जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने अनिल धीरूभाई अंबानी समूह (ADAG) से जुड़े कथित बड़े बैंकिंग घोटाले के मामले में सुनवाई को 8 मई तक के लिए स्थगित कर दिया है। यह मामला हजारों करोड़ रुपये के कथित लोन फ्रॉड से संबंधित है। कोर्ट इस मामले में पूर्व नौकरशाह ई. ए. एस. सरमा द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि अनिल अंबानी समूह की कंपनियों ने 40,000 करोड़ रुपये से अधिक के बैंक लोन में धोखाधड़ी की है और इस मामले की जांच अदालत की निगरानी में होनी चाहिए।
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि सीबीआई और ईडी ने अदालत के पिछले आदेश के अनुसार नई स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की है। दोनों एजेंसियां मामले की जांच कर रही हैं और कई वित्तीय पहलुओं पर काम जारी है। याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने आरोप लगाया कि जांच में देरी हो रही है और कथित मुख्य आरोपी के खिलाफ अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।
अनिल अंबानी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत से आग्रह किया कि उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाए। उन्होंने कहा कि कई महत्वपूर्ण तथ्य अभी तक अदालत के सामने पूरी तरह प्रस्तुत नहीं किए गए हैं।
हवाई किराए और अतिरिक्त शुल्क पर नियंत्रण
सुप्रीम कोर्ट एक याचिका पर विचार करेगा, जिसमें निजी एयरलाइंस द्वारा लगाए जा रहे अनियमित और अस्थिर हवाई किराए और अतिरिक्त शुल्कों (Ancillary Charges) पर नियंत्रण के लिए दिशा-निर्देश बनाने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि अचानक बढ़ते किराए आम यात्रियों पर आर्थिक बोझ डालते हैं।
ट्रॉमा केयर व्यवस्था को मजबूत करने की मांग
कोर्ट एक अन्य जनहित याचिका पर भी सुनवाई करेगा, जिसमें देश में ट्रॉमा केयर यानी आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था को बेहतर बनाने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि सड़क दुर्घटनाओं और अन्य आपात स्थितियों में समय पर इलाज न मिलने से कई लोगों की जान चली जाती है।
न्यायिक सेवा नियमों की समीक्षा
सुप्रीम कोर्ट उन याचिकाओं पर भी सुनवाई करेगा, जिनमें न्यायिक सेवा में प्रवेश के लिए अनिवार्य तीन साल की वकालत की शर्त को लेकर पहले के फैसले की समीक्षा की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह नियम कई योग्य उम्मीदवारों के लिए अवसर सीमित कर सकता है।

