- लिसाड़ीगेट क्षेत्र में नाले के दोनों ओर बनायी जा रही दीवार की चिनाई में सीमेंट का नामोनिशान नहीं
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: पहली ही बारिश ये रेत की सफीलें पानी के साथ बह जाएंगी। नगर निगम के अफसरों ने यदि ध्यान नहीं दिया तो रेत की ये सफीलें बचानी मुश्किल होंगी। लिसाड़ीगेट एरिया में काली नदी में जाकर मिलने वाले पुराने नाले के दोनों ओर दीवानें बनाने का काम इन दिनों चल रहा है।
दरअसल, कभी यह नाला दोनों ओर से कच्चा हुआ करता था। जिसकी वजह से जमीन का कटान होने लगा था। उसके बाद ही दोनों ओर दीवारें खड़ी किए जाने का फैसला लिया गया है, लेकिन जिस ठेकेदार को यह काम सौंपा गया है वो जिस प्रकार की निर्माण सामग्री लगा रहा है उससे तो यही लगता है कि बगैर सीमेंट के तैयार की जा रही ये दीवारें बारिश के पानी के साथ ही बह जाएंगी।

नौबत यहीं तक नहीं रही। लोगों ने बताया कि वैसे तो नाले के पानी से होने वाले कटान को रोकने के लिए बनायी जा रही दीवारों में बुनियाद से ही सरिया डाला जाना चाहिए था, लेकिन भ्रष्टचार और निगम के अफसरों की मिलीभगत के चलते ठेकेदार दीवारों को मजबूती देने के सरिया डालना ही भूल गया।
सरिया ही डालना नहीं भूला बल्कि चिनाई के दौरान सीमेंट से भी पूरी तरह से परहेज बरता जा रहा है। लोगों ने बताया कि वार्ड-72 के निगम पार्षद भी दिन में दो बार राउंड लेने के लिए आते हैं, लेकिन उन्होंने भी सीमेंट क्यों नहीं लगाया जा रहा है। यह जानने की जरूरत नहीं समझी। या फिर यह मान लिया जाए कि गोरखधंधे में वह खुद भी शामिल हैं।
हालांकि ऐसा कहना इलाके के रहने वालों का है जनवाणी का नहीं। लोगों ने बताया कि ठेकेदार की कारगुजारी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि नगरायुक्त व चीफ इंजीनियर को धोखा देने के लिए नाले की दीवार के ऊपर की ओर महज दो से तीन फीट के सरिये उसने लगा दिए हैं ताकि साबित किया जा सके कि सरीये दीवार के नीचे तक लगाए गए हैं।
यदि नगरायुक्त मौके पर जाकर इसकी जांच करें तो सारी कारगुजारी से पर्दा उठ सकता है। यदि इस मामले को दबाया गया तो रेत की दीवारों का बारिश के पानी के साथ बहना तय है।

