- फिलहाल अशोका और गड्ढा मार्केट के व्यापारी भी अधरे में लटके
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: रैपिड प्रोजेक्ट के चलते बेगमपुल व आबूलेन समेत आसपास के बडे इलाके का भूगोल बदलने जा रहा है। इस प्रोजेक्ट की वजह से आबूलेन स्थित होटल अमृत, सांई मंदिर, बेगमपुल बिजलीघर, श्रीप्लाजा, सरीखे इलाकों पर संकट मंडरा रहा है। हालांकि अभी अधिकृत रूप से इसकी घोषणा नहीं की गई है, लेकिन बेगमपुल पर रैपिड प्रोजेक्ट का काम कर रहे एक उच्च पदस्थ अधिकारी ने बताया कि काफी बड़ा प्रोजेक्ट है।
इसके लिए जो इलाके रडार पर माने जा रहे हैं या जिनको बुरी तरह से प्रभावित होना पडेगा। उनमें आबूलेन स्थित होटल अमृत समेत अजंता पेट्रोल पंप के आसपास का इलाका भी शामिल है। जो लोग रैपिड प्रोजेक्ट की भेंट चढेंगे, उनमें शामिल हैं लालकुर्ती पैंठ एरिया व शास्त्री मूर्ति स्थित अशोक मार्केट के जिन व्यापारियों को जगह छोड़ देने के नोटिस दिए गए हैं। फिलहाल तो उनका भविष्य अधर में नजर आ रहा रहा है।

इनको होटल अमृत की पार्किंग जहां कैंट बोर्ड ने कुछ समय पूर्व फड बना दी थीं। वहां शिफ्ट किए जाने की बात चल रही थी। कैंट बोर्ड प्रशासन व एसीएम सदर ने वहां का दौरा भी किया था, लेकिन बाद में जब खुलासा हुआ कि एक आरटीआई एक्टिविस्ट लोकेशन खुराना ने इसको लेकर हाईकोर्ट में रिट दायर की हुई है तो जिला प्रशासन ने पांव पीछे खींच लिए। आज तो जो स्थिति है उसके चलते गड्ढा मार्केट व अशोका मार्केट के दुकानदारों को शिफ्ट करने के लिए किसी नतीजे पर नहीं पहुंचा जा सका है।
प्रोजेक्ट पूरा होने तक बड़ा इलाका बंद
बताया गया है कि रैपिड प्रोजेक्ट पूरा होने तक बेगमपुल के आसपास का इलाका सीज कर दिया जाएगा। इसमें मुख्यत वीरबाला पथ इलाके में रैपिड के लिए काम करने वाली कंपनी के भारी भरकम ट्रक व दूसरे सामान का ठिकाना बनेगा। दरअसल, इस जगह को कंपनी के अधिकारियों ने गोदाम के तौर पर यूज करने का प्लान तय किया है। इसकी जानकारी वीरबाला पथ के दुकानदारों को जब से मिली है वो बेहद परेशान हैं।
आबूलेन भी होगा प्रभावित
आबूलेन का कुछ हिस्सा भी रैपिड प्रोजेक्ट पर काम करने वाली कंपनी के अधिकारी प्रयोग में लाने की बात कह रहे हैं। निशात सिनेमा से आगे तक का कुछ हिस्सा अधिकृत या फिर सामान्य आवाजाही के लिए बंद किया जा सकता है। कंपनी के एक अधिकारी ने बताया कि बेगमपुल पर बनने वाला रैपिड स्टेशन दिल्ली के राजीव चौक की तर्ज पर तैयार किया जाना है। इसके लिए काफी जगह की जरूरत पडेगी।
25 जनवरी तक का अल्टीमेटम
वहीं, दूसरी ओर आबूलेन स्थित बंगला नंबर-80 के दुकानदारों तथा भीतर रहने वाले 14 किरायेदारों को जगह खाली कर दिए जाने के लिए 25 जनवरी तक की मोहलत दी गई है। हालांकि जहां तक प्रोजेक्ट पर काम करने वाली कंपनी की बात है तो कंपनी के कारिंदों ने तो जगह खाली होने का भी इंतजार नहीं किया। शनिवार को अर्द्धरात्रि उपरांत उनका सामान बेगमपुल पर पहुंचना शुरू हो गया। रविवार को उन्होंने सड़क पर ब्लाकेज लगा दिए। उनका कहना है कि तीन साल के अंदर प्रोजेक्ट पूरा किए जाने का वक्त दिया गया है। उनके लिए एक-एक दिन कीमती है।
व्यापारी बोले-नुकसान न होने पाए
वहीं, दूसरी ओर व्यापारियों से खासतौर पर जो व्यापारी इस प्रोजेक्ट के चलते प्रभावित हो रहे हैं। जिन पर उजाडेÞ जाने की तलवार लटक रही है। उनका कहना है कि प्रोजेक्ट का विरोध नहीं है, लेकिन सरकार ये भी ध्यान रखे कि व्यापारियों का अहित न हो। यदि जगह चाहिए तो उनको समुचित मुआवजा दिया जाए या फिर दूसरी जगह बसाने का विकल्प तैयार रखें।

रैपिड रेल: निर्माण को देखने के लिए लगाये कैमरे
रैपिड रेल का निर्माण तेजी पकड़ रहा हैं। अब रैपिड रेल के निर्माण कार्य को सीधे दिल्ली से वॉच किया जा रहा है। निर्माण स्थल पर कैमरे लगाये गए हैं, जिसके माध्यम से दिल्ली में बैठे आला अफसर निर्माण को हर रोज देख रहे हैं। कहीं इसमें लापरवाही तो नहीं चल रही है। काम चल भी रहा है या फिर झूठ बोला जाता है।
इस पर निगाहें लगी हुई है। लापरवाही करने वाले इंजाीनियरों पर कार्रवाई भी की जाती है। कैमरे सिर्फ इसलिए लगाये गए हैं, ताकि दिये गए लक्ष्य के अनुसार 2025 तक रैपिड रेल का निर्माण पूर्ण करके दिया जाए। बेगमपुल पर भी रैपिड रेल का कार्य आरंभ कर दिया गया हैं। यहां पर थोड़ी दिक्कत आ रही थी, लेकिन काम चालू कर दिया गया है। स्टेशनों के लिए भी अभी दिक्कत ज्यो कि त्यो बनी हुई है।
मोदीपुरम में डिपो को लेकर अभी रुकावट बनी हुई है। इसके लिए प्रशासनिक अधिकारी भी जुटे हुए हैं। दिल्ली से मेरठ के बीच चलने वाली रैपिड रेल के लिए अब दुहाई में डिपो की तैयारियों को शुरू कर दी है। पिछले कुछ समय से यहां जमीन को लेकर अड़चनें थीं, लेकिन अब यहां ट्रेनों को खड़ा करने के लिए निर्माण कार्य किया जा रहा है। रैपिड रेल के लिए दुहाई और मेरठ में डिपो बनाए जाने हैं।
82 किमी के इस ट्रैक में दो स्थानों पर रैपिड रेल का रखरखाव होगा। दुहाई डिपो में 12 आरआरटीएस ट्रेनों को खड़ी करने की क्षमता होगी। तीन निरीक्षण लाइनों और दो कार्यशाला लाइनों के साथ-साथ लगभग एक किमी की रनिंग टेस्ट ट्रैक भी होगा। मेरठ में भी मोदीपुरम में डिपो बनाने के लिए जमीन को खोजा जा रहा है। इस कॉरिडोर के कुछ ट्रेन सेट्स को मोदीपुरम डिपो में खड़ा किया जाएगा।
रैपिड रेल को रातभर डिपो में रखा जाएगा। जहां उनके रखरखाव, सफाई, मरम्मत आदि की व्यवस्था होगी। दुहाई में जितनी जमीन अधिकृत की गई उस पर डिपो निर्माण गतिविधियों को शुरू कर दिया है। शताब्दीनगर में यार्ड बनाया गया हैं,जहां पर तमाम सुविधा मुहैय्या कराई जा रही है।
एमडीए से यह यार्ड एनसीआरटी ने किराये पर लिया है। फुटबॉल चौराहे पर स्टेशन के लिए जमीन लेने की कवायद की जा रही है। प्रशासन से भी कहा जा रहा है। यहां पर कुछ जमीन का अधिग्रहण करना पड़ सकता है, वैसे स्टेशन चौराहे पर ही बनाया जाएगा।

