- पांच ट्रैक्टर-ट्रॉली सीज खनन अधिकारी को भेजी रिपोर्ट
जनवाणी संवाददाता |
मुंडाली: पुलिस की लाख कोशिशों के बावजूद खनन का अवैध कारोबार रुक नहीं रहा है। शनिवार देर रात एएसपी/सीओ किठौर ने मुंडाली पुलिस को साथ लेकर शफियाबाद लोटी के जंगल में अवैध खनन करते पांच ट्रैक्टर-ट्रॉली पकड़ लिए। जिन्हें थाने ले जाकर सीज कर दिया। पुलिस को देख चालक मौके से फरार हो गए। एसओ ने खनन अधिकारी को रिपोर्ट भेज दी है।
एएसपी/सीओ किठौर चंद्रकांत मीणा को कई दिनों से मुंडाली थाना क्षेत्र में अवैध खनन की शिकायतें मिल रहीं थीं। इस क्रम में शनिवार देर रात उन्हें सूचना मिली कि शफियाबाद लोटी के जंगल में थाना और लोटी चौकी पुलिस की सेटिंग से बड़े पैमाने पर खनन का अवैध कारोबार चल रहा है।
जिस पर एएसपी ने मुंडाली पुलिस को साथ लेकर अवैध खनन के धंधेबाजों की घेराबंदी कर दी। पुलिस को देख चालक मिट्टी लदे ट्रैक्टर-ट्रॉली छोड़ फरार हो गए। जिन्हें पुलिस थाने ले गई।
पकड़े गए ट्रैक्टरों में दो महिंद्रा इमरान पुत्र मतलूब व इस्तेकार पुत्र अफजाल तीन आयशर नाजिम पुत्र नूर मोहम्मद, शादान पुत्र आकिल और मोहसिन पुत्र शौकीन निवासी अजराड़ा के बताए गए हैं। पुलिस ने पांचों ट्रैक्टर-ट्रॉली सीज कर जिला खनन अधिकारी को रिपोर्ट भेज दी है।
रात में ही चलता है खनन का काला कारोबार
खास बात यह है कि खनन का काला कारोबार अक्सर रात में ही चलता है। खनन माफिया से जुड़े सूत्रों का कहना है कि यह कारोबार पुलिस की सेटिंग के बिना नहीं होता। पुलिस सेटिंग में यह बात तय होती है कि खनन रात में 11-12 बजे से शुरू और सुबह पांच बजे से पूर्व बंद हो जाना है। इसलिए खनन माफिया रात्री में ही खनन करते हैं।
बताया कि मुंडाली में भी सेटिंग का ही खनन होता है। इस बाबत एसओ मुंडाली सुभाष सिंह से बात करने का प्रयास किया गया तो उनका फोन रिसीव नहीं हुआ। मुंडाली में खनन का अवैध कारोबार नई बात नहीं। यहां पहले से ही बढ़ला, कुढला, आड़, कोल, समयपुर, सिसौली में अवैध खनन होता रहा है।
यहां से मिट्टी मेरठ शहर तक पहुंचाई जाती है। इसके अलावा अजराड़ा, लोटी, अटौला भी इससे अछूते नहींं यहां से भी काफी दूर तक मिट्टी पहुंचाई जाती है।
अवैध खनन का गढ़ है मुंडाली
मुंडाली में खनन का अवैध कारोबार नई बात नहीं। यहां पहले से ही बढ़ला, कुढ़ला, आड़, कोल, समयपुर, सिसौली में अवैध खनन होता रहा है। यहां से मिट्टी मेरठ शहर तक पहुंचाई जाती है। इसके अलावा अजराड़ा, लोटी, अटौला भी इससे अछूते नहींं यहां से भी काफी दूर तक मिट्टी पहुंचाई जाती है।

