- बढ़ती महंगाई में ट्रैक्टर से जुताई कराने का किराया देने में असमर्थ है किसान
जनवाणी संवाददाता |
दाहा: किसानों की आर्थिक स्थिति कमजोर होती जा रही है कि वह पाई-पाई को तरस गए है। बढ़ती महंगाई में व मजदूरों की मजदूरी या जुताइ कराने के लिए ट्रैक्टर किराया देने के लिए भी मजबूर हो गए है। जिसके चलते कस्बा के एक किसान ने बैलों की जगह पर कल्टीवेटर खींचने के लिए अपने दोनों बेटों को लगा दिया है, जो कल्टीवेटर को खींचकर गन्ने की फसल की जुताई कर रहे है। कभी बैलों के पीछे हल मिलता था और आज बेटों के पीछे हल मिल रहा है।
कस्बा टीकरी में किसान राजबीर सिंह अपने गन्ने के खेत की निराई कर रहा है। राजबीर सिंह का कहना है कि बढ़ती महंगाई के चलते घर मे बैल नही रख सकता है। डीजल के रेट बढ़ने से ट्रैक्टर का किराया देने में भी असमर्थ है। इसीलिए उन्होंने बैल की जगह अपने बेटों को मशीन को खींचने के लिए लगा दिया। जिस कार्य को दो बैल बड़ी आसानी से करते थे।
वही उसी कार्य को करने के लिए किसान के बेटों को ऐड़ी चोटी का जोर लगाना पड़ रहा है। इनके माथे से टपकता पसीना, इस बात की गवाही दे रहा है कि किसान को अपना परिवार चलाने के लिए कितनी मसक्कत करनी पड़ती है। इसके बावजूद किसानों की कोई सुनने वाला नहीं है। उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया है। वह जैसे-तैसे करके अपने परिवार को चला रहे है।
बिजली के बिल इतने महंगे हो गए है कि किसानों को उन्हें चुकाना मुश्किल हो रहा है। यदि विलंब हो जाता है तो किसानों के नलकूपों के कनेक्शन काट दिए जाते है, जिससे किसानों की फसलों को काफी नुकसान हो जाता है। किसानों को सरकार के साथ-साथ आवारा पशुओं की मार झेलनी पड़ती है।
आवारा पशु किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचाते है, जिसका दंड किसान को झेलना पड़ता है। किसान कितना मजबूर हो गया है कि जो बैल भीनहीं रख सकता है और ट्रैक्टर से जुताई कराने के लिए उसका किराया भी नहीं दे सकता है। किसान की दयनीय हालत पर देखकर सब पीछा फेर लेते है। महंगाई बढ़ने व भूमि जोत कम होने से किसानों की हालत दिन-प्रतिदिन पतली होती जा रही है।

