- खतरा सिर पर मगर नींद में अफसर, मुर्गा मीट की दुकानों की नहीं जांच
- संक्रमित और बीमार या फिर मरे पशु का मीट खाने से संक्रमण का खतरा
- एवियन इन्फ्लूएंजा या एवियन फ्लू ही बर्ड फ्लू है नॉनवेज से परहेज की सलाह
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: बर्ड फ्लू की आशंका के चलते यदि मीट खासतौर से आप चिकन के शौकीन हैं तो सावधान हो जाएं। बेहतर तो यही होगा कि कुछ दिनों के लिए चिकन के मीट को ना कहने की आदत डाल लें। वहीं, दूसरी ओर कई राज्यों में बर्ड फ्लू के खतरे और बड़ी संख्या में परिंदों की मौत के बाद भी यहां अफसर बजाय हरकत में आने के फिलहाल नींद में नजर आत हैं।
कहीं भी न तो जांच पड़ताल चल रही है और नहीं इसको लेकर जागरूक किया जा रहा है। जो हालात नजर आ रहे हैं उनके चलते तो ऐसा लगता है कि मानों लक्षण को लोगों के बर्ड फ्लू के संक्रमित होने का अभी इंतजार है। चिकित्सकों का कहना है कि बर्ड फ्लू और कोरोना संक्रमण के लक्षण काफी मिलते जुलते हैं।
कोरोना संक्रमण की भांति ही बर्ड फ्लू के संक्रमण में सांस लेने में दिक्कत, सिर में दर्द, गले में खरास, नाक का लगातार बहना, शरीर में दर्द व बेचैनी जैसी समस्याओं का होना, तेज बुखार, कफ का बनना और डायरिया। यदि ये लक्षण नजर आएं तो तत्काल मेडिकल या जिला अस्पताल में जाकर जांच कराएं।
क्या है बर्ड फ्लू
मेरठ साउथ मेडिकल एसोएिसशन के अध्यक्ष डा. संदीप जैन बताते हैं कि बर्ड फ्लू के नाम से जिस बीमारी को आमतौर पर यहां जाना जाता है उसको एवियन इन्फ्लूएंजा या एवियन फ्लू भी कहते हैं। उत्तर भारत खासतौर से दिल्ली के आसपास के इलाकों में इस संक्रमण को बर्ड फ्लू के नाम से संबोधित करते हैं, लेकिन मेडिकल इसका नाम एवियन इन्फ्लूएंजा है। यह एक प्रकार का संक्रमण है और पक्षियों द्वारा फैलाया जाता है।
ऐसे पहुंचता है इंसानों तक
कई बार संक्रमित पक्षी यदि कोई पानी पीते हैं और वह पानी को हमारे पालतु पशु भी पी लेते हैं तो उनके जरिये बर्ड फ्लू का वायरस इंसानों खासकर परिवारों के बीच भी पहुंच जाता है। इससे पालतु पशुओं के साथ ही उन इंसानों के लिए भी खतरा होता है, जिनके बीच वो पालतु पशु रहते हैं। इसलिए इस सीजन में जितना ध्यान और सावधानी इंसानों के लिए जरूरी है उतनी ही सावधानी पालतु पशुओं के लिए भी जरूरी है।
मुर्गों से फैलता है संक्रमण
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि आमतौर पर बर्ड फ्लू का संक्रमण मुर्गों से फैलता है। पंजाब और हरियाणा सरीखे राज्यों में जहां बडेÞ पोल्ड्री फार्म हैं से दिल्ली और आसपास चिकन की आपूर्ति की जाती है। हरियाणा के दो फार्मों में 70 हजार से ज्यादा मुर्गों की मौत हुई है।
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि कई बार चंद सिक्कों के लाचल में मरे हुए मुर्गों का मीट भी सप्लाई कर दिया जाता है। हाइवे स्थित ढाबों व होटलों पर इस प्रकार की आशंका अधिक होती है। इसलिए जब तक संक्रमण का खतरा है तब तक बेहतर है कि चिकन से परहेज बरता जाए। इसके अलावा यदि मरे हुए मुर्गों को दफनाया भी जाता है तो भी उससे दूसरे पशुओं में आसानी से संक्रमण के पहुंचने की गुंजाइश होती है। पशुओं से संक्रमण इंसानों तक पहुंच जाता है।
चिकन कारोबारी अलर्ट
वहीं, दूसरी ओर मुर्गों से बीमारी फैलने की खबर से चिकन कारोबारी चौकस हैं। लिसाड़ीगेट में चिकन मीट की सप्लाई करने वाले नईम बताते हैं कि इसको लेकर पूरी चौकसी बरती जा रही है। जहां से माल मंगाते हैं वहां भी बात कर रहे हैं।
फिलहाल शहर में किसी प्रकार की जांच पड़ताल शुरू की गयी हो ऐसा नहीं। इनके अलावा गुलमर्ग के ईशा, हाजी फारुख व शमशाद तथा वाहिद ने भी बताया कि हालात पर नजर रखे हैं।
ये कहना है एडी हेल्थ का
पूर्व सीएमओ व एडी हेल्थ डा. राजकुमार ने बताया कि बर्ड फ्लू के लिए कोई खास सीजन नहीं होता। यह संक्रमण किसी भी सीजन में फैल सकता है। पक्षियों खासतौर से मुर्गों से फैलने वाला यह संक्रमण इंसानों में तेजी से फैलता है। इसलिए जरूरी है कि नॉनवेज से बचा जाए।
ये कहना है चिकन कारोबारी का
चिकन कारोबारी नईम का कहना है कि इस प्रकार की खबरों के बाद सावधान हैं। जहां से माल मंगाते हैं वहां भी बात कर रहे हैं। पहले भी जब बीमारी आयी थी तो भारी भरकम नुकसान उठाना पड़ा था। इस बार ऐसा हुआ तो बर्बाद हो जाएंगे। कारोबारियों का कहना है कि जो माल मंगाते हैं वो खरा होता है, उसकी पेमेंट भी की जाती है।

