- महाभारतकालीन अवशेष कई सालों से जो मिट्टी में है दफन, लाया जा रहा सामने
- कई अन्य कालों का खुलासा होने की एएसआई के अधिकारियों को उम्मीद
जनवाणी संवाददाता |
हस्तिनापुर: महाभारत कालीन प्राचीन तीर्थ नगरी हस्तिनापुर में दूर-दूर तक फैले टीलों के मैदान के नीचे 10 से 20-25 फीट नीचे एक पूरा नगर दुनिया के कोलाहल से दूर शांत वातावरण में सो रहा है। लगभग 2500 साल पहले ऐतिहासिक तीर्थ नगरी में नगर आबाद था। जिसमें लोग निवास करने के साथ कपडेÞ का उद्योग भी करते थे। इस क्षेत्र में अब भी थोड़ी-सी खुदाई पर ही प्राचीन र्इंटें व पुरावशेष निकलने लगते हैं। जोकि इस बात की गवाही देते हैं कि वहां नीचे कोई न कोई शहर बसा है। कदवंती के अनुसार द्रोपद्री के शाप के बाद नगर बर्बाद हुए या नहीं, लेकिन गंगा की बाढ़ ने हस्तिनापुर नगरी को कई बार उजाड़ दिया। उत्खनन के दौरान निकल रह रेत के टीले इससे कहानी पर सत्य की पुष्टि करते हैं।

महाभारत कालीन तीर्थ नगरी हस्तिनापुर स्थित उल्टा खेड़ा और पांडव टीला में चल रहे उत्खनन महाभारत काल के साथ कई अन्य कालों का खुलासा होने की एएसआई के अधिकारियों को उम्मीद है। टीले पर चल रही खुदाई से हजारों वर्ष पुराने राज पर से पर्दा उठने के साथ हस्तिनापुर को अपनी पहचान मिलने की उम्मीद भी है। एएसआई की टीम यहां कैंप लगाकर महाभारत के अर्जुन की तरह मछली की आंखों को निशाना मानकर अपना लक्ष्य साधना शुरू कर चुकी है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में न सिर्फ हस्तिनापुर के रहस्यों पर से पर्दा उठेगा, बल्कि यहां ऐसी वर्ल्ड क्लास सुविधाएं होंगी कि टूरिस्ट खिंचे चले आएंगे। एएसआई की टीम फिर हस्तिनापुर के जंगल में पांडव टीले में उन्हीं भवनों को ढूंढ़ रही है, जिसका इतिहास में वर्णन है। टीम की कोशिश है कि महाभारतकालीन अवशेष जो कई सालों से मिट्टी में ही दफन हैं, उनको सामने लाया जा सके।
कई संस्कृति का हस्तिनापुर में हुआ विनाश
पुरातत्व विभाग द्वारा उल्टा खेडा टीले पर किये जा रहे उत्खनन में कई हस्तिनापुर में बार-बार बाढ़ आने के साक्ष्य उत्खनन के दौरान लगातार मिले हैं। हस्तिनापुर स्थित एएसआई विभाग के पास चल रहे उत्खनन कार्य में एक टेंच से हस्तिनापुर में बार-बार भारी बाढ़ और बाढ़ से विनाश होने के साक्ष्य मिले थे। कई दिनों से चल रहे उत्खनन कार्य में एक बार फिर भारी बाढ़ के साक्ष्य मिले हैं और इस दौरान कई संस्कृति विनाश के काल में समा गई। उत्खनन के दौरान मिले बालू रेत भी हस्तिनापुर में बाढ़ आने के साक्ष्य दर्शाता है।
उत्खनन में मिले हड्डियों के तीर
उल्टा खेड़ा टीले पर चल रहे उत्खनन कार्य में एएसआई की टीम को अब तक चावल के दाने और उड़द की दाल के दाने मिले हैं। इसके साथ ही ऐतिहासिक और मौर्य काल में बच्चे द्वारा खेल के रूप में प्रयोग की जाने वाली घोड़ा गाड़ी का पहिया भी मिला। इससे पूर्व टीम को लगातार लौह अयस्क किल, हसिया, ताम्र सलाका, टेराकोटा की मूर्तियां, शतरंज की मोहरें, मंकी, चूड़िया, लैम्पी, कौड़ी, बर्तनों में इंकपाट, कटोरा, थाली, गिलास, कटोरी, घड़ा, खाना बनाने का बर्तन उत्तर कालीन चमकीली मृदभांड की डिलक्स वेराइटी, मौर्य कालीन सिक्का समेत अन्य अवशेष मिले हैं। इस सप्ताह टीम को उत्खनन के दौरान लगातार हड्डियों से बने तीर मिले। जिन्हे कार्बन डेंटिंग कर जांच के लिए सुरक्षित किया गया।
खपरैल से बनी होती थी घरों की छत
उत्खनन के दौरार टीम को मिले भारी मात्रा में खपरैल का मिलना घर की छप में खपरैल को प्रयोग होने की और साफ इशारा कर रहा है। पुरातत्वविद् की माने तो उत्खनन के दौरान खपरैल का मिलना 2500 साल पूर्व घरों की छत खपरैल की होने की कहानी बताता है।

