Monday, August 2, 2021
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HomeUttar Pradesh NewsShamliमंत्री की फटकार के बाद नपं गढीपुख्ता की तंत्रा टूटी

मंत्री की फटकार के बाद नपं गढीपुख्ता की तंत्रा टूटी

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  • सीएचसी में साफ-सफाई, पानी, पंखों की व्यवस्था में जुटे
  • चिकित्सक की भी तैनाती गई, मरीजों को मिली कुछ राहत

जनवाणी संवाददाता |

गढीपुख्ता: स्थानीय प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र के निरीक्षण के दौरान साफ- सफाई एवं अव्यवस्थाएं मिलने पर प्रदेश के कैबिनेट गन्ना मंत्री सुरेश राणा की फटकार के बाद नगर पंचायत की नींद खुल गई है। जिस पर शुक्रवार को नगर पंचायत द्वारा स्वास्थ्य केन्द्र में साफ-सफाई का अभियान चलाते हुए अन्य व्यवस्थाओं को दुरूस्त करने का काम शुरू कर दिया गया। मंत्री के निर्देश पर स्वास्थ्य केन्द्र पर चिकित्सक की भी तैनाती कर दी गई है जिससे मरीजों को कुछ राहत मिली है।

गुरुवार को प्रदेश के कैबिनेट मंत्री सुरेश राणा ने जिलाधिकारी जसजीत कौर के साथ कस्बा गढीपुख्ता स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र का औचक निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान जहां स्वास्थ्य केन्द्र के बाहर गंदगी देखकर मंत्रीजी ने नाराजगी जतायी थी, वहीं शौचालय, पानी की व्यवस्था न होने पर नगर पंचायत अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाते हुए व्यवस्था दुरूस्त करने के निर्देश दिए थे। साथ ही, फार्मासिस्ट को दवा देते देखकर मंत्री ने सीएमओ को स्वास्थ्य केन्द्र पर चिकित्सक की स्थायी तैनाती के निर्देश दिए थे। मंत्री की फटकार के बाद नगर पंचायत की नींद खुल गयी।

इस पर शुक्रवार को नगर पंचायत के कर्मचारियों ने प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पर पहुंचकर साफ सफाई का अभियान शुरू करा दिया। स्वास्थ्य केन्द्र के प्रांगण में खड़ी झाड़ियों को जेसीबी मशीन की सहायता से हटाकर जमीन को समतल कराया गया, वहीं शौचालय व पानी की व्यवस्था भी दुरूस्त करने का कार्य प्रारंभ किया गया है। नगर पंचायत अधिशासी अधिकारी अंशुमान सिंह ने बताया कि नगर पंचायत द्वारा स्वास्थ्य केन्द्र पर साफ-सफाई, शौचालय, पानी व पंखों की व्यवस्थाओं को दुरूस्त कराने का काम शुरू कर दिया गया है।

दूसरी ओर कैबिनेट मंत्री के निर्देश पर सीएमओ डा़ संजय अग्रवाल ने प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पर स्थायी चिकित्सक की तैनाती भी कर दी है जिससे ग्रामीणों को काफी राहत मिली है। बताया जाता है कि उक्त स्वास्थ्य केन्द्र पर करीब आधा दर्जन गांवों के ग्रामीण उपचार के लिए आते हैं लेकिन चिकित्सक की तैनाती न होने के कारण उन्हें परेशानियों का सामना करना पड रहा था। स्वास्थ्य केन्द्र पर तैनात फार्मासिस्ट ही मरीजों का दवा दे रहा था जिसे मंत्री ने गंभीरता से लिया था।

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