- गंगनहर पटरी पर उमड़ रही कांवड़ियों की भीड़, बड़ी संख्या में गुजरे कांवड़िये
जनवाणी संवाददाता |
सरधना: चौधरी चरण सिंह कांवड़ मार्ग गंगनहर पटरी पर आस्था का मेला पूरे रस पर चल रहा है। गंगनहर पटरी पूरी तरह से केसरिया हो चुकी है। इस समय कांवड़ मार्ग गंगनहर पटरी पर आस्था का सैलाब उमड़ रहा है। पटरी से राजस्थान, मध्य प्रदेश, हरियाणा के साथ दिल्ली के कांवड़िये बड़ी संख्या में गुजर रहे हैं। इन कांवड़ियों में युवाओं के साथ बुजुर्ग, महिला, बच्चों के अलावा दिव्यांग भी बड़ी संख्या में कांवड़ ला रहे हैं। इन कांवड़ियों में दिव्यांगों के हौसले देखकर ही बन रहे हैं।
शुक्रवार को कांवड़ियों पर भोलेनाथ का खूब आशीर्वाद रहा। सुबह के समय जमकर बारिश हुई। बारिश के बीच बड़ी संख्या में कांवड़िया गंगनहर पटरी से गुजरे। सेवादार कांवड़ियों की सेवा करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। शिविरों में कांवड़ियो के लिए तमाम तरह के व्यंजन तैयार किए जा रहे हैं। सेवादार कांवड़ियों के पैरों की मालिश करके धर्म लाभ कमा रहे हैं। अधिकारी लगातार पटरी का गश्त करके व्यवस्थाओं का जायजा ले रहे हैं। शुक्रवार को रिकॉर्ड कांवड़िया पटरी से गुजरे।
कांवड़ यात्रा पर तिरंगे की डिमांड बढ़ी
मेरठ: पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कांवड़ यात्रा का रंग परवान चढ़ने लगा है। हर बार की तरह इस बार भी यात्रा में भक्ति के साथ-साथ देशभक्ति का रंग भी कांवड़ियों के सिर चढ़कर बोल रहा है। श्रावण माह और तिरंगे की तिथि को लेकर एक अलग संयोग बना। दरअसल, संविधान सभा की बैठक में 22 जुलाई 1947 के दिन तिरंगे को अपनाया गया था तथा इस साल कांवड़ यात्रा का आगाज भी 22 जुलाई को हुआ। बता दें कि हर साल शिवभक्त न सिर्फ भगवा झंडा लेकर चलते हैं। बल्कि देशभक्ति के प्रतिक तिरंगे ध्वज को लेकर भी कांवड़ लाते हैं।
इन दिनों गाड़ियों, झांकियां, टू व्हीलर तथा कांवड़ियों के कंधों पर रखी कांवड़ पर तिरंगा सजा नजर आ रहा है। बोल बम के साथ भारत माता की जय के खूब जयघोष हो रहे हैं। इन दिनों तिरंगा हाइवे, शहर के बाजारों, दुकानों पर जमकर बिक रहे हैं। 15 अगस्त और कांवड़ियों की डिमांड को देखते हुए खंदक बाजार में लाखों तिरंगे तैयार किये जा रहे हैं। खंदक बाजार मे तैयार झंडे महाराष्ट्र, केरल, तमिलनाडु, बिहार, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली, गुड़गांव में सप्लाई किया जा रहे हैं। बीआई टैक्सटाइल के मालिक नीलकमल रस्तौगी बताते है कि साल के 365 दिन झंडा तैयार किए जाते हैं। औसत 1 दिन में केवल 15 से 20 झंडे तैयार किए जाते हैं।
इस समय सीजन की डिमांड बढ़ जाती है। जिसके वजह से पांच सौ से साढ़े पांच सौ झंडे प्रतिदिन तैयार किये जा रहे हैं। कारीगरों से ओवर टाइम कराया जा रहा है। खंदक बाजार के महामंत्री अंकुर गोयल ने बताया कि कांवड़ यात्रा में 50 लाख से एक करोड़ के बीच का टर्नओवर आता है। झंडे विक्रेता ने बताया कि मोदी के हर घर तिरंगा अभियान के बाद से तिरंगे की डिमांड बढ़ी है। आमतौर पर तिरंगा खादी पर तैयार किया जाता है। जिसको बनाने में लागत और मेहनत दोनों कम पड़ती है।
कांवड़ियों के लिए तैयार झंडे आम तिरंगों से बिल्कुल अलग तरह से तैयार किये जाते हैं। कांवड़िए सस्ता झंडा पसंद करते हैं। इस झंडे को रोटो नाम के पॉलिएस्टर कपड़े पर तैयार किया जाता है। इस कपड़े की खास बात यह है कि खादी की तरह इसमें तीनों रंगों को सिलना नहीं पड़ता बल्कि इसको प्रिंटिंग तकनीक के द्वारा तैयार किया जाता है। यह झंडा साइज के हिसाब से बिकता है। जिसकी कीमत 20 रुपये से 1200 रुपये तक है। बता दें कि मेरठ में अब तक 8 से 10 लाख झंडे बिक चुके हैं।
हाइवे होने लगा केसरिया रंग में सरोवर
मोदीपुरम/दौराला: एनएच-58 पर शिवभक्तों की भीड़ धीरे-धीरे उमड़ने लगा है। हाइवे पर अब केसरिया रंग में सरोवर होने लगा है। शिवभक्तों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन द्वारा हाइवे के कट पूरी तरह से बंद कर दिए गए हैं। श्रावण माह में कांवड़ सेवा शुरू होती है। इस बार पिछले वर्ष के मुकाबले इस वर्ष अधिक शिवभक्तों की तादाद बढ़ने की संभावना है। एलआईयू द्वारा शिवभक्तों की बढ़ती भीड़ की रिपोर्ट शासन को भेजी है।
उधर, रोहटा में कांवड़ मार्ग गंगनहर पटरी पर अब भोलों की भीड़ बढ़ने लगी है। पूरी कांवड़ मार्ग गंगनहर पटरी केसरिया रंग में रंगी नजर आने लगी है। रंग बिरंगी तरह-तरह की कांवड़ और झांकी लेकर भोलों का रेला कांवड़ मार्ग गंगनहर पटरी पर बढ़ता जा रहा है। बुजुर्ग, महिलाओं और युवाओं को भी जोश के साथ कांवड़ लाते हुए देखा जा सकता है। मनमोहक झांकी लेकर गुजर रहे भोलो के जज्बे को देखकर लोग सलाम कर रहे हैं।

