जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: लोकभवन में प्रदर्शन और मुख्य गेट से अंदर जाने की कोशिश के मामले में कैंट थाना पुलिस ने 40 से अधिक कांग्रेसियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। इनमें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल, वरिष्ठ नेता प्रीतम सिंह और पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत समेत 30 नेताओं को नामजद किया गया है। इसके अलावा 10 से 15 अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है।
पुलिस के मुताबिक, बृहस्पतिवार को कांग्रेस नेताओं ने विभिन्न मांगों को लेकर लोकभवन के बाहर प्रदर्शन किया था। इस दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जारी निर्देशों का उल्लंघन करने का आरोप है। पुलिस ने लोक सेवक के आदेश की अवहेलना और लोक सेवक पर हमला या आपराधिक बल प्रयोग करने से संबंधित आरोपों में मामला दर्ज किया है। पुलिस अब प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं और इसमें शामिल लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
राज्यपाल के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन देने पहुंचे थे कांग्रेस नेता
अंकिता भंडारी प्रकरण को लेकर कांग्रेस नेताओं ने लोकभवन के बाहर प्रदर्शन किया। कांग्रेस नेताओं का उद्देश्य राज्यपाल के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपना था। इसके लिए उन्होंने पहले राज्यपाल से मुलाकात का समय मांगा था। हालांकि, समय नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए नेता बृहस्पतिवार दोपहर बाद अचानक लोकभवन पहुंच गए।
इससे पहले प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, प्रीतम सिंह और डॉ. हरक सिंह रावत ने संयुक्त रूप से प्रेसवार्ता की थी। इसके बाद कांग्रेस नेता ज्ञापन सौंपने के लिए लोकभवन रवाना हुए।
बैरिकेडिंग पर रोका, मुख्य गेट पर हुई पुलिस से नोकझोंक
कांग्रेस नेताओं के लोकभवन की ओर बढ़ने की सूचना मिलने पर पुलिस ने हाथीबड़कला के पास बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोकने का प्रयास किया। हालांकि, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, प्रीतम सिंह और पार्टी के सह प्रभारी सुरेंद्र शर्मा स्कूटी से लोकभवन पहुंच गए। वहीं, गणेश गोदियाल और हरक सिंह रावत अपनी गाड़ियों से मुख्य गेट तक पहुंचे।
मुख्य गेट बंद होने के कारण कांग्रेस नेताओं ने बाहर प्रदर्शन किया और अंदर जाने की कोशिश की। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की हुई। बाद में कांग्रेस नेता मुख्य गेट के बाहर सड़क पर बैठ गए। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर पुलिस लाइन पहुंचाया, जहां से उन्हें रिहा कर दिया गया।
गणेश गोदियाल ने लगाया लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन का आरोप
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि भाजपा नेता दुष्यंत गौतम की राज्यपाल पद पर नियुक्ति रद्द करने की मांग को लेकर राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपना था। इसके लिए राज्यपाल से समय मांगा गया था, लेकिन उन्हें समय नहीं दिया गया।
गोदियाल ने आरोप लगाया कि जब कांग्रेस नेता ज्ञापन देने लोकभवन पहुंचे, तो वहां से कोई अधिकारी ज्ञापन लेने तक नहीं आया। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया।
प्रदर्शन में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी होगी जांच
पुलिस ने प्राथमिकी में नामजद नेताओं के अलावा प्रदर्शन में शामिल अन्य लोगों को भी जांच के दायरे में रखा है। पुलिस के अनुसार, पूरे घटनाक्रम, कानून-व्यवस्था से जुड़ी परिस्थितियों और प्रदर्शन के दौरान हुई कथित धक्का-मुक्की की पड़ताल की जा रही है।

