- शुभ इंद्र योग में श्राद्ध करने से तृप्त हो जाते हैं पितृ
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: आश्विन महीने की पड़ने वाली अमावस्या तिथि को सर्वपितृ अमावस्या शुभ इंद्र योग में मनाई जाएगी। आज पितृपक्ष में पड़ने वाली अमावस्या के दिन वर्ष का अंतिम सूर्यग्रहण भी लगने जा रहा है। पं. राहुल शर्मा के अनुसार शुभ इंद्रयोग प्रतिवर्ष नहीं बनता है, लेकिन ग्रह-नक्षत्रों की स्थिती के कारण कभी-कभी यह योग एक वर्ष में दो बार भी बन जाता है। इस वर्ष भी ऐसी ही स्थिती बन रही है।
ये शुभ योग अधिकाशं पितृपक्ष के दौरान ही बनते है। इसे श्राद्ध और दान के लिए बहुत शुभ माना गया है। इस बार अमावस्या के दिन शनिवार होने के चलते इसे शनिश्चरी अमावस्या भी कहा जाता है। पितृपक्ष की अमावस्या को मोक्षदायिनी अमावस्या भी कहते है। आश्विन महीने में सर्वपितृ अमावस्या पड़ने से इसका महत्व और बढ़ गया है। इन शुभ योगों में पितरों को तर्पण कर उन्हें प्रसन्न और तृप्त किया जा सकता है।
पितृदोषों से मुक्ति के लिए क्या करें दान
इस दिन चांदी, चावल, दूध, जूते-चप्पल, काले तिल, वस्त्र, नमक और छाता का दान के साथ गोमाता को गुड़ और चारा खिलाकर पितृों को प्रसन्न कर सकते हैं तो वहीं ब्राह्मण, गरीब, जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन जरूर कराकर समर्थयानुसार दान-दक्षिणा करें। अमावस्या तिथि 13 अक्टूबर को 9:51 से शुरू होकर 14 अक्टूबर शनिवार रात्रि 11:25 बजे तक रहेगी।

