जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: महाराष्ट्र की राजनीति में उस समय हलचल मच गई, जब भाजपा नेता और राज्य सरकार में मंत्री पंकजा मुंडे तथा उनके चचेरे भाई, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के विधायक धनंजय मुंडे के राजनीति से संन्यास लेने संबंधी बयान चर्चा का विषय बन गए। हालांकि, दोनों नेताओं ने बाद में स्पष्ट किया कि फिलहाल राजनीति छोड़ने का उनका कोई इरादा नहीं है।
पंकजा मुंडे ने क्या कहा?
एक अगस्त को बीड जिले के परली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान पंकजा मुंडे ने क्षेत्र की बदहाल सड़कों और प्रशासनिक व्यवस्था पर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि लगातार खराब हालात देखकर उनके मन में राजनीति छोड़ने का विचार आया था।
उन्होंने कहा, “मैं पिछले 24 घंटे से इसी सड़क से गुजर रही हूं। सब कुछ वैसा ही है। मैंने अपने पीए से पूछा कि यह स्थिति आखिर कब बदलेगी। उस समय मैंने कहा कि मैं थक गई हूं और राजनीति से संन्यास लेना चाहती हूं। हालांकि, उन्होंने तुरंत अपने बयान को स्पष्ट करते हुए कहा कि लोगों के भरोसे और उत्साह ने उन्हें फिर से काम करने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा, जब मैंने गरीब लोगों की आंखों में उम्मीद की चमक देखी, तब महसूस हुआ कि मेरा काम अभी खत्म नहीं हुआ है।
दिवंगत भाजपा नेता गोपीनाथ मुंडे की बेटी पंकजा ने आगे कहा कि यदि कभी उन्हें लगे कि राजनीति उनके सिद्धांतों के अनुरूप नहीं रह गई है, तो वह सम्मानपूर्वक उससे बाहर निकलने का रास्ता चुनेंगी। उन्होंने इसकी तुलना समृद्धि महामार्ग के ‘एग्जिट’ से करते हुए कहा कि एक नेता को राजनीति में आने के साथ-साथ उससे बाहर निकलने के लिए भी तैयार रहना चाहिए।
धनंजय मुंडे ने भी जताई थी चिंता
इसी दिन माजलगांव में आयोजित एक कार्यक्रम में एनसीपी विधायक धनंजय मुंडे ने भी मौजूदा राजनीतिक माहौल पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि जातीय राजनीति का स्तर इतना गिर चुका है कि कई बार राजनीति में बने रहने को लेकर भी सवाल उठने लगते हैं।उन्होंने कहा, “जातीय राजनीति बहुत गंदी हो गई है। कई बार हमारे मन में भी आता है कि क्या राजनीति में बने रहना चाहिए। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि वह समाज सुधारकों के आदर्शों से प्रेरित होकर समानता और सामाजिक न्याय के लिए काम करते रहेंगे।
इस्तीफे के बाद वापसी की कोशिश में धनंजय मुंडे
धनंजय मुंडे का यह बयान ऐसे समय आया है, जब वह मार्च 2025 में मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद सक्रिय राजनीति में अपनी वापसी की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने मस्साजोग के सरपंच संतोष देशमुख हत्याकांड को लेकर बढ़े राजनीतिक दबाव के बीच मंत्रिमंडल से इस्तीफा दिया था। इस मामले में उनके करीबी सहयोगी वाल्मिक कराड का नाम कथित मुख्य साजिशकर्ता के रूप में सामने आया था।

