Friday, February 6, 2026
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indira marathon 2025: प्रदीप चौहान ने जीता पुरुष खिताब, रेनू संधू ने किया महिला वर्ग पर कब्जा

नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत और अभिनंदन है। प्रयागराज की पवित्र धरती पर बुधवार को आयोजित 40वीं इंदिरा मैराथन में अद्भुत जोश और उमंग देखने को मिली। देशभर से आए धावकों ने शानदार प्रदर्शन किया। महिला वर्ग में हरियाणा की बेहतरीन धाविका और CISF में एसआई रेनू ने लगातार दूसरी बार खिताब जीतकर इतिहास रच दिया। वहीं पुरुष वर्ग में भारतीय सेना के जांबाज धावक प्रदीप सिंह चौहान ने फौलादी फिटनेस का प्रदर्शन करते हुए शानदार समय के साथ स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

महिला वर्ग: रेनू की दूसरी जीत

महिला फुल मैराथन (42.195 किमी) में रेनू ने बेहतरीन फॉर्म दिखाते हुए 2 घंटे 53 मिनट 02 सेकंड का समय निकालकर स्वर्ण पदक जीत लिया। यह उनकी दूसरी जीत है वे वर्ष 2023 में भी इंदिरा मैराथन की चैंपियन रही थीं।

रजत पदक: महाराष्ट्र की अश्विनी मदन जाधव, जिन्होंने मात्र 30 सेकंड के अंतर से 2:53:32 का समय लिया।

कांस्य पदक: छह बार की चैंपियन महाराष्ट्र की ज्योति शंकर राव गावते (समय 3:04:48) को मिला। हालांकि यह उनका अब तक का सबसे धीमा समय रहा, पर अनुभव ने उन्हें पोडियम पर बनाए रखा।

पुरुष वर्ग: प्रदीप चौहान की बेहतरीन दौड़

पुरुष वर्ग में उत्तराखंड गढ़वाल के भारतीय सेना के जवान प्रदीप सिंह चौहान ने अद्भुत प्रदर्शन करते हुए 2 घंटे 19 मिनट 58 सेकंड में मैराथन पूरी की। उनकी जीत ने एक बार फिर साबित किया कि मैराथन में सेना के धावकों का परचम हमेशा ऊँचा रहता है।

रजत पदक: प्रतापगढ़ के कुंडा निवासी ग्रामीण धावक ज्ञान बाबू, जिन्होंने 2:20:35 में दौड़ पूरी की। वे प्रदीप से केवल 37 सेकंड पीछे रहे।

कांस्य पदक: प्रयागराज के स्थानीय धावक रोहित सरोज, जिन्होंने 2:22:43 में फिनिश लाइन पार की। रोहित की पोडियम पर वापसी ने स्थानीय दर्शकों को बेहद खुश किया।

विजेताओं का शानदार स्वागत

मदन मोहन मालवीय स्टेडियम के फिनिश प्वॉइंट पर विजेताओं का शानदार स्वागत किया गया। ढोल-नगाड़ों की गूंज, फूलों की वर्षा और ‘वंदे मातरम्’, ‘भारत माता की जय’ जैसे नारों ने माहौल को देशभक्ति से भर दिया। इस बार मैराथन में कुल 509 धावकों ने हिस्सा लिया, जिनमें देशभर के प्रोफेशनल और युवा खिलाड़ी शामिल थे। आयोजन की सफलता ने एक बार फिर यह साबित किया कि इंदिरा मैराथन सिर्फ खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि भारत की फिटनेस संस्कृति और अटूट जोश का प्रतीक है।

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