Sunday, March 15, 2026
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Congress: ‘ऑपरेशन सिंदूर पर कायम हूं, माफी नहीं मांगूंगा’, शशि थरूर का बयान

जनवाणी ब्यूरो |

नई दिल्ली: कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने शनिवार को साफ किया कि उन्होंने कभी भी संसद में अपनी पार्टी के रुख का उल्लंघन नहीं किया। केरल लिटरेचर फेस्टिवल में एक सत्र के दौरान सवालों का जवाब देते हुए थरूर ने जोर दिया कि उनकी एकमात्र सार्वजनिक असहमति ऑपरेशन सिंदूर को लेकर थी, जिस पर वह अब भी बिना किसी पछतावे के अपने रुख पर कायम हैं।

कांग्रेस नेतृत्व से मतभेद? थरूर ने की सफाई

थरूर का यह बयान तब आया है जब उनके और पार्टी नेतृत्व के बीच मतभेदों को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं। खासकर, कोच्चि में एक हालिया कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा उन्हें पर्याप्त महत्व न दिए जाने और राज्य के नेताओं की ओर से उन्हें किनारे लगाए जाने की कोशिशों की बात की जा रही है। इस पर थरूर ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि उनका किसी के साथ मतभेद नहीं है और वह पार्टी के रुख का पालन करते हैं।

पहलवागाम आतंकवादी हमले पर थरूर की प्रतिक्रिया

थरूर ने पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद अपने रुख को स्पष्ट करते हुए कहा कि एक लेखक और पर्यवेक्षक के रूप में उन्होंने इस मामले पर एक लेख लिखा था, जिसमें उन्होंने कहा था कि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि इस हमले के खिलाफ कोई भी कदम बिना सजा के नहीं उठाया जाना चाहिए।

पाकिस्तान पर सैन्य कार्रवाई पर शशि थरूर का विचार

पाकिस्तान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई पर शशि थरूर ने कहा कि भारत का मुख्य ध्यान विकास पर होना चाहिए और उसे पाकिस्तान के साथ लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष में नहीं फंसना चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अगर कार्रवाई की जाए तो वह केवल आतंकवादी ठिकानों तक ही सीमित रहनी चाहिए। थरूर ने यह भी बताया कि उन्हें हैरानी हुई कि भारत सरकार ने वही कदम उठाए जो उन्होंने पहले सुझाए थे।

भारत की प्रतिष्ठा पर जोर, ‘अगर भारत मर गया, तो कौन जिएगा?’

शशि थरूर ने भारत की सुरक्षा और प्रतिष्ठा पर जोर देते हुए कहा कि जवाहरलाल नेहरू द्वारा पूछा गया यह सवाल कि “अगर भारत मर गया, तो कौन जिएगा?” आज भी बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि जब राष्ट्रीय हितों की बात हो, तो भारत को सर्वोपरि रखना चाहिए। थरूर ने यह भी कहा कि बेहतर भारत के निर्माण के लिए राजनीतिक दलों के बीच मतभेद हो सकते हैं, लेकिन राष्ट्रीय हितों के सवाल पर सभी को एकजुट होना चाहिए।

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