Monday, March 1, 2021
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किसान आंदोलन: भाजपा के भीतर ये बेचैनी कैसी ?

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  • मिशन भाजपा: डैमेज कंट्रोल करने में जुटा शीर्ष नेतृत्व

रामबोल तोमर |

मेरठ: जाटों का गढ़ कहे जाने वाले पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा में लगातार हो रही किसानों की महापंचायतों ने भाजपा को परेशानी में डाल दिया है। यही वजह है कि खुद गृह मंत्री अमित शाह व भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने हरियाणा और उत्तर प्रदेश के जाट नेताओं के साथ बातचीत की। किसानों के गुस्से की आग धधक रही है।

किसान आंदोलन के इस महारण में भाजपा खिसकते जनाधार को लेकर रणनीति तैयार कर रही है। क्योंकि वर्ष 2022 में विधानसभा चुनाव यूपी में होने जा रहे हैं। किसान नाराज रहा तो भाजपा को बड़ा नुकसान हो सकता है। इसको लेकर ही भाजपा के नेताओं ने रोडमैप तैयार किया हैं, जिसमें वेस्ट यूपी में भाजपा के हो रहे राजनीतिक नुकसान की भरपाई के लिए केन्द्रीय मंत्री एवं मुजफ्फरनगर से सांसद डा. संजीव बालियान व बागपत के सांसद सत्यपाल सिंह को लगाया है।

जब से वेस्ट यूपी व हरियाणा में किसानों की महापंचायत हो रही है, तब से भाजपा की बेचैनी बढ़ गई है। वेस्ट यूपी में बीस ऐसी विधानसभा सीटें हैं, जिसकी हार-जीत जाट बिरादरी के मतदाता करते रहे हैं। वर्तमान में वेस्ट यूपी से भाजपा के 16 जाट विधायक चुनकर विधानसभा में गए थे।

सीएसजीएस सर्वे कंपनी के अनुसार वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में वेस्ट यूपी के जाटों का भाजपा को 77 फीसदी वोट मिला था। 2019 के लोकसभा चुनाव में यह प्रतिशत बढ़कर 91 फीसदी हो गया था। सीएसजीएस सर्वे कंपनी के सर्वे पर यकीन किया जाए तो वेस्ट यूपी का अधिकांश जाट मतदाता भाजपा पर गया था।

यह तथ्य भी है कि वेस्ट यूपी की 17 लोकसभा सीटें ऐसी है, जहां पर जाट मतदाता एकजुट हो जाता है तो वह किसी भी प्रत्याशी के चुनाव का खेल बिगाड़ सकता है। यही वजह है कि भाजपा के शीर्ष नेताओं की परेशानी बढ़ गई है। भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत के आसुओं की कीमत भाजपा को 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव में चुकानी पड़ सकती है।

भाजपा का मिशन डैमेज कंट्रोल भी इसी को देखते हुए किया जा रहा है। वेस्ट यूपी के जाट सांसद व विधायकों की दिल्ली स्थित डा. संजीव बालियान के आवास पर इसी को लेकर मीटिंग भी हो चुकी हैं। अब किसानों के गुस्से को कम कैसे किया जाए। इसको लेकर भाजपा रणनीति तैयार कर रही है। भाजपा नेताओं की मुश्किलें बढ़ाई है खाप पंचायतों ने।

अब खाप पंचायत मुखियां कि किस तरह से मानमनोव्वल की जाए? इसी पर मंथन भाजपा के शीर्ष नेतृत्व कर रहा है। हर रोज पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा में हो रही बड़ी-बड़ी महापंचायतों से भाजपा की नींद उड़ी हुई है। देश खाफ, सांगवान, दहिया, बालियान, चौगामा, पंवार जैसे बड़ी जाट खापों ने महापंचायत कर किसान आंदोलन का समर्थन किया है। भाजपा को दिखने लगा है कि जाट लैंड में उसकी जमीन कमजोर पड़ने लगी है। राकेश टिकैत की आंसुओं ने भाजपा का नुकसान सबसे ज्यादा किया है। राकेश टिकैत भी खुद बालियान खाप से है और उनके बड़े भाई चौधरी नरेश टिकैत बालियान खाफ के चौधरी है।

…तो गन्ना मूल्य बढ़ा सकती है सरकार

भाजपा के शीर्ष नेता अब वेस्ट यूपी के गन्ना किसानों की नब्ज पकड़ सकते हैं। दिल्ली में चल रहे किसान आंदोलन को तोड़ने के लिए भाजपा हाईकमान यूपी के गन्ना किसानों का जो गन्ना भुगतान बकाया चल रहा है, उसका चुकता भुगतान कर सकती है। यही नहीं, इससे भी बड़ी खबर यह है कि यूपी सरकार 10 से 15 रुपये गन्ना मूल्य में वृद्धि करने का कभी भी ऐलान कर सकती है।

क्योंकि वेस्ट यूपी के किसानों को गन्ना मूल्य बढ़ाकर देने के बाद भाजपा के वेस्ट यूपी के नेता, वो किसानों के बीच जाकर यह कह सकते है कि गन्ना मूल्य बढ़ा दिया है। ऐसा करने से किसानों का गुस्सा कम किया जा सकता है। अब इसकी तैयारी भाजपा के शीर्ष नेता कर रहे हैं। कभी भी गन्ना मूल्य बढ़ाने व बकाया गन्ना भुगतान का अब तक का चुकता भुगतान करने का ऐलान किया जा सकता है। वर्ष 2017-18 में ही दस रुपये मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बढ़ाये थे।

इसके बाद से यूपी में गन्ना मूल्य में किसी तरह की वृद्धि नहीं की गई। गन्ना मूल्य बढ़ने बिजली का बिल हो सकता है आधा किसानों को ट्यूबवेल के बिजली बिल में बड़ी राहत दे सकती है। इसको लेकर भी भाजपा शीर्ष स्तर पर मंथन चल रहा है। क्योंकि वेस्ट यूपी के किसानों की ट्यूबवेल का बिजली बिल भाजपा सरकार में 100 रुपये प्रति हार्स पावर तक बढ़ा है। इसको लेकर भी किसानों में गुस्सा है।

मेरठ, मुजफ्फरनगर, शामली, बागपत, बिजनौर, गाजियाबाद में ट्यूबवेल पर साढ़े सात हार्स पावर का मोटर स्वीकृत था, लेकिन भाजपा सरकार प्रदेश में आयी तो ऊर्जा निगम ने साढ़े सात हार्स पावर को बढ़ाकर 10 हार्स पावर का भार कर दिया। पहले प्रत्येक हार्स पावर 125 रुपये किसान से लिया जाता था, लेकिन जब से भाजपा सरकार आयी है, तब से 225 रुपये प्रति हार्स पावर बिजली बिल कर दिया गया है।

इसके अतिरिक्त सरचार्ज भी किसानों से लिया जाता है। पांच हजार से ज्यादा बिजली बिल होने पर किसान की ट्यूबवेल का कनेक्शन भी काट दिया जाता है। भाजपा शीर्ष स्तर पर इसको लेकर भी मंथन चल रहा है कि किसानों की ट्यूबेवल की बिजली का बिल आधा कर दिया जाए। इसकी भी घोषणा जल्द की जा सकती है, ताकि किसानों के गुस्से को शांत किया जाए और दिल्ली में चल रहा किसान आंदोलन भी ऐसे निर्णय लेने से कमजोर हो जाएगा। एक तरह से वेस्ट यूपी में भाजपा का मिशन डैमेज कंट्रोल भी हो जाएगा।

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