- अधिकांश स्टाफ मास्क पीपीई किट और ग्लब्स के बिना जा रहे लोगों के घर
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: एक तरफ कोरोना का संक्रमण लगातार बढ़ता जा रहा है। वहीं, दूसरी ओर आरटीपीसीआर जांच करने वाली प्रयोगशालाओं के तमाम कर्मचारी कोरोना गाइड लाइन का पालन करने को तैयार नहीं है। हालात यह हो गए हैं कि प्राइवेट लैबों के कई कर्मचारी दूसरों की जान जोखिम में डाल रहे हैं।
कोरोना का संक्रमण रिकार्ड तोड़ रहा है। जनपद का हर मोहल्ला कोरोना की चपेट में आ रहा है। मेडिकल कालेज और जिला अस्पताल के अलावा प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में आरटीपीसीआर जांच चल रही है। इनके अलावा कई निजी प्रयोगशालाओं को भी इसकी अनुमति दी गई है।
हैरानी की बात यह है कि कुछ प्रयोगशालाओं के कर्मचारी डिमांड पर जब सैंपल लेने जा रहे हैं तो कोरोना गाइड लाइन का पालन तक नहीं कर रहे हैं। हालांकि जो लोग मेडिकल कालेज और जिला अस्पताल में आरटीपीसीआर की जांच के लिये जा रहे हैं। उनको तो यह व्यवस्था देखने को मिल रही है, लेकिन प्राइवेट में यह नदारद है।
स्वास्थ्य विभाग को ऐसे कई मामले सुनने को मिले हैं। जिसमें लैब का स्टाफ किसी के घर सैंपल लेने गया तो उसके पास न तो नया ग्लब्स था और न ही मास्क। पीपीई किट तो किसी ने भी नहीं पहन रखी थी। हालांकि प्राइवेट लैब कोरोना टेस्ट के लिये 1500 रुपये तक वसूल रहे हैं, लेकिन खुद के कर्मचारी और दूसरे की सुरक्षा को देखते हुए 100 रुपये भी खर्च करने को तैयार नहीं है।
यह हाल तब है जब प्राइवेट लैब वाले कोरोना जांच के नाम पर जमकर कमाई कर रहे हैं। अगर कुछ कर्मचारी इसी तरह लापरवाही करते हुए गाइड लाइनों का उल्लंघन करते रहे तो यह कोरोना बम बनकर दूसरों को बीमारी सौंपने का काम करते रहेंगे।

