- हापुड़ अड्डा, बेगमपुल, रेलवे स्टेशन समेत अन्य मार्गों पर भी नहीं दिखी ई-रिक्शाएं, यात्री रहे परेशान
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: उत्तर प्रदेश ई-रिक्शा चालक वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से किए गए हड़ताल का असर सड़कों पर दिखाई दिया। शुक्रवार को इक्का-दुक्का ही ई-रिक्शा नजर आई। ऐसे में आॅटो यात्रियों का सहारा बने। कई जगहों पर यात्रियों को कुछ परेशानी भी झेलनी पड़ी। सुबह से ही हापुड़ अड्डा, बेगमपुल, रेलवे स्टेशन, घंटाघर चौक, दिल्ली रोड, फुटबॉल चौक समेत अन्य मार्गों और चौराहों पर ई-रिक्शाएं नहीं दिखी। जिसका आॅटो चालकों ने भरपूर फायदा उठाया। दिनभर हर सड़क पर आॅटो ही दौड़ते नजर आए। हालांकि ई-रिक्शाओं की हड़ताल से रोड पर खाली-खाली नजर आए।
चौराहों पर आॅटो की लंबी कतार दिखी। शहर को जाम से मुक्त बनाने के लिए यातायात पुलिस ने ई-रिक्शाओं पर सख्ती बरती। उनके रूट निर्धारित करने के साथ ही अन्य नियम भी लागू किए गए। जिससे ई-रिक्शा चालकों को परेशानी होने लगी। ऐसे में उत्तर प्रदेश ई-रिक्शा चालक वेलफेयर एसोसिएशन के नेतृत्व में ई-रिक्शा चालकों ने कुछ दिन पहले पुलिस अधीक्षक यातायात के साथ मीटिंग की और समस्याओं से अवगत कराया। इसके बाद एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष विशाल कौशिक ने प्रेस वार्ता करते हुए 25 अक्टूबर को हड़ताल किए जाने की घोषणा की थी। शुक्रवार को ई-रिक्शा चालकों ने अपने घर पर रहकर ही हड़ताल की। जिसका असर सड़कों पर भी देखने को मिला।
हालांकि कुछ जगहों पर इक्का-दुक्का ई-रिक्शा दौड़ती हुई भी नजर आई। बस स्टैंड के आसपास और अन्य चौराहों पर यात्रियों की निगाहें ई-रिक्शाओं का ढूंढती नजर आई। कुछ यात्री अपने सामान के साथ पैदल जाते दिखे। उनसे बात की गई तो उन्होंने कहा कि ई-रिक्शा नहीं मिलने की वजह से वह पैदल जा रहे है। उधर, ई-रिक्शाओं के ना चलने से दिनभर आॅटो चालकों की चांदी रही। हर रूट पर आॅटो दौड़ते दिखाई दिए। रेलवे स्टेशन पर सुबह से ही आॅटो का जमघट लगा था। जिस तरह से रोजाना ई-रिक्शा वाले आवाज लगाते थे, ऐसे ही आज आॅटो वाले यात्रियों को बुलाते दिखे।
एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने दिया मांगपत्र
उत्तर प्रदेश ई-रिक्शा चालक वेलफेयर एसोसिएशन के पदाधिकारी गुरुवार को जिलाधिकारी कार्यालय पर आए। उन्होंने अपनी समस्याओं को बताते हुए मांगपत्र एडीएम को सौंपा। प्रदेशाध्यक्ष विशाल कौशिक ने कहा कि कुछ समय से ई-रिक्शा चालक काफी परेशानियों का सामना कर रहे है। ऐसे में वह मानसिक और आर्थिक रूप से दबाव में है। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने जो रिक्शाओं के रूट निर्धारित किए है, वह काफी छोटे है। जिसकी वजह से इनकी कमाई आधी हो गई है। इसपर संज्ञान लेकर रूट प्लान में संशोधन किया जाए।
सड़कों पर ग्रुप में घूमते दिखे एसोसिएशन के सदस्य
ई-रिक्शाओं की हड़ताल के दौरान सड़कों पर युवाओं के एक ऐसा ग्रुप में घूमता दिखाई दिया, जो ई-रिक्शाओं को चलने ही नहीं दे रहा था। हापुड़ अड्डे के पास भी युवाओं की इस टोली ने एक ई-रिक्शा की चाबी निकाल ली और उसे हड़ताल करने की बात कही। इसके बाद ई-रिक्शा चालक ने चाबी वापस लेकर वहां से चला गया। इन युवाओं का कहना था कि हम सब लोग पागल नही है, जो हड़ताल कर रहे है, इसमें सभी ई-रिक्शा चालकों का सहयोग होना चाहिए।
किसी भी मार्ग पर प्रतिबंधित न की जाए ई-रिक्शाएं
आॅटो रिक्शा चालक संघ के पदाधिकारियों ने पुलिस अधीक्षक यातायात राघवेंद्र मिश्रा से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि मेरठ के छह मार्गों पर ई-रिक्शाओं को पूरी तरह से प्रतिबंध कर दिया गया है। जिससे ई-रिक्शाओं को आर्थिक रूप से परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशासन इस आदेश को वापस लें और ई-रिक्शाओं को सभी मार्गों पर चलने की अनुमति दे। संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि ई-रिक्शा चालक पांच रुपये में 3-4 किलोमीटर का रास्ता तय कर करते है। इसी कमाई से अपने परिवार का भरण पोषण करते है।
उन्होंने कहा रास्तों पर केवल ई-रिक्शाओं की वजह से ही जाम नहीं लगती है, बल्कि हर दुकानदार द्वारा अपने दुकान के बाहर किए गए अतिक्रमण भी जाम की बड़ी वजह है। इसके अलावा रास्तों पर ही फलों और सब्जियों की ठेली लगाई जाती है, इससे भी जाम की स्थिति पैदा होती है। ऐसे में केवल ई-रिक्शाओं पर सख्ती ना बरती जाए। ई-रिक्शाओं को सभी रूटों पर आवागमन की अनुमति दी जाए, ताकि ई-रिक्शा चालक अपने परिवार का पालन कर सके।

