जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में रविवार को भारत और अफगानिस्तान के बीच खेले गए पहले टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले से पहले ‘वंदे मातरम’ की गूंज सुनाई दी। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट आयोजन में पहली बार ऐसा हुआ कि मैच शुरू होने से पहले राष्ट्रगीत के सभी छह अंतरे बजाए गए। स्टेडियम में मौजूद दर्शकों और अन्य लोगों ने खड़े होकर राष्ट्रगीत का सम्मान किया।
बीसीसीआई सूत्रों के हवाले से बताया कि अब भारत में खेली जाने वाली प्रत्येक घरेलू द्विपक्षीय सीरीज के पहले मुकाबले से पहले ‘वंदे मातरम’ बजाया जाएगा। यानी देश में होने वाली घरेलू अंतरराष्ट्रीय सीरीज की शुरुआत राष्ट्रगीत के साथ होगी।
सभी छह अंतरे बजाने पर कांग्रेस ने उठाए सवाल
‘वंदे मातरम’ के पूरे संस्करण को बजाए जाने पर कांग्रेस ने सवाल खड़े किए हैं। पार्टी लंबे समय से राष्ट्रगीत के केवल पहले दो अंतरों के इस्तेमाल की वकालत करती रही है।
कांग्रेस नेता उदित राज ने पूरे छह अंतरे बजाए जाने के औचित्य पर सवाल उठाते हुए कहा कि इससे देश की गंभीर समस्याओं का समाधान नहीं होगा। उन्होंने रोजगार, विज्ञान एवं तकनीक, निर्यात, बढ़ते कर्ज और युवाओं से जुड़े मुद्दों का जिक्र करते हुए इसे केवल एक नैरेटिव तैयार करने की कोशिश बताया।
कांग्रेस की कार्यसमिति ने हाल ही में अपने कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम’ के पहले दो अंतरों का इस्तेमाल जारी रखने का फैसला किया था। पार्टी ने इसके लिए 1937 में कांग्रेस द्वारा लिए गए फैसले का हवाला दिया है।
1937 में पहले दो अंतरे चुने गए थे
‘वंदे मातरम’ के पहले दो अंतरों को वर्ष 1937 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने राष्ट्रीय गीत के रूप में स्वीकार किया था। इसके बाद 1950 में संविधान सभा ने इसे राष्ट्रीय गीत के तौर पर मान्यता दी।
‘वंदे मातरम’ के पूर्ण संस्करण को लेकर समय-समय पर राजनीतिक बहस होती रही है। अब क्रिकेट स्टेडियम में इसके सभी छह अंतरे बजाए जाने के बाद एक बार फिर यह मुद्दा चर्चा में आ गया है।
गृह मंत्रालय ने जारी किए थे दिशानिर्देश
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 6 फरवरी को ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ के आयोजनों को लेकर इसके गायन और वादन से संबंधित दिशानिर्देश जारी किए थे। इनमें करीब 3 मिनट 10 सेकंड की आधिकारिक प्रस्तुति निर्धारित की गई थी। दिशानिर्देशों के मुताबिक राष्ट्रगीत के दौरान उपस्थित लोगों को सावधान की मुद्रा में खड़ा होना होता है।
गृह मंत्रालय के दिशानिर्देशों में राष्ट्रपति या राज्यपाल की मौजूदगी वाले औपचारिक सरकारी कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम’ के संपूर्ण छह-अंतरा संस्करण के गायन या वादन का प्रावधान भी किया गया था। इसके अलावा राष्ट्रपति के रेडियो-टेलीविजन संबोधन से पहले और बाद में तथा राष्ट्रीय ध्वज की परेड जैसे विशेष अवसरों पर भी पूर्ण संस्करण के इस्तेमाल की व्यवस्था बताई गई थी।
कश्मीर फिल्म फेस्टिवल में भी हुआ था विवाद
‘वंदे मातरम’ के पूर्ण संस्करण को लेकर हाल ही में जम्मू-कश्मीर में भी विवाद सामने आया था। श्रीनगर में आयोजित एक फिल्म फेस्टिवल में राष्ट्रगीत का पूरा संस्करण बजाया गया था। उस कार्यक्रम में नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला भी मौजूद थे।
महिला एशिया कप ट्रॉफी विवाद पर भी उदित राज का हमला
उदित राज ने भारतीय महिला क्रिकेट टीम के एशियन क्रिकेट काउंसिल (ACC) के चेयरमैन मोहसिन नकवी से महिला एशिया कप की ट्रॉफी लेने से इनकार करने के फैसले पर भी निशाना साधा।
उन्होंने भारतीय टीम के इस रुख को ‘ड्रामा’ और ‘थियेट्रिक्स’ करार दिया। राज ने कहा कि जब पाकिस्तान की टीम भारत आ चुकी है और उसके खिलाड़ी यहां मैच खेल रहे हैं, तो नकवी से ट्रॉफी नहीं लेने का फैसला केवल दिखावा है।
भारतीय महिला टीम ने रविवार को श्रीलंका को 72 रन से हराकर रिकॉर्ड आठवीं बार महिला एशिया कप का खिताब अपने नाम किया। इससे पहले भारतीय पुरुष टीम भी दुबई में मोहसिन नकवी से एशिया कप की ट्रॉफी लेने से इनकार कर चुकी है। महिला टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर और उनकी साथी खिलाड़ियों ने भी पुरस्कार समारोह के दौरान इसी तरह का रुख अपनाया था।
‘वंदे मातरम’ और एशिया कप ट्रॉफी से जुड़े इन दोनों घटनाक्रमों ने एक बार फिर क्रिकेट, राष्ट्रवाद और खेल आयोजनों में राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों की भूमिका को लेकर बहस तेज कर दी है।

