Saturday, March 21, 2026
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दावे बड़े, सुविधा कमतर

  • जिला अस्पताल में चिकित्सक-पैरामेडिकल स्टाफ की बड़ी किल्लत
  • डफरिन में तैनात डाक्टर के भरोसे चल रहा रेडियोलॉजी विभाग
  • हृदय रोग विभाग में नहीं डाक्टर, मेडिसिन के तीन पद भी खाली

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: जनता को राहत देने के सरकार के दावे बड़े हैं, मगर जिला अस्पताल में मूल सुविधाओं का ही अभाव है। यह हाल तब है, जब शहर की आबादी का एक बड़ा भाग चिकित्सा के लिए इसी अस्पताल पर निर्भर है। इसके बावजूद सरकार का यहां बेहतर चिकित्सा सुविधाएं नागरिकों को मुहैया कराने की ओर ध्यान नहीं है। डाक्टर से लेकर पैरामेडिकल स्टॉफ तक की बड़ी समस्या से प्यारेलाल शर्मा जिला चिकित्सालय जूझ रहा है। हाल यह है कि विभागों में मरीजों को देखने वाले डाक्टर तक मयस्सर नहीं हो पा रहे हैं।

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वर्तमान में पीएल शर्मा जिला अस्पताल की हालात यह है कि डाक्टरों के पचास फीसदी से अधिक पद खाली पड़े हुए हैं। यहां विभागों के हिसाब से चिकित्सकों के 58 पद सृजित हैं, मगर फिलहाल 28 डाक्टरों की तैनाती ही अस्पताल में है। सालों से खाली पड़े 30 पदों को अभी डाक्टरों की तैनाती का इंतजार है। बड़ी बात यह है कि यह सभी खाली पद जिला अस्पातल के मुख्य विभागों के हैं। इनमें प्रमुख रुप से मेडिसिन, रेडियोलॉजी, हड्डी रोग, हृदय रोग आदि विभाग शामिल हैं। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक जिला अस्पताल के महत्वपूर्ण विभागों में डाक्टरों से लेकर पैरामेडिकल स्टॉफ तक की भारी कमी है।

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अलग-अलग विभागों में डाक्टरों की बात करें तो अकेले मेडिसिन विभाग में चार पद चिकित्सकों के हैं, जिनमें से एक पर डाक्टर की तैनाती है और बाकी तीन पदों पर डाक्टरों के आने का इंतजार जिला अस्पताल सालों से कर रहा है। इसी तरह हड्डी रोग विभाग की हालत है। इस विभाग में तीन पद हैं, मगर वर्तमान में एक पद पर ही चिकित्सक तैनात हैं। रेडियोलॉजी विभाग का तो हाल दूसरे विभागों से अधिक खराब है। इस विभाग की व्यवस्था महिला जिला चिकित्साल पर तैनात चिकित्सक के भरोसे चल रही है।

इस विभाग में सृजित चिकित्सक के दोनों ही पद खाली हैं। इतना ही नहीं कोरोना महामारी के समय में भी हृदय रोग विभाग में डाक्टर की तैनाती नहीं हो सकी है। इस विभाग में एक पद चिकित्सक का है, मगर वह भी खाली ही चल रहा है। अन्य विभागों का हाल भी कुछ ऐसा ही है।

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जिला अस्पताल में डॉक्टरों के साथ ही पैरा मेडिकल स्टॉफ के कम होने की समस्या भी बड़ी है। यहां स्टॉफ की किल्लत के चलते ही कभी भी तीमारदारों द्वारा अपने मरीजों को स्ट्रेचर पर खींचते देखा जा सकता है। इतना ही नहीं अपने मरीजों की देखभाल का पूरा जिम्मा अस्पताल परिसर में तीमारदारों के कंधों पर ही रहता है। आपातकालीन सेवाओं तक में पैरामेडिकल स्टॉफ की सक्रियता दिखाई नहीं पड़ती है, मगर सरकारी दावे इन सभी समस्याओं के उलट हैं। स्वास्थ्य विभाग से सरकार तक की रिपोर्ट में जिला अस्पताल का मौसम गुलाबी है।

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वहीं, इस संबंध में चिकित्सा अधीक्षक डा. कौशलेंद्र सिंह राणा का कहना है कि जिला अस्पताल में डाक्टर और स्टॉफ की कमी है, मगर यहां की व्यवस्थाओं को जनता के लिए बेहतर करने के प्रयास जारी हैं। चिकित्सकों के कम होने की समस्या के संबंध में शासन स्तर पर लगातार पत्राचार किया जा रहा है। हाल ही में दो डाक्टरों की तैनाती हुई है। संभावना है कि यहां की व्यवस्था के हिसाब से शीघ्र ही और चिकित्सकों को भेजा जा सकता है।

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