जनवाणी ब्यूरो |
यूपी: श्री बांकेबिहारी मंदिर के तोषखाने (खजाने) को 54 वर्षों बाद आखिरकार शनिवार को धनतेरस के पावन अवसर पर खोला गया। श्रद्धालुओं और मंदिर से जुड़े लोगों को उम्मीद थी कि खजाने से हीरे-जवाहरात, बेशकीमती आभूषण या ऐतिहासिक धरोहरें निकलेंगी, लेकिन अंदर से निकले सिर्फ पीतल के बर्तन, पुराने संदूक और आभूषणों के खाली बॉक्स।
इस “खाली खजाने” को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आ गई है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस पर सरकार को आड़े हाथों लिया और सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए लिखा “भाजपा सरकार से करबद्ध आग्रह… कम-से-कम मंदिरों के खजाने तो छोड़ दे… इतना भी लालच अच्छा नहीं। दुर्भाग्यपूर्ण!”
क्या है तोषखाना का मामला?
श्री बांकेबिहारी मंदिर का तोषखाना पिछले 54 वर्षों से बंद था।
मंदिर की हाई पावर्ड कमेटी ने हाल ही में हुई अपनी पहली बैठक में इसे खोलने का निर्णय लिया था।
चूंकि इस पर कोर्ट की सील लगी थी, जिला प्रशासन ने सिविल जज जूनियर डिवीजन को प्रार्थना पत्र दिया, जिसके बाद 18 अक्टूबर को खजाना खोलने की तिथि नियत हुई।
खजाने में क्या मिला?
पीतल के बर्तन
पुराने संदूक
आभूषणों के खाली बॉक्स
कोई भी बेशकीमती धरोहर या गहना नहीं मिला
दिल्ली से आए चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) ने अफसरों की निगरानी में खजाने में मौजूद सामग्री की सूची तैयार की। जिलाधिकारी सीपी सिंह के मुताबिक, अब भी एक कमरा बाकी है जिसे रविवार को खोला जाएगा।
सेवायतों ने जताया विरोध
जब खजाने से कोई मूल्यवान वस्तु नहीं मिली, तो मंदिर के सेवायतों और स्थानीय लोगों ने हंगामा और नारेबाजी शुरू कर दी। उनका कहना था कि खजाने में कीमती चीज़ें होनी चाहिए थीं, जो अब गायब हैं। इस विवाद के बाद खजाने को फिर से सील कर दिया गया।
राजनीतिक बयानबाज़ी शुरू
अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया इस मामले को और भी राजनीतिक रंग दे गई है। उन्होंने ‘लालच’ और मंदिरों के खजानों में हस्तक्षेप को लेकर भाजपा सरकार को घेरा। उनके बयान को लेकर सोशल मीडिया पर भी मिश्रित प्रतिक्रियाएं आ रही हैं।
आगे क्या होगा?
खजाने का एक कमरा अभी बाकी है, जिसे रविवार को खोला जाएगा।
प्रशासन और मंदिर कमेटी की निगरानी में अगला निरीक्षण किया जाएगा।
इस पूरे मामले की प्रेस रिपोर्ट और इन्वेंटरी को बाद में सार्वजनिक किया जाएगा।

