- साइबर क्राइम थाना पुलिस ने राजस्थान के सीकर में दबिश देकर आरोपी को किया गिरफ्तार
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: मानव अंगों की तस्करी और मनी लॉंड्रिंग मामले में पांच दिन तक डिजिटल अरेस्ट कर पूर्व सीडीए (रक्षा लेखा नियंत्रक) कर्मी से 15 लाख रुपये ठगने वाले गैंग के एक सदस्य को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। पकड़े गए आरोपी के खाते में ठगी की रकम ट्रांसफर की गई थी। आरोपी का कहना है कि उसके दोस्तों के कहने पर उसने अपने बैंक खाते में ठगी की रकम मंगाई थी। जिसकी एवज में उसे कमिशन के एक लाख रुपये भी मिले थे।
शास्त्री नगर निवासी 78 वर्षीय बुजुर्ग सुखमान चंद्र जैन रक्षा लेखा नियंत्रक कार्यालय से रिटायर्ड कर्मचारी है। जिन्होंने 13 नवंबर को साइबर क्राइम थाने में दर्ज कराई एफआईआर में बताया कि साइबर अपराधियों ने आठ से 12 नवंबर तक डिजिटल अरेस्ट करके उनसे 15 लाख रुपये ठग लिए। उनके नंबर पर एक अंजान नंबर से कॉल आई थी, जिसमें कॉलर ने खुद को कस्टमर केयर एसोसिएट राजेश कुमार बताया था। जिसने कहा कि मानव अंगों की तस्करी करने वाले अंतर्राष्ट्रीय गिरोह ने 17 बच्चों का अपहरण कर उनकी हत्या कर दी है। उनके अंगों को विदेशों में करोड़ों रुपये में बेच दिया गया है।
बच्चों के परिजनों को शव सौंपने की एवज में 68 लाख रुपये की फिरौती वसूली गई है। यह रकम आपके एचडीएफसी बैंक खाते में जमा कराई गई है। मानव अंगों की तस्करी और मनी लॉंड्रिंग मामले में खिलाफ मुकदमा दर्ज है। जिससे डरकर उन्होंने आरोपियों के बताए खाते में 15 लाख रुपये ट्रांसफर किए थे। साइबर क्राइम थाना पुलिस ने बताया कि इस मामले में पुलिस की एक टीम ने राजस्थान के सीकर जिले में दबिश दी, यहां से वार्ड 18 में रहने वाले लेखराज (22) को गिरफ्तार किया। जिसके खाते में ठगी की यह रकम ट्रांसफर हुई थी।
आरोपी ने पूछताछ में बताया कि वह अपने दोस्त महावीर रुलानिया के साथ चाय की दुकान पर बैठा था। तभी महावीर ने कहा कि उसका दोस्त रमेश ओला भी आ रहा है। कुछ देर बाद रमेश आया और उसने कहा कि हम लोग आॅनलाइन फ्रॉड करके पैसे कमाते है। अभी उसका अकाउंट काम नहीं कर रहा है ऐसे में वह अपना अकाउंट नंबर दे। आरोपी ने बताया कि वह रमेश की बात सुनकर लालच में आ गया और उसने अपनी चेक बुक एटीएम और बैंक खाते की पासबुक रमेश और महावीर को लाकर दे दी। इसके बाद उसके खाते में करीब 23 लाख रुपए आए और उसने चेक के माध्यम से पहले 3.20 लाख रुपए निकालकर दिए।
इसके बाद 5 लाख रुपए दिए। इसके बाद रमेश ने आईएमपीएस के माध्यम से किसी भगवान सहाय के खाते में 10 लाख रुपए ट्रांसफर कराए। भगवान सहाय के खाते से अन्नू कुमारी के खाते में 8 लाख 5 हजार रुपए ट्रांसफर किए। बाद में रमेश नहीं इन सभी के खाते से पैसे निकाल लिए। पकड़े गए आरोपी ने बताया कि इसकी एवज में उसे एक लाख रुपये कमीशन के मिल गए, जिन्हें खर्च भी कर दिया।
गोल्डन एवेन्यू के डकैती प्रकरण में 10 हजार का इनामी दबोचा
मवाना: थाना पुलिस ने बीते 27 सितंबर को नगर के मेरठ रोड स्थित गोल्डन एवेन्यू कॉलोनी में डकैती की घटना को अंजाम देने वाले सालारपुर जलालपुर थाना गंगानगर निवासी मास्टरमाइंड 10 हजार के इनामी गौरव उर्फ भोला पुत्र मामचंद आखिर पुलिस की हत्थे चढ़ गया। बुधवार को थाना पुलिस ने चेकिंग के दौरान गांव राफन के समीप अभियुक्त को दबोच लिया और अभियुक्त की निशानदेही पर एलसीडी, डीवीआर, 315 बोर तमंचा एवं एक जिंदा कारतूस बरामद किए।
बता दे कि सूबे के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी के अपराध को जीरो टॉलरेंस लाने की मुहिम के चलते कप्तान डा. विपिन ताडा के निर्देश पर बीते 27 सितंबर को नगर के मेरठ रोड स्थित गोल्डन एवेन्यू कॉलोनी में गार्ड को गन पॉइंट पर लेकर बदमाशों ने डकैती की घटना को अंजाम देने वाले अभियुक्त को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। जिसमें मुठभेड़ के दौरान एक बदमाश गोली लगने से घायल हो गया था। इसके बाद पुलिस क्षेत्र अधिकारी डा. राकेश मिश्रा ने प्रेस कांफ्रेंस करते हुए घटना का खुलासा किया एवं तीनों अभियुक्तों को जेल भेजा गया था तथा अन्य फरार आरोपियों की तलाश की जा रही थी। घटना में शामिल अन्य आरोपी कुंदन व दीपांशु न्यायालय के समक्ष आत्मसमर्पण किया था।
इसके बाद थाना पुलिस ने अभियुक्त कुंदन व दीपांशु को पीसीआर पर लेकर पूछताछ के बाद डकैती का माल बरामद करते हुए न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया था तथा एसएसपी डा. विपिन ताडा ने फरार अभियुक्त पर दस हजार का इनाम घोषित कर दिया था। इसके चलते घटना को अंजाम देने वाले मास्टरमाइंड गौरव उर्फ भोला पुत्र मनचंद को पुलिस लगातार तलाश कर रही थी। बुधवार को चेकिंग के दौरान अभियुक्त को नगर के मेरठ रोड गांव राफन के समीप दबोच कर थाने लाकर पूछताछ की तथा अभी उसकी निशानदेही पर डकैती में गया सामान बरामद करते हुए संबंधित धाराओं में कार्रवाई की गई है।

