जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को लगातार सात कारोबारी सत्रों से जारी गिरावट का सिलसिला थम गया। प्रमुख सूचकांकों में जोरदार खरीदारी देखने को मिली। सेंसेक्स 512.07 अंक यानी करीब 0.67 फीसदी की बढ़त के साथ 77,421.75 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 119.91 अंक चढ़कर 24,198.20 पर पहुंचा।
बाजार में आई इस तेजी से पिछले कई दिनों से दबाव झेल रहे निवेशकों को राहत मिली। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट, शॉर्ट-कवरिंग और सकारात्मक वैश्विक संकेतों ने बाजार की धारणा को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई।
सात दिन की गिरावट पर लगा ब्रेक
इससे पहले बुधवार, 19 अगस्त को भारतीय इक्विटी बाजार लगातार सातवें कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ बंद हुआ था। उस दिन निफ्टी50 76.60 अंक यानी 0.32 फीसदी टूटकर 24,078.30 पर बंद हुआ था। लगातार बिकवाली के कारण बाजार में निवेशकों की चिंता बढ़ रही थी। हालांकि, गुरुवार को बाजार ने मजबूती के साथ वापसी की और शुरुआती कारोबार में ही प्रमुख सूचकांकों में तेजी दिखाई दी।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट से मिला सहारा
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में गिरावट ने इक्विटी बाजारों के लिए माहौल बेहतर किया। बॉन्ड यील्ड में कमी आने पर शेयर बाजार में निवेश का आकर्षण बढ़ सकता है, जिससे निवेशकों की पूंजी इक्विटी की ओर रुख करती है।
इसके अलावा शॉर्ट-कवरिंग ने भी बाजार की तेजी को गति दी। लगातार गिरावट के बाद शॉर्ट पोजीशन रखने वाले निवेशकों द्वारा अपनी पोजीशन कवर करने के लिए शेयरों की खरीदारी करने से बाजार में मांग बढ़ी और प्रमुख सूचकांकों को मजबूती मिली।
वैश्विक बाजारों से भी मिले सकारात्मक संकेत
एशियाई बाजारों में भी गुरुवार को मजबूती देखने को मिली। टोक्यो समयानुसार सुबह 10:45 बजे तक एसएंडपी 500 वायदा 0.2 फीसदी ऊपर था। जापान के निक्केई 225 वायदा और टॉपिक्स में 1.1 फीसदी की तेजी दर्ज की गई। ऑस्ट्रेलिया का एसएंडपी/एएसएक्स 200 0.2 फीसदी चढ़ा।
हांगकांग का हैंग सेंग 1.2 फीसदी की बढ़त के साथ बंद हुआ, जबकि चीन का शंघाई कंपोजिट 0.7 फीसदी ऊपर रहा। हालांकि, यूरोपीय बाजारों से संकेत कुछ कमजोर रहे और यूरो स्टॉक्स 50 वायदा 0.2 फीसदी नीचे था।
निवेशकों को मिली राहत
लगातार सात सत्रों की गिरावट के बाद गुरुवार की तेजी ने बाजार में निवेशकों का भरोसा कुछ हद तक बहाल किया है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, वैश्विक बाजारों के रुख और शॉर्ट-कवरिंग जैसे कारकों के बीच अब निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि यह तेजी आगे भी कायम रहती है या बाजार फिर से बिकवाली के दबाव में आता है।

