Sunday, February 22, 2026
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घंटों देरी से चली हरिद्वार जाने वाली बांद्रा टर्मिनस

  • सिटी स्टेशन पर तीन घंटे रुकी रही ट्रेन, यात्री रहे परेशान…

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के रेल रोको आंदोलन के कारण रेल यातायात गुरुवार को घंटों तक बाधित रहा। हरिद्वार जाने वाले बांद्रा टर्मिनस मेरठ कैंट स्टेशन पर दोपहर करीब साढ़े 12 बजे पहुंचनी थी, लेकिन किसानों के रेल पटरियों पर डेरा डालने के कारण सिटी स्टेशन पर ही ट्रेन को रोकना पड़ा। घंटो देरी बाद चली ट्रेन से यात्रियों को भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

किसानों द्वारा किए गए रेल पटरियों के अवरोध के कारण घंटों तक रेल यातयात बाधित रहा। ऐसे में यात्रियों को खासतौर से परेशानियोें का सामना करना पड़ा। सिटी स्टेशन पर घंटों तक खड़ी बांद्रा टर्मिनस के यात्रियों का कई परेशानियों का सामना करना पड़ा।

बता दें कि ब्रांद्रा से हरिद्वार के लिए चलने वाली यह ट्रेन मेरठ कैंट स्टेशन पर दोपहर 12:25 बजे पहुंचती और 12:27 पर रवाना होती है, लेकिन गुरुवार को यह ट्रेन दोपहर करीब साढ़े तीन बजे रवाना हुई। जिस कारण यात्रियों को मुश्किले झेलनी पड़ी। करीब तीन घंटे की देरी से चली ट्रेन के यात्रियों ने दैनिक जनवाणी से बातचीत करते हुए बताया कि रेल के इतनी देरी से चलने की अगर जानकारी पहले होती तो टिकट ही रद करा लेते, लेकिन ऐन मौके पर परेशानी उठानी पड़ रही है।

वहीं, महिलाएं और बच्चे भी परेशान दिखे। यात्रियों को कोच में पानी खत्म होने की भी शिकायत मिली। मुंबई और सूरत से लंबा सफर तय करके आ रहे यात्रियों को ज्यादा परेशानी हुई। यात्रियों का कहना था कि सफर में लगने वाले समय के अनुसार ही खाना और अन्य व्यवस्था की हुई थी, लेकिन अब घंटो देरी होने से मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

सूरत से हरिद्वार जा रहे शैलेश ने कहा कि आंदोलन सही है या गलत यह तो नहीं कह सकते, लेकिन रेल मार्ग को बाधित किया जा रहा है तो इसकी भी अलग से व्यवस्था की जानी चाहिए थी। जिससे यात्रियों को परेशानी न हो। वहीं, स्टेशन पर ट्रेन रुकी है तो जिला प्रशासन को भी व्यवस्था करनी चाहिए थी। अगर पहले से इसकी जानकारी होती तो प्लानिंग करके चलते।

वहीं, मुंबई से मुजफ्फरनगर जा रहे वसीम का कहना है कि काफी समय रेल रुकी हुई है, ऐसे स्टेशन यात्रियों के लिए व्यवस्था करनी चाहिए थी, लेकिन यहां कई कोच में पानी तक की व्यवस्था शौचालयों में नहीं है। इससे बच्चों और महिलाओं को भी परेशानियों का सामना करना पड़ा रहा है।

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