Tuesday, April 28, 2026
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ट्रंप के बोल कर रहे दुनिया को परेशान

डोनाल्ड ट्रंप जब से दूसरी बार राष्ट्रपति बने तभी से दुनिया के प्रति उनकी भौहें टेढ़ी बनी हुई हैं। और इतना ही नहीं वह समय-समय पर अपनी झुंझलाहट कड़वाहट से भी परिचित कराते रहते हैं। वह कभी किस देश को तो कभी किस देश को अपनी सनक से बनी नीति से प्रभावित करते रहते हैं। उनके अप्रिय निर्णयों से अमेरिका की जनता या दुनिया के प्रभावित देश कुछ भी सोचें पर इसका उनके स्वास्थ्य पर कोई फर्क नहीं पड़ता। उन्होंने तो कर दिया सो कर दिया। कुछ दिन वह मन ही मन अपने किए गए निर्णयों से खुश होते, दुनिया को अपना और अपनी सेना का दम कर दिखाते रहते हैं। ट्रंप की एक विशेषता है कि उन्हें अपनी सुविधा और प्रतिष्ठा को बनाए रखने के लिए जरूरत अनुसार झूठ बोलने में कोई गुरेज ़ नहीं। उनकी यह एक आदत बन गई कि पल में तोला पल में माशा।

उन्हें पलटी मारने में भी कोई हिचक नहीं होती। ईरान युद्ध में फंसे ट्रंप कभी उससे बातों की टेबल पर बात कर सुलह करने को कहते हैं। लेकिन वार्ता में वह अपनी शर्तों को सामने रख देते हैं। इसके चलते अभी तक युद्ध को शांति में बदलने में कोई प्रगति नहीं हो रही। कभी ईरान को मटियामेट करने की धमकी तो कभी होर्मुज स्ट्रेट को घूरने की बात करते हैं। इधर ईरान भी अमेरिका की रीति नीति के अनुसार झुका नहीं। उल्टे युद्ध में अच्छी टक्कर दे रहा है। कभी ट्रंप युद्ध बंद करने की तो कभी गंभीर परिणाम भुगतने की बात करते रहते हैं। युद्ध और शांति दोनों साथ चलाना चाहते हैं। सच में उनकी माया अपरंपार है।

अब देखिए भारत के साथ कभी टैरिफ बढ़ाने की तो कभी कम करने की बात करते रहते हैं। वह भारत पाक युद्ध को रुकवाने और शांति स्थापित करने की बात कई बार कह चुके हैं। भले ही भारत ने उनकी बात को सही नहीं ठहराया पर, उन्हें क्या? कह दिया सो सही। वह एक झूठ को बार-बार दोहराते रहते हैं। भारत के प्रति कभी वह गरम तो कभी नरम रुख दिखाते रहते हैं। अब आजकल भारत को नरक का गड्ढा बताने लगे हैं। उनके गलत बोल पर प्रतिक्रिया व्यक्त हुई तो अपनी कही बात पर मुसीबत में फंसते देख अमेरिकन दूतावास के प्रवक्ता ने कहा ट्रंप भारत को एक महान देश मानते हैं।

ऐसी बात वह जब तब कहते रहते हैं। पर ट्रंप यह भी सोच रखते हैं कि भारत को वह शक्तिशाली नहीं बनने देगा। कुल मिलाकर दुनिया के देश अब ट्रंप की गलत नीतियों के चलते उन्हें मान सम्मान की दृष्टि से नहीं देख रहे। उनके साथी नाटो देश वाले भी उनकी नीतियों से खुश नहीं। अब आने वाला भविष्य बताएगा कि ट्रंप अपने देश व दुनिया में क्या कुछ और नया करेंगे। पर उनकी नीतियों से तो यह लगता है कि वह दुनिया में अपनी गलत नीतियों से अलग-थलग पड़ते जा रहे हैं। उनके निर्णय व नीतियों पर कोई आज क्या कुछ सोचता है, उन्हें इसकी चिंता नहीं। बस वह तो कर दिया सो कर दिया और कह दिया सो कह दिया। यदि कभी कहे सुने पर यू-टर्न लेना पड़े तो उसमें भी वह देर नहीं करते। और फिर से सहज होने का उपक्रम करने लगते हैं।

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