जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में तनाव की लपटें तेजी से फैल रही हैं। अमेरिका द्वारा जारी 48 घंटे के अल्टीमेटम पर ईरान ने कटाक्ष किया है। तेहरान के सैन्य मीडिया के ट्विटर हैंडल से पोस्ट किया गया कि, “हमें लगा था कि आप हमारे लोगों की आज़ादी के लिए लड़ने आए हैं, लेकिन अब आप होर्मुज जलडमरूमध्य को ‘आज़ाद’ कराने की कोशिश में लगे हैं।”
दरअसल, अमेरिका ने चेतावनी दी थी कि यदि 48 घंटे के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य नहीं खोला गया, तो ईरान के पावर प्लांट पर हमला किया जाएगा। इसके जवाब में ईरान ने कहा कि अगर उनके पावर प्लांट पर हमला हुआ, तो पूरे खाड़ी क्षेत्र में अंधेरा छा जाएगा।
डिएगो गार्सिया पर मिसाइल हमला
पिछले 22 दिनों से खाड़ी में लगातार लड़ाई जारी है। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह पीछे नहीं हटेगा। ईरानी सेना ने हिंद महासागर में स्थित अमेरिका के दूरस्थ सैन्य ठिकाने डिएगो गार्सिया को निशाना बनाकर दो बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। पहले ईरान 2,000–3,000 किलोमीटर तक मार करने वाली मिसाइलें इस्तेमाल कर रहा था, लेकिन अब 4,000 किलोमीटर तक मार करने वाली मिसाइलों की भी क्षमता जोड़ दी गई है।
‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ और ईरान का जवाब
अमेरिका ने इसे ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ का नाम दिया है, जिसमें उसने ईरान के संचार नेटवर्क और मिसाइल लॉन्च पैड्स को नष्ट करने का दावा किया। अमेरिकी दावा है कि ईरान की वायुसेना और नौसेना लगभग खत्म हो चुकी हैं। लेकिन वास्तविकता कुछ और है। ईरान ने इजरायल के डिमोना और अराद शहरों पर मिसाइलें दागकर अपनी मारक क्षमता बरकरार होने का प्रदर्शन किया।
ईरान और अमेरिका की इस जंग में कूटनीति अब पूरी तरह विफल दिख रही है। जबकि ट्रंप इसे छोटा सैन्य अभियान बता रहे हैं, जमीन पर मौतों की संख्या 1,500 के पार जा चुकी है। इस संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में संकट और तेल की कीमतों में उथल-पुथल मची हुई है।

