Wednesday, March 18, 2026
- Advertisement -

सामाजिक राजनीति का मील का पत्थर

सामाजिक न्याय आंदोलन के महानायक पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय विश्वनाथ प्रताप सिंह भारतीय सामाजिक राजनीति का वह मील का पत्थर हंै, जिसके एक फैसले से भारतीय राजनीति और समाज एकाएक बदल गए और चार दशक बाद भी चुनावी राजनीति इसी फैसले के इर्द-गिर्द बुनी-चुनी जा रही है। देश के मुख्य दल चाहते ना चाहते आज जातिगत जनगणना की वकालत ही नहीं कर रहे हैं बल्कि और बढ़ बढ़ कर इसका श्रेय लेने की होड़ में है। शेर का भाई बघेरा एक कूदे दस दूसरा कूदे तेरह। इन सभी दलों ने मंडल कमीशन लागू करने के वीपी सिंह के फैसले का विरोध भले दुबे छिपे स्वरूप में किया हो, पर वीपी सिंह को कोसा पानी पी-पी कर हमेशा खुलकर है। कुछ ने तो वीपी सिंह से इसका श्रेय छीनने के लिए ईर्ष्यावश और कुछ ने अपने हुए राजनीतिक नुकसान के कारण गुस्से में कोसा। नजरअंदाज कोई कर नहीं पाया, पर उनकी विरासत को दफनाने की कोशिश हर किसी ने की, एक आध अपवाद को छोड़कर।

आज जातिगत जनगणना को सामाजिक न्याय से जोड़कर बात करना फैशन में है, पर वीपी सिंह को श्रेय देना नहीं। तब उनके इस क्रांतिकारी फैसले को चुनावी हथकंडे से ज्यादा ना देख पा रहे लोग खासकर विरोधी सामाजिक न्याय के बहुआयामी स्वरूप से आज परिचित हो रहे हैं। रुपए पैसे के व्यक्तिगत भ्रष्टाचार के आरोप तो वीपी सिंह पर उनका घोर शत्रु भी नहीं चिपका पाया, पर मंडल कमीशन लागू करने के उनके फैसले से जातिवादी उन्माद बढ़ाने का दोष उन पर हर तरफ से मढ़ा गया। लाभार्थी जातियों के नेताओं ने सामाजिक न्याय के आंदोलन के संघर्ष में आहुति के नाम पर जहां खूब चांदी काटी, वहीं वीपी सिंह इस हवन की आहुति खुद बने।

जहां जातियों के स्तर पर लाभार्थी जातियों ने अपनी-अपनी जाति के सजातीय नेताओं को देवता बनाकर पूजा और सत्ता में पहुंचाया वहीं वीपी सिंह को भुला दिया। इस फैसले के विरोध में लामबंद हुई जातियों की नजर में वीपी सिंह नाकाबिले माफी अपराधी बन गए और उनका यह क्रांतिकारी कदम माथे पर तिलक की तरह नहीं, बल्कि कालिख की तरह पेश किया गया।
इस फैसले के बाद सामाजिक विभाजन व जातिगत उन्माद बढ़ा, पर वंचित पिछड़ा के कुछ वर्गों को लाभ भी निश्चित तौर पर हुआ। इन जातियों में भी जब एक अगडा स्वर्ण वर्ग खड़ा हो गया, जो आज अपने सजातियों के इन प्रावधानों का लाभ लेने में अवरोध भी बना तो खुद वीपी सिंह ने ही सामाजिक न्याय के इस हवन के एंप्लॉयमेंट एक्सचेंज और वोट के औजार में बदलने पर चिंता व्यक्त की। अब तो बात न्यायपूर्ण सहभागिता और प्रतिनिधित्व की नहीं, जाति धर्म की जनसंख्या के आधार पर अवसरों के बंटवारे की हो रही है।

वीपी सिंह का अवदान, योगदान, बलिदान सार्वजनिक है। लोगों ने उन पर महत्वाकांक्षी होने का आरोप लगाया। वह अपने दल की कृपा से एकाएक मुख्यमंत्री बने और एक दशक में ही अपने दम पर प्रधानमंत्री भी। वो ऐसी उपलब्धि वाले विरले राजनीतिज्ञ तो हैं, जैसा उन्होंने खुद कहा कि ‘वह प्रधानमंत्री कैसे बने महत्वपूर्ण नहीं, महत्वपूर्ण यह है कि उन्होंने अपने छोटे से कार्यकाल में क्या किया?’ उनकी कविता की एक पंक्ति में कहा जाए तो, ‘उसने जिंदगी गंवा दी, वक्त नहीं गंवाया।’

उन्होंने सार्वजनिक जीवन में कई बड़ी लड़ाइयां लड़ीं। बतौर मुख्यमंत्री उनके खाते में कई ऐतिहासिक सफलताएं दर्ज हुई। उनके उठाए सख्त कदमों ने डकैतों से त्रस्त जनता और हकमारी व घटतौली से परेशान किसान का दिल जीत लिया। मध्यम वर्ग और अधिकारियों में अपनी गहरी छाप छोड़ी। इंदिरा की बिना अनुमति अपनी सार्वजनिक प्रतिज्ञा निभाते हुए मुख्यमंत्री पद से उनके इस्तीफे ने राजनीतिक हल्कों में भी उनकी धाक कायम की। उनकी प्रशासनिक क्षमता, पद त्याग, वचन का धनी होना, स्वच्छ छवि, कठोर निर्णय व परिस्थितियों ने एक दशक में ही जनता में यह नारा आम कर दिया, ‘राजा नहीं फकीर है, देश की तकदीर है।’ वह देश की सबसे बड़ी भीड़ व वोट जुटाऊ शख्सियत बन चुके थे। राष्ट्र स्तर पर उस वक्त के दिग्गज नेताओं के जमवाडे के बावजूद कांग्रेस से निकलने के बाद वह विपक्ष की आशा का केंद्र थे।

इन विरोधाभासी समूहों और अंतर विरोधों का संतुलन साधना आसान नहीं था। उनकी सर्वोच्च पद की दावेदारी को विपक्ष के पुराने धुरंधर नेताओं को पचाना आसान नहीं था। कांग्रेस के तो वह कुल द्रोही थे। उस वक्त अलग-अलग पड़ी भाजपा इन्हीं के बहाने सत्ता की मुख्य धारा में घुसना चाहती थी। मंडल के दांव ने कमंडल को विचलित किया तो सत्ता असंतुलन होना ही था और हुआ भी। प्रधानमंत्री पद चला गया। एक बड़ी लड़ाई उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ भी लड़ी। जहां बड़े-बड़े पक्ष-विपक्ष के नेता आज भी पूंजीपतियों के चरणों में सत्ताधारी नत मस्तक होते हैं, वहीं वीपी सिंह के नाम से ही भ्रष्टाचारियों की आत्मा कांप जाती थी।

janwani address 211
spot_imgspot_img

Subscribe

Related articles

Saharanpur News: पुलिस मुठभेड़ में लूट के आरोपी दो बदमाश घायल अवस्था में गिरफ्तार

जनवाणी संवाददाता । सहारनपुर: जनपद में अपराधियों के खिलाफ चलाए...

Saharanpur News: सहारनपुर में बदलेगा मौसम, आंधी-बारिश और ओलावृष्टि की चेतावनी

जनवाणी संवाददाता । सहारनपुर: जनपद में मौसम का मिजाज बदलने...

Iran- Israel: इस्राइली हमले में ईरान को बड़ा झटका, लारीजानी और सुलेमानी की मौत

जनवाणी ब्यूरो । नई दिल्ली: ईरान ने मंगलवार देर रात...

Fire In Indore: इंदौर में दर्दनाक हादसा, घर में लगी भीषण आग, सात लोगों की जलकर मौत

जनवाणी ब्यूरो। नई दिल्ली: इंदौर के ब्रजेश्वरी एनेक्स इलाके में...
spot_imgspot_img