Wednesday, March 18, 2026
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हादसे ले रहे बेकसूरों की जान

  • ठोस पहल न होने से लगातार बढ़ते जा रहे हादसे
  • रोज सड़क दुर्घटना में जा रही लोगों की जान

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: लगातार हो रहे सड़क हादसों से जिले की सड़कें लाल हो रही हैं। ऐसा कोई दिन नहीं गुजरता कि सड़क हादसे में किसी की मौत न हो। सड़क दुर्घटनाओं में प्रतिवर्ष सैकड़ों लोगों की जान जाने के बावजूद पुलिस, प्रशासन व संबंधित विभागों द्वारा इस पर रोक लगाने के लिए कोई ठोस पहल नहीं की जा रही। कुछ कदम उठाए जाते हैं, लेकिन वह कारगर साबित नहीं होते, जिसका खामियाजा वाहन चालकों को भुगतना पड़ता है।

चालकों की जरा सी लापरवाही ने कइयों की जिंदगी लील ली और परिजनों को जीवनभर का दर्द दे दिया। तेज गति, लापरवाही और शराब के नशे में वाहन चलाने के कारण सैकड़ों लोग मौत का ग्रास बन चुके हैं। चालकों की जरा सी लापरवाही से अंदाजा लगाया जा सकता है कि लोग काल के गाल में समा चुके हैं। सड़क दुर्घटना में लगातार हो रही मौतों के लिए सरकारी व्यवस्था तो जिम्मेदार है ही, साथ ही वाहन चालक भी कम दोषी नहीं हैं। लोग यातायात नियमों का उल्लंघन करना शान समझते हैं।

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यही कारण है कि वह दुर्घटना का शिकार होते हैं और जान से हाथ धो देते हैं। इसके चलते जिले में दुर्घटनाओं का ग्राफ बढ़ता जा रहा है। जिले में ऐसा कोई दिन नहीं गुजरता जिस दिन किसी मां की गोद सूनी न होती हो या किसी बच्चे के सिर से पिता का साया न छिनता हो, किसी पत्नी की मांग का सिंदूर न उजड़ता हो। विडंबना है कि इसके बाद भी लोग सबक लेने को तैयार नहीं हैं।

नियमों के पालन से हो सकता है बचाव

सड़क हादसों का एक बड़ा कारण चालकों द्वारा यातायात नियमों का उल्लंघन करना भी है। इससे अधिक सड़क हादसे होते हैं। इसके चलते चालक स्वयं की जान तो खतरे में डालता ही है दूसरे व्यक्ति के लिए भी खतरा बनता है। नियमों का पालन किया जाए तो सड़क हादसों में कमी आने के साथ मरने वालों की संख्या भी कम हो सकती है।

बार-बार दुर्घटनाओं के ये भी कारण

बार-बार दुर्घटनाएं घटित होने के पीछे सड़क पर धीमी गति के ब्रेकर नहीं होने, मोड पर ब्रेकर नहीं होने, सड़क के दोनों तरफ आबादी होने, अचानक पशुओं का आगे आ जाना, सड़कों का खराब होना, चेतावनी बोर्ड नहीं लगाना घटना घटित होने का कारण माना गया है।

हादसे का शिकार सबसे ज्यादा युवा पीढ़ी

पुलिस के आंकड़ों के अनुसार हादसों का शिकार होने वालों में ज्यादातर युवा हैं। मृतक व घायल 18 से 40 वर्ष के बीच के हैं। युवाओं को विशेष तौर पर यातायात के बारे में समझाया जाएगा। ताकि हादसों पर अंकुश लगे।

नियमों के पालन से हो सकता है बचाव

सड़क हादसों का एक बड़ा कारण चालकों द्वारा यातायात नियमों का उल्लंघन करना भी है। इससे अधिक सड़क हादसे होते हैं। चालक स्वयं की जान तो खतरे में डालता ही है दूसरे व्यक्ति के लिए भी खतरा बनता है। यदि सभी के द्वारा नियमों का पालन किया जाए तो सड़क हादसों में कमी आने के साथ मरने वालों की संख्या भी कम हो सकती है।

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