्तर प्रदेश) में 2004 से बच्चे लापता हो रहे थे। परिजन लगातार पुलिस से गुहार लगाते रहे, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। 2006 में पायल नाम की युवती के लापता होने के बाद उसके पिता नंदलाल ने डी-5, सेक्टर 31 की कोठी में रहने वाले कारोबारी मोनिंदर सिंह पंधेर और उसके नौकर सुरेंद्र कोली पर शक जताया।

पहले पुलिस ने शिकायत को नजरअंदाज किया, लेकिन हाईकोर्ट के आदेश पर जांच शुरू हुई।
कोठी से मानव अस्थियां, कपड़े और बच्चों के अवशेष बरामद हुए, जिससे पूरे देश में आक्रोश फैल गया।

कोली और पंधेर की गिरफ्तारी

मामले की जांच के बाद सीबीआई ने मोनिंदर सिंह पंधेर और सुरेंद्र कोली को गिरफ्तार किया। दोनों के खिलाफ 16 से ज्यादा मामलों में मुकदमे चले। कई मामलों में पंधेर को बरी किया गया, जबकि कोली को दोषी ठहराकर मौत की सजा सुनाई गई थी।

पीड़ित परिवारों में नाराजगी

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद पीड़ित परिवारों में नाराजगी देखने को मिल रही है। कई परिवारों ने कहा कि उन्हें 18 साल बाद भी न्याय नहीं मिला। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला सबूतों की विश्वसनीयता और जांच एजेंसियों की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।

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