जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से बढ़ते प्रभाव और इसके भविष्य को लेकर टेक जगत में बहस लगातार तेज हो रही है। अत्याधुनिक AI सिस्टम के विकास की रफ्तार और इससे जुड़े संभावित खतरों के बीच अब माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्य नडेला ने भी अपनी राय रखी है। नडेला का कहना है कि बेहद शक्तिशाली AI सिस्टम का विकास तभी आगे बढ़ना चाहिए, जब उस पर इंसानों का नियंत्रण और प्रभावी निगरानी बनी रहे।
AI पर इंसानी नियंत्रण को बताया जरूरी
सत्य नडेला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर AI के भविष्य को लेकर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि भविष्य में सुपरइंटेलिजेंस जैसी अत्यधिक शक्तिशाली AI तकनीक विकसित करने का उद्देश्य तभी सार्थक है, जब इसका लाभ पूरी मानवता को मिले और सिस्टम पर इंसानी नियंत्रण कायम रहे।
नडेला के मुताबिक AI का फायदा केवल कुछ देशों या बड़ी टेक कंपनियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। दुनिया के अलग-अलग देशों, समाज के विभिन्न वर्गों और कंपनियों तक AI के लाभ पहुंचने चाहिए। इसके लिए ऐसा माहौल जरूरी है, जहां अलग-अलग तरह के AI मॉडल और तकनीकों को विकसित होने का अवसर मिले।
AI सिस्टम की लगातार हो सुरक्षा जांच
AI की सुरक्षा को लेकर नडेला ने एम्बेडेड इवैल्यूएटर्स यानी स्वतंत्र विशेषज्ञों और जांचकर्ताओं की भूमिका का भी समर्थन किया। ऐसे विशेषज्ञ लगातार AI सिस्टम के व्यवहार और सुरक्षा की जांच कर सकें और किसी संभावित खतरे का समय रहते पता लगाया जा सके।
यह विचार एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोडेई भी पहले सामने रख चुके हैं। उनका कहना रहा है कि बड़ी AI कंपनियों को विशेषज्ञों की ऐसी टीमों को अपने सिस्टम की नियमित और स्वतंत्र जांच करने की अनुमति देनी चाहिए।
नडेला के मुताबिक AI सुरक्षा केवल बहस का विषय नहीं रहनी चाहिए, बल्कि ऐसी व्यावहारिक व्यवस्था तैयार होनी चाहिए, जो AI के विकास के साथ-साथ उसकी निगरानी भी सुनिश्चित करे।
कंपनियों के डेटा पर बना रहे उनका अधिकार
सत्य नडेला ने कंपनियों के डेटा और गोपनीय जानकारी को लेकर भी अहम बात कही। उनका मानना है कि प्रत्येक कंपनी के पास अपनी विशेष और संवेदनशील जानकारी होती है, जिस पर उसका नियंत्रण बना रहना चाहिए।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कंपनियों को किसी एक AI मॉडल या उसके प्रदाता पर पूरी तरह निर्भर नहीं होना चाहिए। कंपनियों के पास अपने डेटा और जानकारी को AI मॉडल में शामिल करने तथा अपनी जरूरतों के मुताबिक सिस्टम को बेहतर बनाने की क्षमता होनी चाहिए।
यानी भविष्य में कंपनियां केवल तैयार AI मॉडल का इस्तेमाल करने तक सीमित न रहें, बल्कि अपनी जरूरत और विशेषज्ञता के आधार पर AI सिस्टम को अनुकूलित और विकसित भी कर सकें।
AI पर कुछ संस्थाओं का एकाधिकार न हो
AI के विकास और संचालन पर कुछ चुनिंदा संस्थाओं के संभावित एकाधिकार को लेकर भी नडेला ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि AI के नियम और इसका संचालन मुट्ठी भर संस्थाओं के हाथों तक सीमित नहीं होना चाहिए।
उनके मुताबिक इस प्रक्रिया में शिक्षाविदों के साथ-साथ दुनिया के अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों और हितधारकों की व्यापक भागीदारी होनी चाहिए। इसी दिशा में माइक्रोसॉफ्ट अपनी MAI प्रणाली के लिए जल्द ही एक आचार संहिता (Code of Conduct) जारी करने की तैयारी में है, जिस पर सार्वजनिक तौर पर लोगों की राय भी ली जाएगी।
डारियो अमोडेई ने गिनाए AI के फायदे और खतरे
AI सुरक्षा को लेकर यह बहस उस समय और तेज हुई जब एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोडेई ने एक लेख में AI के संभावित फायदों के साथ-साथ इसके गंभीर खतरों का भी जिक्र किया।
AI भविष्य में गंभीर बीमारियों के इलाज की खोज को तेज करने और आर्थिक विकास को नई गति देने में अहम भूमिका निभा सकता है। हालांकि, इसके साथ साइबर हमलों, बायोटेररिज्म और अत्यधिक शक्तिशाली मशीनों के नियंत्रण से बाहर होने जैसे जोखिम भी सामने आ सकते हैं।

