- कोरोना के कारण पिछले कई माह से नहीं हो रहे आयोजन
- होटलों और मंडपों पर पड़ रही दोहरी मार, खर्चे पूरे, कमाई नहीं
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: कोरोना का कहर सभी पर पड़ता दिखाई दे रहा है, लेकिन मंडपों और होटलों का हाल किसी से छुपा नहीं है। शादियों के सीजन दोनों साल फ्लॉप साबित हुए मंडप संचालकों की माने तो पिछले तीन माह में ही इनसे जुड़े सभी व्यापारियों को करीब 300 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
हालात इस कदर खराब हो चुके हैं कि मंडप संचालक परेशान हैं कि किस तरह से मंडपों का संचालन फिर से कर पाएंगे। उनके ऊपर अपनी प्रॉपर्टी को बचाये रखना ही मुश्किल हो रहा है। होटलों में भी यही हाल बना हुआ है, लेकिन प्रशासन भी इस ओर कोई ध्यान देने को तैयार नहीं है।
मेरठ में लगभग 350 मंडपों का संचालन किया जा रहा है। वर्ष 2020 में आई कोरोना महामारी के चलते मंडप व्यवसाय लगभग खत्म-सा हो गया है। इस वर्ष शुरूआती दौर में व्यवसाय ने अपनी रफ्तार पकड़ी ही थी कि मार्च के अंत तक से जुलाई तक के सभी शुभ कार्य शादी लगन संबंधित या तो कैंसिल कर दिये गये या आगे तिथि बढ़ा दी गई। मेरठ में करीब 4000 हजार शादियां व छोटे बड़े कार्यक्रम रद हुए।
इन तीन माह में अनुमानित 300 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ व्यापारी वर्ग को पहुंचा है। इस व्यवसाय से संबंधित फूल, जनरेटर, डेकोरेटर, डीजे, इवेंट मैनेजमैंट, बिजली, बैंड शहनाई, कपड़े, ज्वेलरी से संबंधित सभी व्यापारियों व कर्मचारियों को काफी नुकसान पहुंचा है।
बैंड, शहनाई वाले, मंडप में काम करने वाले, सफाई करने वाले, खाना पकाने वाले वेटर आदि एक एक रोटी को तरस रहे हैं। उनकी आय के साधन पूरी तरह से बंद हो चुके हैं। मंडप के अंदर गार्ड की व्यवस्था, बिजली वाले, माली आदि व्यक्तियों की आवश्यकता होती है आज के समय में इनकी तनख्वाह निकाल पाना भी मुश्किल हो रहा है। मेरठ के कुछ मंडप जिन्होंने किराये पर लिये हैं उनके लिये किराया निकाल पाना मुश्किल हो गया है। वह उन्हें खाली करने की तैयारी कर रहे हैं।
मंडप और होटल से जुड़े लोग प्रभावित
मंडप और होटलों से कई तरह के कार्य करने वाले लोग जुड़े होते हैं। आज यह वर्ग पूरी तरह से प्रभावित हो चुका है और इस ओर कोई ध्यान देने वाला नहीं है अगर यही हालात रहे तो यह व्यवसाय बंदी के कगार पर पहुंच जायेगा। फूल डेकोरेशन, डीजे, लाइट, खाना बनाने वाले सभी का कार्य पूरी तरह बंद है। ऐसे लोगों को सरकार की ओर से कोई छूट आदि भी नहीं दी जाती है जिससे यह लोग सबसे अधिक प्रभावित होते हैं।

होटलों का हाल भी बेहाल, पड़ रही दोहरी मार
होटल और रेस्टोरेंट संचालक अभी तक पिछली बार की कोरोना की मार से उभर नहीं पाये थे कि अब फिर से कोरोना ने कहर बरसाना शुरू कर दिया है। संचालकों पर दोहरी मार पड़ रही है। शहर में बड़े-बड़े होटलों में अच्छे वेतन पर सेफ व अन्य स्टाफ को रखा जाता है, लेकिन आज के समय में कारोबार इस कदर प्रभावित हुआ है कि होटल संचालकों को उनका वेतन निकाल पाना तक मुश्किल हो रहा है।
ऊपर से विद्युत विभाग व अन्य विभाग की ओर से अतिरिक्त बिली व कर लगाकर भी उन्हें परेशान किया जा रहा है। एक साल से अधिक हो गया है कोरोना के कारण होटलों और रेस्टोरेंट में व्यवसाय पूर तरह से प्रभावित हुआ है ऐसे में प्रशासन और सरकार को सोचना होगा कि सभी करों में काई न कोई रियायत की जाये जिससे होटल और रेस्टोरेंट संचालक अपना व्यवसाय ठीक तरह से चला सकें।
होटल और मंडपों का धंधा पूरी तरह से चौपट हो चुका है। कोरोना के कारण कार्य पूरी तरह से प्रभावित हुआ है, लेकिन कोई इस बारे में सोचने वाला नहीं है। हमें स्वयं ही इससे लड़ना होगा। होटलों में सभी तरह के आयोजन बंद किये जा चुके हैं। पहले छोटे-छोटे आयोजन हो रहे थे, लेकिन वह भी अब बंद हो चुके हैं। होटलों को पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। फिलहाल हमें अपने कर्मचारियों की जान को बचाने के विषय में भी सोचना है इसलिये बंद करने का निर्णय लिया गया है।
-सुबोध गुप्ता, अध्यक्ष होटेलियर्स एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन
शहर में सैंकड़ों शादियां पिछले कुछ दिनों में ही कैंसिल हो गई। इससे हमारे व्यवसाय की कमर ही टूट गई। लोगों ने जो एडवांस दिया था वो भी वापस कर दिया गया है। आयोजन कैंसिल हो गये हैं कोरोना के कारण व्यापार पूरी तरह से बर्बाद हो गया है। छोटे टैंट व्यवसायी तो पूरी तरह से बर्बाद हो चुके हैं अब तो उनके सामने अपनी प्रॉपर्टी तक को बचाने का संकट खड़ा हो रहा है। ऐसे मे सरकार को चाहिए कि वह इस व्यवसाय के विषय में भी थोड़ा ध्यान दे।
-नवीन अग्रवाल, अध्यक्ष मेरठ टैंट एसोसिएशन
मेरठ में मंडप और होटलों से जुड़े व्यापार को कोरोना के कारण लगभग 300 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचा है। मंडपों और होटलों में होने वाले कार्यक्रम में कपड़ा व्यापारी, ज्वेलरी, हलवाई काफी संख्या में कार्य करने वाले लोग जुड़े होते हैं। आज कोरोना के कारण सभी आयोजन बंद हो गये हैं। अब जो लोगे आयोजन कर भी रहे हैं वह अपने घरों पर सीमित लोगों की संख्या में आयोजन कर रहे हैं। यहां मंडपों की स्थिति बेहद खराब है। अभी तक मई माह में ही 500 से अधिक आयोजन रद हो चुके हैं।
-विपुल सिंघल, महामंत्री मेरठ मंडप, होटेलियर्स एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन
कोरोना का कहर हमारे व्यवसाय पर पूरी तरह टूट रहा है। व्यापार पूरी तरह से बर्बाद हो चुका है। मंडप व होटलों से जुड़े सभी कार्य पूरी तरह से प्रभावित हुए हैं। पिछले एक साल में मंडप संचालकों ने कुछ नहीं कमाया है यहां तक कि मंडपों का खर्चा निकालना तक मुश्किल हो गया है। बिजली बिल व अन्य टैक्स लगाता आ रहे हैं, लेकिन कार्य बंद है। ऐसे में मंडप संचालकों व होटल संचालकों पर दोहरी मार पड़ रही है।
-मनोज गुप्ता, अध्यक्ष मेरठ मंडप एसोसिएशन





