- सेशन कोर्ट में पेशी की दलील देकर मोहलत मांगी
- पानी की व्यवस्था न होने पर भी अफसरों को गरियाया
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: छात्र राजनीति से अपने कैरियर की शुरुआत करने वाले सरधना के समाजवादी पार्टी के विधायक अतुल प्रधान अभी भी अपने को छात्र नेता ही समझते हैं! विधायक जैसे जिम्मेदारी के पद पर होते हुए भी जब वह जिलाधिकारी/ जिला निर्वाचन अधिकारी के न्यायालय कक्ष में पहुंचे तो पौने तीन बज रहे थे। उस समय हापुड़ के एक निर्दलीय डाक्टर प्रत्याशी अपना नामांकन पत्र जमा कर रहे थे।
न्यायालय कक्ष में सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी का कार्य देख रहे सिटी मजिस्ट्रेट कागजातों की जांच कर रहे थे। अतुल प्रधान को पीछे बैंच पर बैठकर इंतजार करने को कहा गया। लेकिन बडबोले अतुल प्रधान कहां चुप बैठने वालों में थे। वह बाहर खड़े सिपाहियों से कहने लगे कि सिविल लाइन थाने के दरोगा जी क्या यहां मौजूद हैं?
इस दौरान तीन बजने पर सिटी मजिस्ट्रेट ने न्यायालय कक्ष बंद करवा लिया। गेट बंद होने के बाद भी अतुल प्रधान का बोलना बदस्तूर रहा। सिटी मजिस्ट्रेट से मुखातिब होते हुए अतुल प्रधान कहने लगे कि यहां कम से कम पीने के पानी की व्यवस्था तो होनी चाहिए। अगर गर्मी से कोई मर मरा गया तो कौन जिम्मेदार होगा? इस पर सिटी मजिस्ट्रेट ने कहा कि आपका फार्म जल्दी चेक करते हैं।
फिर अतुल प्रधान का फार्म सिटी मजिस्ट्रेट चेक करने लगे। वह बारीकी से हर पेज पर देख रहे थे कि कहीं कोई खामी या कमी तो नहीं रह गई है। इस पर अतुल प्रधान सिटी मजिस्ट्रेट से बोले कि आप आराम से फार्म चेक करते रहो। मुझे सेशन कोर्ट में एक तारीख पर जाना है। इसपर अपनी आदत के विपरीत सिटी मजिस्ट्रेट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि आप का फार्म है और आपको यहां मौजूद रहना ही होगा।
तब अतुल प्रधान डीएम कोर्ट में ही चहल कदमी करने लगे। मेन फार्म कंप्लीट देखकर सिटी मजिस्ट्रेट ने अतुल प्रधान को जाने की मोहलत दे दी। जबकि प्रस्तावक पूर्व सपा पार्षद संगीता राहुल व अधिवक्ता कागजात चेक करवाते रहे। लगभग साढे पौने चार बजे प्रस्तावक को भी रसीदें देकर जाने दिया गया।

