Wednesday, May 29, 2024
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क्रोध और दया

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Amritvani


किसी गांव में एक पहलवान रहता था, जिसने एक बकरी पाल रखी थी। उसके पड़ोस में एक परिवार रहता था, जिसका एक नौजवान चुपके से पहलवान की बकरी दुह लेता और उसका दूध पी जाता। एक दिन पहलवान की पत्नी ने नौजवान को बकरी दुहते देख लिया।

उसने नौजवान से कुछ नहीं कहा लेकिन अपने पति से शिकायत की, तुम इतने बड़े पहलवान हो, पर तुम्हारी बकरी कोई और दुह लेता है और तुम कुछ नहीं कहते। पहलवान उस नौजवान के पिता के पास गया और उसे खूब भला-बुरा कहकर आ गया। लड़के के पिता ने वचन दिया कि उसका लड़का अब कभी उसकी बकरी की ओर आंख उठाकर भी नहीं देखेगा।

पिता ने लड़के को समझाया कि वह पहलवान की बकरी न दुहे। लड़का कुछ दिन शांत रहा, पर एक दिन फिर उसने वही हरकत कर दी। इस बार तो पहलवान ने ही देख लिया। पहलवान को सामने पाकर लड़का तेजी से भागा। पहलवान के गुस्से का ठिकाना न रहा। वह एक तेज हथियार लेकर लड़के के पीछे दौड़ा।

लड़का अपने घर में घुस गया। लड़के के पिता ने पहलवान को आते देख लिया था। वह समझ गया कि पहलवान काफी क्रोध में है, वह उसके लड़के के साथ कुछ भी कर सकता है। उसने सोचा क्यों न पहलवान के पैरों पर गिरकर माफी मांग ले। लेकिन वह पहलवान की मुद्रा से घबरा रहा था।

फिर उसने सोचा, क्यों न ऐसा तरीका अपनाए, जिससे उसके बच्चे की जान भी बच जाए और पहलवान का गुस्सा भी शांत हो जाए। उसने अपने बेटे को घर से बाहर निकाला और पीटने लगा। पहलवान यह देखकर ठिठक गया। कुछ देर देखता रहा। फिर उसके दिल में दया उमड़ आई।

उसने पिता को रोकते हुए कहा, अरे, इसे मार ही डालोगे क्या? ठीक है इसने बकरी दुह ली तो क्या हुआ…। पिता रुक गया। पहलवान लौट गया। इस घटना का लड़के पर गहरा असर हुआ। उसने पहलवान की बकरी को कभी हाथ नहीं लगाया।


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