- डीएम और एसएसपी से दो दिन में दस्तावेज और कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: विक्टोरिया पार्क अग्नि कांड में मुआवजे का निर्धारण के लिए सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देश पर हाईकोर्ट ने एडीजे हर्ष अग्रवाल को इस कार्य के लिए नियुक्त किया है। एडीजी हर्ष अग्रवाल ने सोमवार को एसएसपी व जिलाधिकारी मेरठ को पत्र लिखकर इस मामले से संबंधित अब तक की समस्त कार्रवाई, साक्ष्य, प्रपत्र व सभी दस्तावेज आदि 2 दिन के अंदर उपलब्ध कराने के लिए लिखा है ताकि मुआवजा निर्धारण की कार्रवाई त्वरित हो सके। माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश अनुसार मुआवजा निर्धारण मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल की तर्ज पर किया जाना है। जिसमें मृतक अथवा घायल की इनकम आयु आदि का ध्यान रखते हुए निर्धारण किया जाना है।
बात 13 साल पहले की है। दिन 10 अप्रैल 2006। मेरठ के विक्टोरिया पार्क में लगा कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स का भव्य मेला सफलतापूर्वक खत्म हो रहा था और सभी लोग स्टॉल्स से लोग अपना सामान समेटना शुरू कर चुके थे। तीन दिन तक लगे इस मेले में बहुत भीड़ रही थी। मेले की सफलता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता था कि अप्रैल की गर्मी में, मेले के समापन के 15 मिनट पहले भी वहां करीब 3000 लोग एकत्र थे तभी उठी एक चिंगारी ने मंजर को भयावह बना दिया।
पल भर में सिर्फ शरीर से गिरती खालें और चीख पुकार ही सुनाई दे रही थी। जो आग में लिपटे बाहर भाग आए थे, वह खुद को बचाने के लिए जमीन पर गिर गए, कुछ गोबर में घुस गए। कोई शरीर पर आग की लपटें लिए कराहते हुए बस रेत और मिट्टी ढूंढने के लिए दौड़ रहा था। मेला परिसर के बाहर मौजूद लोग भी मदद करने का प्रयास कर रहे थे लेकिन मौतों के आंकड़ों को कोई नहीं रोक पा रहा था।
शॉर्ट सर्किट या फिर कुछ और कारण से उठी चिंगारी लोहे के फ्रेम पर प्लास्टिक की चादरों पर ऐसे गिरी कि चंद सेकंड में पंडाल के अंदर हाहाकार मच गया। प्लास्टिक का पंडाल उपर से पिघलता गया। भगदड़ मच गई। सब मेन गेट की ओर भागते गए। काफी लोग अंदर रह गए। अंदर से लोग आग की लपटें लिए आ रहे थे। आसपास के लोग भी तब तक यहां पहुंच गए थे, जिससे जो मदद हो सकती थी उसने की।
घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन सभी अस्पतालों में बर्न चिकित्सा की व्यवस्था नहीं थी। इस हादसे में 64 लोगों की मौत हुई, जबकि 161 लोग घायल हुए, जिनमें से 81 गंभीर रूप से घायल थे। बाद में एक की मौत और होने से मरने वालों की संख्या 65 पहुंच गई। इस प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर न्यायिक आयोग पूर्व जस्टिस एसबी सिन्हा की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जा चुकी है।
तमाम गवाहों और लंबी जांच के बाद इसका निष्कर्ष सामने आया। आयोग ने इस मेले के आयोजकों को घटना के लिए साठ प्रतिशत और सरकारी तंत्र को चालीस प्रतिशत दोषी माना। लेकिन पीड़ित लोगों का कहना है कि उन्हें इंसाफ नहीं मिला। पीड़ित पक्ष ने मृतकों के परिजनों के लिए 20-20 लाख रुपये मुआवजे की मांग की थी। अब तक पीड़ित पक्ष को राज्य सरकार की तरफ से सात-सात लाख रुपये मुआवजा मिल चुका है।

