- जयंत चौधरी ने किसानों से एकजुट होकर सरकार को जवाब देने का आह्वान किया
- कहा, मोदी सरकार किसान के लिए कील और अंबानी-अडानी के लिए कालीन बिछा रही
मुख्य संवाददाता |
बागपत: रालोद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जयंत चौधरी ने कहा कि वह किसानों के साथ हैं और किसानों के समर्थन में जेल भी जाना पड़ा तो पीछे नहीं हटूंगा, लेकिन किसान के हक की आवाज को कभी दबने नहीं दूंगा। उन्होंने कहा कि किसानों को आज एकजुट होने और विधायक से लेकर सांसद की कुर्सी पर पहरा रखने की आवश्यकता है। आज किसान के लिए सरकार कील बिछा रही है और अंबानी-अडानी के लिए कालीन बिछाने में लगी है। किसान को बर्बाद करने और अंबानी-अडानी को मजबूत करने की नीति पर काम किया जा रहा है। यह किसान के अस्तित्व की लड़ाई है।
ढिकौली गांव स्थित महात्मा गांधी इंटर कालेज के मैदान में रालोद के आह्वान पर किसान पंचायत आयोजित की गई। किसान पंचायत को संबोधित करते हुए जयंत चौधरी ने ढिकौली, रटौल, खैला आदि सहित आसपास के गांव डबल नेतृत्व करने वाले हैं, इसलिस यहां पंचायत में भीड़ भी डबल की है।
ढिकौली के एमजीएम इंटर कालेज के मैदान में युवाओं द्वारा तैयार किए गए मैदान पर जयंत ने कहा कि खुशी है कि यहां के युवाओं ने तीन लाख रुपये एकत्र कर सेना भर्ती की तैयारी का प्लेटफार्म तैयार किया है। यह जुनून दिखाता है कि युवाओं का जोश कम नहीं है।

युवा इसके लिए बधाई के पात्र है। कहा कि चौधरी चरण सिंह व चौधरी अजित सिंह का यहां से विशेष स्थान रहा है। यहां के लोगों का हमेशा स्नेह और आशीर्वाद मिला है। उन्होंने कहा कि चोट भले ही किसी दूसरे स्थान के किसान को लगे, लेकिन यहां का किसान भी उसका जवाब देने से पीछे नहीं हटता।
यही कारण है कि यहां के किसान भी आंदोलन में पीछे नहीं है और तीन कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे आंदोलन में अपने हक की आवाज उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज जिनसे मुकाबला है वह मानने को तैयार नहीं है कि देश बर्बादी के मुहाने पर है। न किसान खुश है, न युवा खुश है, न मजदूर खुश हैं और न ही देश की आम जनता खुश है। हर कोई परेशान है।
मोदी कहते हैं कि पूर्व की सरकारों की कमी के कारण पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ रहे हैं। उन्होंने मोदी के पकोड़े के बयान पर तंज कसते हुए कहा कि जब सिलेंडर महंगा है तो युवा पकोड़े कैसे तलेंगे? बिजली की कीमतों में 250 प्रतिशत इजाफा कर दिया है। उन्होंने कहा कि महंगाई पर सरकार चुप्पी साधे हुए हैं।
बागपत के किसान ही बैंकों के 1342 करोड़ के कर्जदार हैं। गन्ने का भुगतान यहां नहीं हो रहा है। 173 करोड़ रुपये पिछले साल का मिलाकर इस बार 900 करोड़ के करीब का बकाया गन्ने का हो चुका है। यह किसान का हक है और उसका पैसा है, लेकिन उसे ही नहीं मिल पा रहा है।
किसान अपने हक की आवाज को उठाता है तो भक्त मंडली कभी उसे देशद्रोही का टैग देती है तो कभी खालिस्तानी का टैग लगा दिया जाता है। सरकार यह भूल गई है कि वही किसान है जिसकी वोट से वह सत्ता में आई है। मोदी को किसानों की नहीं बल्कि अंबानी-अडानी की चिंता है।
लॉकडाउन में देश की जीडीपी घटती जा रही थी और अंबानी-अडानी सहित कई अमीरों की आर्थिक व्यवस्था बढ़ती जा रही थी। लॉकडाउन में अंबानी ने 90 करोड़ रुपये घंटे के हिसाब से अपनी आमदनी में लगे थे। जबकि किसान, मजदूर, गरीब दो जून की रोटी की जद्दोजहद में लगे हुए थे।
तीन कृषि कानूनों को किसान बिल का नाम तो दे दिया, लेकिन इसमें किसान के हित की बात नहीं बल्कि अंबानी-अडानी के हित की है। उन्होंने पहले ही जमीन ले ली, इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि उन्हें बिल के बारे में पहले ही पता था। उन्होंने कहा कि सरकार पॉप स्टार रिहाना को लेकर ट्वीट कर सकती है, लेकिन किसान आंदोलन में अपने प्राणों की बलि देने वाले किसानों के लिए दो शब्द कहने की फुर्सत तक नहीं।
उन्होंने जनसमूह से अपील की है कि जब तक मुद्दों को सोच समझकर चुनाव नहीं करेंगे तब तक न सीएम मिलेगा और न ही पीएम अपना मिलेगा। अब माहौल किसानों के पक्ष में है। उन्होंने रालोद को मजबूत करने की अपील करते हुए कहा कि यहां मसला वोट का नहीं, बल्कि सांसद व विधायक की कुर्सी पर नजर रखने का है।
उन्होंने कहा कि किसान को अपने हक की आवाज उठाने के लिए एकजुटता को बरकरार रखना होगा। जयंत चौधरी ने कहा कि वह किसानों के साथ है और किसानों के समर्थन में जेल जाने से भी पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने जनसमूह के समक्ष तीन प्रस्ताव भी रखे और सहमति भी ली।
उन्होंने कहा कि जिस तरह से माया त्यागी कांड में चौधरी चरण सिंह के एक आह्वान पर बागपत ने अहम भूमिका निभाई थी उसी तरह अपने हक की बात उठाने और किसान की बात उठाने वाले पत्रकारों का उत्पीड़न करने वालों के खिलाफ मोर्चा आंदोलन करने को तैयार रहना होगा।
उन्होंने पत्रकार मनदीप पूनिया का भी उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि एमएसपी पर कानून बनना चाहिए और तीनों कृषि कानून वापस होने चाहिए। इस पर जनसमूह ने हाथ उठाकर सहमति दी। इसके अलावा उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वह सोशल मीडिया पर भी एक्टिव रहें। भाजपा के गलत कार्यों पर जवाब भी दें। किसान पंचायत की अध्यक्षता चेयरमैन डॉ. मांगेराम यादव व संचालन रालोद जिलाध्यक्ष डॉ. जगपाल सिंह तेवतिया ने किया।
जाट नहीं, किसान की बात है: जयंत
जयंत चौधरी ने कहा कि सरकार कहती है कि यह जाटों का आंदोलन है, लेकिन वह कहना चाहते हैं कि यहां जाट नहीं बल्कि किसान के अस्तित्व और उसकी पहचान की लड़ाई है। यही कारण है कि लखीमपुर खीरी आदि सहित अन्य स्थानों पर भी रालोद किसान पंचायत आयोजित कर रहा है। खेती किसानी से जुड़ा हर व्यक्ति आंदोलन का हिस्सा है।
आत्महत्या को कभी भूलना नहीं चाहिए
जयंत चौधरी ने कहा कि बिजली के बिल व अन्य कर्ज के तले डूबने पर ढिकौली के ही अनिल ने पिछले साल आत्महत्या कर ली थी। उस परिवार की पीड़ा को कभी भूलना नहीं चाहिए।
पिंजरे में कैद है, आएगी सद्बुद्धि
कुछ नेताओं पर तंज कसते हुए जयंत चौधरी ने कहा कि वह हमारे बीच के हैं। वह पिंजरे में कैद है। कभी न कभी उन्हें भी सदबुद्धि आएगी और किसानों के बीच वह आएंगे।
ये लोग रहे रैली में मौजूद
रालोद के पूर्व जिलाध्यक्ष एवं पूर्व जिला पंचायत सदस्य कपिल चौधरी, मंडल महासचिव ओमबीर ढाका, पूर्व विधायक अजय तोमर, पूर्व विधायक अजय कुमार, पूर्व जिलाध्यक्ष सुखवीर गठीना, पूर्व विधायक वीरपाल राठी,
सतेन्द्र प्रमुख, अरूण तोमर उर्फ बोबी, पार्टी महासचिव डा. मैराजूदीन, सचिव रविन्द्र तोमर, राजवीर सिंह निर्वाल, धीरज उज्जवल, जयकुमार प्रधान, राधेश्याम, संदीप ढाका, युवा जिलाध्यक्ष प्रमेन्द्र तोमर, पूर्व विधायक राजेन्द्र मुन्ना, जितेन्द्र चौधरी, पप्पन राणा, फखरूदीन अब्बासी, विकास प्रधान, सुरेश राणा, जमीरूद्दीन अब्बासी, मास्टर मनोज तोमर, संजीव मान, विकास प्रधान, ब्रजपाल तोमर, मुनेश बरवाला, बागपत ब्लाक प्रमुख सुभाष गुर्जर, विश्वास चौधरी, विकास प्रधान, सुरेश मलिक, चिराग चौधरी, डा. इरफान मलिक, जयवीर सिंह एडवोकेट, राजू तोमर सिरसली, बबली लोयन, डा. साहब सिंह, राजू तोमर सिरसली, लेखराज प्रधान, सचिन पंडित, सुभाष नैन, तेजपाल धनौरा, कप्तान सिंह, अश्वनी तोमर आदि मौजूद रहे।

