Friday, March 20, 2026
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मास्क को पहनें रहें हर घड़ी ताकि टूटे न जिंदगी की लड़ी

जनवाणी डिजिटल डेस्क |

नई दिल्ली: अचानक से कोरोना का कहर ऐसा बरपा रहा कि मानों अब जिंदगी ही लाइन में लग गई। इंसान फिर भी लापरवाही बरत रहा। हमको अभी भी कोरोना से डर नहीं लग रहा है। कोरोना वायरस का यह हमला इतना खतरनाक है कि इंसानी जिंदगी के सांस की डोर टूट रही है। यह लाइलाज है।

इसका एक ही विकल्प है वैक्सीन वो बचाव के लिए लेकिन फिर भी कोरोना संक्रमित होने का डर बना रहेगा पर एक बात को डॉक्टर्स जोर देकर कह रहें हैं कि जिंदगी की लड़ी नहीं टूटेगी। यही तो चाहिए कि कम से जिंदगी तो सलामत रहे। कब सोचोगे जब कमान से तीर निकल जायेगी तब तक बहुत देर हो जाएगी।

देश इन दिनों लाइन में खड़ा है। डरा-सहमा। लाइलाज कोरोना की दूसरी लहर ने ऐसे हालात बना दिए हैं। सर्दी, बुखार और खांसी हुई तो टेस्ट की लाइन। अगर रिपोर्ट पॉजिटिव आई तो हॉस्पिटल के बाहर लाइन। अगर किसी तरह बेड मिल गया तो ऑक्सीजन के लिए लाइन। तबीयत बिगड़ गई तो रेमडेसिविर के लिए लाइन, और ज्यादा बिगड़ी तो वेंटिलेटर के लिए लाइन। आखिर में अगर जान नहीं बची तो अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाट में लाइन।

कोई एक राज्य, शहर या हॉस्पिटल नहीं है, जहां लोग इस तरह की मुश्किल से गुजर रहे हैं। मध्यप्रदेश, राजस्थान, गुजरात, बिहार, महाराष्ट्र, दिल्ली हो या कोई और छोटा-बड़ा राज्य। हर जगह जिंदा और मुर्दा लोगों का एक ही मकाम है, और वह है कतार, सिर्फ कतार में होना।

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फोटो लखनऊ के लोहिया हॉस्पिटल की है। यहां लोग अपना टेस्ट कराने आए हैं। यह कोरोना से जूझने का सबसे शुरुआती दौर है। यहां अगर फेल हुए तो परेशानियों का लंबा सिलसिला शुरू हो जाता है। देश में अब तक करीब साढ़े 14 करोड़ टेस्टिंग हो चुकी हैं। यह संख्या महाराष्ट्र की पूरी आबादी से भी दो करोड़ ज्यादा है।

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गुजरात के अहमदाबाद में सोमवार को एक हॉस्पिटल के बाहर ऐंबुलेंस की लाइन लगी रही। इनमें कोरोना के मरीज एडमिट होने का इंतजार कर रहे हैं। हॉस्पिटल के अंदर से बुलावा आए तो इन्हें जगह मिले। कई शहरों में हालात ऐसे हैं कि मरीजों को उनके घरवाले ऐंबुलेंस में लेकर घूम रहे हैं, लेकिन हॉस्पिटल खाली नहीं हैं।

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दिल्ली के अस्पतालों में ऑक्सीजन नहीं है। सरकार लाचारी दिखा रही है। कोर्ट उसे फटकार रही है। इसके बावजूद मरीजों के लिए ऑक्सीजन का इंतजाम नहीं है। उनके परिवार वाले खाली सिलेंडर लेकर रिफिल सेंटर के बाहर लाइन लगाकर खड़े रहते हैं। इस इंतजार में कई बार मरीज की सांसें टूट जाती हैं।

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इस तरह की तस्वीरें बताती हैं कि ये दौर कितना बुरा है। श्मशान घाटों में एक साथ कई चिताएं जल रही हैं। कई जगह तो इसके लिए भी टोकन बंट रहे हैं। यहां काम करने वाले लोग थक कर चूर हो जाते हैं, लेकिन लाशें आने का सिलसिला नहीं थमता। कई घंटे इंतजार करने के बाद मरने वाले को अंतिम संस्कार नसीब होता है।

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महाराष्ट्र में बीते कई महीनों से देश में सबसे ज्यादा केस आ रहे हैं। यही वजह है कि यहां वैक्सीनेशन भी बड़े पैमाने पर किया जा रहा है। यह फोटो मुंबई के गोरेगांव की है। यहां एक वैक्सीनेशन सेंटर के बाहर सैकड़ों लोग वैक्सीन लगवाने पहुंचे हैं। इस वजह से उनकी लाइन बाहर तक लगानी पड़ी।

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कोरोना का एक असर यह भी है कि लोग एक साल में दूसरी बार पलायन करने के लिए मजबूर हो गए हैं। कई शहरों में लॉकडाउन लगने से वे वापस अपने घर-गांव का रुख कर रहे हैं। बसों-ट्रेनों में जगह नहीं है। यह फोटो गुड़गांव की है। यहां लोग बस में बैठने के लिए अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं।

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