- परेशान मरीज, प्राइवेट डाक्टर को दिखाने के पैसे नहीं, जैसे-तैसे काट रहे समय
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: गरीब लोगों के लिए जिला अस्पाल एवं मेडिकल में एक रुपये के पर्चे के माध्यम से मिलने वाली दवाइयां काफी कारागर होती है। क्योंकि महंगाई के दौर में इतना बजट होता नहीं कि वह प्राइवेट अस्पताल में जाकर डाक्टरों को दिखाएं। इसलिए वह सरकारी अस्पतालों में लम्बी लाइनों में लगकर पर्चा बनवाते हैं।
उस पर्चे के आधार पर डाक्टर को दिखाकर उसी पर्चे के माध्यम से अस्पताल से दवाई प्राप्त कर इस आस में घर चले जाते हैं कि वह अब सहीं हो जाएंगे। वहीं कोरोना संक्रमण ने एक और जहां गरीब लोगों को एक बार फिर से आर्थिंक तंगी की तरफ मोड दिया है।
वहीं, अगर घर में कोई बीमार भी हो जाएं तो उसके इलाज तक के लिए उस परिवार के पास पैसे नहीं होतें। क्योंकि वह घर में खाने का इंतजाम करे या फिर प्राइवेट डाक्टर की मोटी फीस एंव दवाइयों के पैसों का। जबकि पहले घर में कोई बीमार होता था तो सरकारी अस्पतालों में एक रुपए के पर्चे के माध्यम से ओपीडी में दिखा लेते थे।
ओपीडी बंद होने से गरीबों पर आया संकट
सरकार ने एहितायत बररते हुए सभी सरकारी अस्पतालों में ओपीडी को बंद कर दिया है। जिससे संक्रमण ना बढ़े। क्योंकि देखा जाता था कि सैक्डों की संख्या में लोग ओपीडी के माध्यम से ही दवाई प्राप्त करते थे। बढ़ते कोरोना संक्रमण को देखते हुए सरकार ने सरकारी अस्पतालों की ओपीडी को बंद करते हुए डाक्टरों की डयूटी कोविड-19 वार्ड में लगा दी है। लेकिन सरकार के इस फैसले से कही ना कही गरीब परिवारों के सामने काफी बड़ा संकट उत्पन्न हो गया है।
अगर घर में कोई बीमार हो जाएं तो उसे कहा दिखाएं। मेडिकल में बुलंदशहर से आंख बनवाने आएं अरुण ने बताया कि उसको आंख से बिल्कुल दिखाई नहीं देता। किसी ने उन्हें बताया कि वह मेडिकल जाकर अपनी आंख बनवा लें। वह इसलिए आएं कि यहां पर सस्ते में आंख बन जाएगी। मगर अब ओपीडी बंद है प्राइवेट अस्पताल में आंख बनावाने के लिए पैसे नहीं है तो वह आंख कैसे बनवाएं।
इसी तरह जिला अस्पताल में बुखार के लिए दवां लेनी आई फातिमा ने बताया कि उसकों दो दिन से बुखार है। इसलिए वह यहां पर दिखाने आई लेकिन ओपीडी बंद है। जिससे उन्हे काफी निराशा हुई। उन्होंने कहा कि गरीब लोगों इलाज मिल सकें इसलिए सरकार को ओपीडी चालू रखनी चाहिए। क्योंकि जब बढ़ती बीमारी को पहले ही काबू कर लिया जाएगा तो वह विकराल रुप धारण नहीं करेगी।

