जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम खान अपनी भाभी के जनाजे में शामिल नहीं हो सके। दोनों वर्तमान में रामपुर जेल में बंद हैं और भाभी के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए चार घंटे की पैरोल की मांग की गई थी, लेकिन जिला प्रशासन ने इसे जेल नियमों का हवाला देते हुए अस्वीकार कर दिया।
पत्र लिखकर की थी पैरोल की मांग
आजम खान के बड़े भाई शरीफ खान की पत्नी सलमा शहनाज का निधन हो गया था, और आजम खान जनाजे में शामिल होना चाहते थे। इसके लिए उनके वकील ने डीएम को पत्र लिखकर पैरोल की मांग की थी, जो केवल चार घंटे के लिए थी, ताकि वे अपने परिवार की इस दुखद घड़ी में शामिल हो सकें। हालांकि, डीएम ने आवेदन को खारिज कर दिया।
क्यो नहीं दी गई पैरोल की अनुमति
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, जेल नियमों के मुताबिक, किसी बंदी को पैरोल पर रिहाई केवल माता-पिता, भाई-बहन, पति-पत्नी या पुत्र-पुत्री की बीमारी, शादी या मृत्यु के मामलों में ही दी जा सकती है। चूंकि भाभी को इस श्रेणी में नहीं रखा जाता, इसलिए पैरोल की अनुमति नहीं दी गई।
इस मामले में काट रहे हैं सजा
आजम खान और अब्दुल्ला आजम खान इस समय रामपुर जेल में बेटे अब्दुल्ला के दो पैनकार्ड बनाने के मामले में सजा काट रहे हैं। इस फैसले से परिवार में निराशा है, लेकिन प्रशासन ने नियमों का सख्ती से पालन किया है। उल्लेखनीय है कि आजम खान सीतापुर जेल से रिहाई के 53 दिन बाद फिर से जेल गए थे।

