जनवाणी संवाददाता |
सहारनपुर: हर साल 29 अक्टूबर को पूरी दुनिया में वर्ल्ड स्ट्रोक डे मनाया जाता है, ताकि लोगों को स्ट्रोक यानी पैरालाइसिस या लकवा जैसी गंभीर बीमारी के बारे में जागरूक किया जा सके। डॉ. संजीव मिगलानी, एम.डी. (मेडिसिन) गोल्ड मेडलिस्ट के अनुसार, स्ट्रोक तब होता है जब मस्तिष्क की रक्त आपूर्ति अचानक रुक जाती है, जिससे दिमाग की नसें या तो बंद हो जाती हैं या ब्रेन हेमरेज हो जाता है। इससे शरीर के एक हिस्से में लकवा मार सकता है।
विश्व स्तर पर हर साल करीब 1.2 अरब लोग स्ट्रोक से प्रभावित होते हैं, जबकि भारत में लगभग 18 लाख लोग हर वर्ष स्ट्रोक का शिकार बनते हैं। यह मृत्यु का दूसरा सबसे बड़ा कारण है। आंकड़ों के मुताबिक, भारत में हर साल करीब 6.5 लाख लोगों की मौत स्ट्रोक से होती है, और हर छह में से एक व्यक्ति को जीवन में कभी न कभी पैरालाइसिस का सामना करना पड़ता है।स्ट्रोक के मुख्य कारणों में हाई ब्लड प्रेशर (हाई बी.पी.), डायबिटीज़, हाई कोलेस्ट्रॉल, धूम्रपान, हार्ट की बीमारी और फैमिली हिस्ट्री प्रमुख हैं। डॉ. मिगलानी का कहना है कि इनमें से हाई बी.पी. सबसे बड़ा जोखिम कारक है, जिसे नियंत्रित रखना अत्यंत जरूरी है।
स्ट्रोक के शुरुआती लक्षणों में शरीर के एक हिस्से में अचानक कमजोरी या सुन्नपन आना, बोलने या समझने में परेशानी, चलने में लड़खड़ाना, आंखों से धुंधला या दोहरा दिखाई देना, जुबान का लटकना, चेहरा टेढ़ा होना और हाथ-पैरों में झनझनाहट जैसे संकेत शामिल हैं। ऐसे किसी भी लक्षण को नजरअंदाज न करें, तुरंत डॉक्टर या अस्पताल पहुँचना चाहिए, क्योंकि हर मिनट मायने रखता है।डॉ. मिगलानी बताते हैं कि सही खानपान स्ट्रोक के मरीजों के लिए बहुत जरूरी है। हरी सब्जियाँ, साबुत अनाज, दालें और ताजे फल अधिक मात्रा में लें, हफ्ते में दो बार मछली खाएँ। वहीं जंक फूड, बर्गर, पिज़्ज़ा, मोमोज, चाऊमीन और मीट जैसे हाई कोलेस्ट्रॉल वाले भोजन से दूरी बनाना बेहद आवश्यक है।स्ट्रोक से बचाव के लिए ब्लड प्रेशर और शुगर को नियंत्रित रखें, वजन कम करें, रोजाना आधा घंटा टहलें, धूम्रपान और शराब का सेवन न करें, तथा तनाव से बचें। स्वस्थ जीवनशैली अपनाने से इस घातक बीमारी से काफी हद तक बचाव संभव है।
“Every Minute Counts”,
इस वर्ष वर्ल्ड स्ट्रोक डे 2025 की थीम है — “Every Minute Counts”, यानी हर मिनट महत्वपूर्ण है। इसका अर्थ है कि स्ट्रोक के लक्षणों को जल्द पहचानना और तुरंत इलाज शुरू करना ही जीवन बचाने की कुंजी है।डॉ. संजीव मिगलानी का कहना है कि स्ट्रोक से बचने का सबसे सरल उपाय है—अपने ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल पर नियंत्रण रखना, नियमित जांच कराना और स्वास्थ्यप्रद जीवनशैली अपनाना। याद रखें, स्ट्रोक का समय पर इलाज न केवल जीवन बचा सकता है, बल्कि अपंगता से भी बचा सकता है।

