जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: पूर्व भारतीय क्रिकेटर और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के पूर्व सांसद यूसुफ पठान को गुजरात के वडोदरा में लंबे समय से विवादित म्युनिसिपल प्लॉट आवंटित करने का प्रस्ताव सामने आया है। प्रस्ताव के तहत, 500 वर्ग मीटर जमीन पठान को उपहार के रूप में देने और शेष 478 वर्ग मीटर जमीन रियायती दर पर उपलब्ध कराने की बात कही गई है। इस प्रस्ताव पर 23 अक्टूबर को भारतीय जनता पार्टी (BJP) शासित वडोदरा नगर निगम की स्टैंडिंग कमिटी में अंतिम मंजूरी के लिए विचार किया जाएगा।
978 वर्ग मीटर के प्लॉट पर क्या है प्रस्ताव?
सोमवार को जारी एजेंडे के मुताबिक, वडोदरा म्युनिसिपल कमिश्नर ने यह प्रस्ताव पेश किया है। इसके तहत नगर निगम की कुल 978 वर्ग मीटर जमीन में से 500 वर्ग मीटर यूसुफ पठान को उपहार के तौर पर देने का प्रस्ताव है। वहीं, बाकी 478 वर्ग मीटर जमीन वडोदरा अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी (VUDA) की मूल्यांकन समिति द्वारा निर्धारित दर के 55 प्रतिशत मूल्य पर देने की बात कही गई है। यानी इस हिस्से पर 45 प्रतिशत की छूट मिलेगी।
यह आवंटन गुजरात सरकार के शहरी विकास एवं शहरी आवास विभाग की ओर से 2024 में जारी प्रस्ताव में निर्धारित नियमों और शर्तों के अधीन होगा।
2012 से चल रहा है जमीन का विवाद
यूसुफ पठान वर्ष 2012 से वडोदरा के तंदलजा इलाके में अपने पारिवारिक घर के पास स्थित इस आवासीय प्लॉट को हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। शुरुआत में वडोदरा नगर निगम ने जमीन बेचने पर सहमति जताई थी, लेकिन गुजरात सरकार ने 2014 में इस बिक्री को मंजूरी देने से इनकार कर दिया था।
इसके बाद यह मामला लंबे समय तक विवादों में रहा। नगर निगम की ओर से अतिक्रमण को लेकर नोटिस जारी किए जाने के बाद जमीन का विवाद और बढ़ गया।
हाईकोर्ट तक पहुंचा मामला
वर्ष 2024 में पश्चिम बंगाल की बहरामपुर लोकसभा सीट से तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतने के बाद यूसुफ पठान को नगर निगम की ओर से नोटिस जारी किया गया था। इसमें कथित अतिक्रमण हटाने और निगम की जमीन खाली करने को कहा गया था।
पठान ने गुजरात हाईकोर्ट में इस नोटिस को चुनौती देते हुए दलील दी थी कि मामला काफी पुराना है और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई से पहले उन्हें कारण बताओ नोटिस दिया जाना चाहिए था। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि संबंधित जमीन नगर निगम की है, न कि राज्य सरकार की।
हालांकि, हाईकोर्ट ने जमीन आवंटित करने के उनके अनुरोध को खारिज करने के राज्य सरकार के फैसले को बरकरार रखा। इसके बाद पठान ने डिवीजन बेंच में अपील की। इस साल अगस्त में उनके वकील ने अदालत को बताया कि वे राज्य सरकार की नीति के तहत अपना दावा आगे बढ़ाना चाहते हैं। इसके बाद अपील वापस ले ली गई और खारिज कर दी गई।
अब स्टैंडिंग कमिटी के फैसले पर नजर
यह नया प्रस्ताव ऐसे समय आया है, जब पठान के राजनीतिक दल बदलने को लेकर भी चर्चा हो रही है। हालांकि, जमीन आवंटन के प्रस्ताव की मंजूरी का फैसला नगर निगम की स्टैंडिंग कमिटी को करना है।
अगर समिति प्रस्ताव को मंजूरी देती है, तो नगर आयुक्त की ओर से तय नियमों और शर्तों के तहत विवादित प्लॉट के आवंटन का रास्ता खुल सकता है। फिलहाल, इस मामले में अंतिम फैसला स्टैंडिंग कमिटी की बैठक के बाद ही स्पष्ट होगा।

