जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: भारतीय किसान संघ के जिला मंत्री आकाश राठी ने कहा कि भारतीय किसान संघ तीनों कृषि कानूनों के ना तो पक्ष में है और ना ही विरोध में। भारतीय किसान संघ का मानना है कि केन्द्र सरकार की ओर से आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 में सुधार कानून, कृषि ऊपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन एवं सुविधा) कानून, कृषक (सशक्तिकरण और संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार कानून लाए गए हैं।
इन कानूनों को लेकर भारतीय किसान संघ की ओर से चार सुझाव सरकार द्वारा अध्यादेश घोषित करने के तुरंत बाद दिए गए थे। जिसमें सरकार को बताया था कि सभी प्रकार की खरीद समर्थन मूल्य में उपज की लागत के आधार लाभकारी मूल्य को समायोजित कर होने का कानूनी प्रावधान होना चाहिए। वहीं निजी व्यापारियों का राज्य एवं केंद्र स्तर पर पंजीयन आवश्यक हो तथा उनकी बैंक सेक्युरिटी हो।
एक पोर्टल के द्वारा सबके लिए उपलब्ध रहे। इस संदर्भित जो भी विवाद हों उनके समाधान हेतु स्वतंत्र कृषि न्यायालयों की व्यवस्था हो और सब विवादों का निपटारा किसान के गृह जिले में ही होना चाहिए। इसके अलावा इन अध्यादेशों में ‘किसान’ की परिभाषा में कार्पाेरेट कंपनियां भी एक किसान के रूप में आ रही हैं। उसको भी तर्कसंगत बनाकर जो केवल कृषि पर ही निर्भर हैं, वहीं इस परिभाषा में किसान माना जावे।

